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नज़रिया: लालू के मुलायम-माया से गुहार लगाने के मायने
राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ महागठबंधन बनाने का संकेत दिया है.
लालू प्रसाद ने ट्विटर के जरिए बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से साथ आने को कहा है.
उनका दावा है कि इससे "बीजेपी का सारा तमाशा खत्म हो जाएगा."
लेकिन क्या भारतीय जनता पार्टी के विरोधी दलों के बीच महागठबंधन तैयार करना संभव है.
बीबीसी संवाददाता हरिता कांडपाल ने वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी के सामने ये सवाल रखा. पढ़िए उनकी राय.
"अगर विरोधी दलों को भारतीय जनता पार्टी की चुनौती से जूझना है तो महागठबंधन अनिवार्य हो गया है.
ये सबको साफ़ दिख रहा है. भाजपा के पक्ष में इतनी बड़ी सुनामी के बाद भी अगर विरोधी पार्टियों के वोट को एकसाथ गिना जाए तो उन्हें करीब 95 लाख वोट भाजपा से ज्यादा मिले.
ये सब दिखा रहा है कि अगर भाजपा के विरोधी दलों को बचे रहना है तो इकट्ठे आना होगा, खासकर 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए.
इसी की पहल लालू प्रसाद यादव ने की है.
बिहार चुनाव के पहले जनता परिवार को इकट्ठा करने की कोशिश की गई थी. वो एक अटपटी कोशिश थी. अलग-अलग मुद्दों को नहीं देखा गया था.
मुलायम सिंह यादव ने चुनाव के बीच ही इकट्ठा होते जनता परिवार को तोड़ दिया था और वो निकल गए थे. उन्होंने अपने उम्मीदवार भी खड़े किए थे.
वो जनता परिवार एक विकल्प हो सकता था. लेकिन वो कहानी ख़त्म ही हो गई.
ये अलग चीज है कि लालू यादव और नीतीश कुमार इकट्ठे हो गए और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को बिहार में परास्त कर दिया.
लेकिन अब विपक्ष को संभावित महागठबंधन के लिए फूंक-फूंक कर कदम उठाने होंगे.
सब लोग क्षेत्रीय छत्रप हैं. सबकी अपने राज्यों में अहमियत है. भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार जो चुनौती रख रहे हैं, उसके लिए पर्दे के पीछे बहुत होमवर्क की ज़रुरत है.
लालू प्रसाद यादव के बयान के पहले होमवर्क किया गया है, ऐसा फिलहाल नहीं लगता है.
विपक्ष की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि ये दल कैसे एकजुट होंगे? मुद्दे क्या होंगे? राष्ट्रीय चुनाव में और गुजरात के चुनाव में एकजुट होंगे या नहीं?
अगले साल कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल और राजस्थान में चुनाव होने हैं. क्या वहां ये दल एकसाथ आएंगे?
उत्तर प्रदेश की हार का मंथन ज़रुरी है. हिंदू पहले इतने बड़े पैमाने पर कभी एकजुट नहीं हुए.
क्या विपक्षी दलों को पता है कि इसके कारण क्या हैं? इन पार्टियों को ये भी विचार करना होगा कि इतने सालों की उनकी राजनीति की क्या खामियां रही हैं?
इन मुद्दों पर विपक्ष को एकसाथ मिलकर ही विचार करना होगा, तभी आगे की रणनीति और मुद्दे समझ में आएंगे.
भारतीय जनता पार्टी तो अगले दस साल की योजना बनाकर चल रही है. उन्होंने अभी से 2019 की तैयारी शुरु कर दी है."
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