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सोशल: 'ऐसा करें तो कर्ज़ माफ़ी की नौबत नहीं आएगी'
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में किसानों की कर्ज़ माफ़ करने का फ़ैसला लिया है. बैठक के बाद मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के साथ श्रीकांत शर्मा ने इसकी घोषणा की.
माना जा रहा है कि इसका लाभ क़रीब 2 करोड़ 13 लाख किसानों को पहुंचेगा.
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान कर्ज़ माफी को किसानों की समस्या की हल नहीं मानते. वो मानते हैं "सरकार को ये सोचना चाहिए कि कैसे किसानों की पैदावार की सही कीमत उन्हें मिले. किसान नेता भी इस बात को मानते हैं कि ऐसा किया जाए तो कर्ज़ माफ़ी की नौबत ही नहीं आएगी."
हालांकि सोशल मीडिया पर इस फैसले की तारीफ हो रही है.
शरद प्रधान ने बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय को बताया कि जिस तरह एक लंबी बैठक चली और उसके बाद फ़ैसला लिया गया और सुनाया गया उसमें सरकार का नौसिखियापन दिख रहा था.
वो कहते हैं, "सरकार ने अपना वायदा पूरा किया है. लेकिन ये एक इलेक्शन स्टंट बन जाता है और पार्टियां यही करेंगी क्योंकि कर्ज़ माफ़ कर देने पर वोट मिल जाएगा."
प्रदेश सरकार के 80 लाख टन गेहूं की खरीद करने के फ़ैसले पर शरद प्रधान कहते हैं "ऐसा लगता है आने वाले इलेक्शन को देखते हुए ये फैसला किया गया है. सरकार के पास 36 लाख टन गेहूं रखने की क्षमता है जिनमें से अभी भी 23 टन गेहूं रखा गया है. यूपी में ढाई लाख टन गेहूं की उत्पादन होता है."
योगी आदित्यनाथ सरकार के कर्ज़ माफी के फ़ैसले की भारतीय सोशल मीडिया पर जम कर तारीफ हो रही है.
अंकित लिखते हैं, "प्रदेश में बीजेपी की नई सरकार किसानों का 39,729 करोड़ रुपये का कर्ज़ माफ किया है, ये स्वातय योग्य कदम है. सभी बीजेपी शासित राज्यों को ऐसा करना चाहिए."
मुकेश डोबरियाल ने लिखा है, "ये उन लोगों के गाल पर ज़ोरदार तमाचा है जो योगीजी की कार्यकुशलता और वादे पूरे करने पर सवाल उठा रहे थे."
संजीव नाम के एक ट्विटर यूज़र ने इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद किया है.
वैभव वाघमरे ने इसे एक ऐतिहासिक फ़ैसला बताया है.
यूपी चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी सभाओं में लगातार ये कहते रहे थे कि उत्तर प्रदेश में सरकार बनने पर किसानों का कर्ज़ माफ़ किया जाएगा. ये भारतीय जनता पार्टी के चुनावी संकल्प पत्र का हिस्सा था.