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क्या जयललिता की संपत्ति ज़ब्त होगी?
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरू से बीबीसी हिंदी के लिए
ऐसा लगता है कि तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के खिलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले में आखिरी फैसला अभी नहीं आया है.
सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है जिसमें जयललिता की संपत्तियों से 100 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूलने की मांग है.
पुनर्विचार याचिका विशेष सरकारी वकील बीवी आचार्य ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की.
आचार्य ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा, "एक बार ट्रायल कोर्ट के फैसले पर अमल हो जाए तो जुर्माने की रक़म संपत्तियों से जुटाई सकती है. आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में प्रक्रिया तय की गई है और उसका पालन होना चाहिए."
सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में ट्रायल कोर्ट के फरवरी 2014 को दिए आदेश को सही माना जिसमें जयललिता, शशिकला, इलावरासी और वीएन सुदर्शन को दोषी माना गया था.
ट्रायल कोर्ट ने सितंबर 2014 में जेल की सज़ा के साथ ही 100 करोड़ रूपये का जुर्माना जयललिता पर और बाकी लोगों पर 10-10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.
तमिलनाडु के हाईकोर्ट ने जब इस फैसले को पलट कर उन्हें दोषमुक्त कर दिया तो कर्नाटक सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट में ले कर गई.
कर्नाटक सरकार इस मामले में इसलिए पड़ी क्योंकि मामले की शिकायत करने वालों ने तमिलनाडु में न्याय ना मिलने की आशंका जताई थी जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ये मामला कर्नाटक सरकार को सौंप दिया.
दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में हाईकोर्ट के आदेश को उलट दिया और ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही बताया.
आचार्य का कहना है, "एक बार अगर फैसला सुरक्षित कर लिया गया और फिर उसे सुना दिया गया तो इसका मतलब है कि आदेश उसी दिन के हैं जिस दिन यह सुरक्षित रखा गया."
जे जयललिता का चेन्नई में 5 दिसंबर को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. उनकी तबियत खराब होने पर उन्हें यहां 22 सितंबर को भर्ती किया गया था.
आचार्य कहते हैं, "विशुद्ध क़ानूनी दृष्टिकोण से से देखें तो जुर्माने की वसूली और संपत्ति को ज़ब्त करना आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ा पहलू है, क्योंकि संपत्ति ग़ैरक़ानूनी तरीके से अर्जित की गई. सरकार को अधिकार है कि वो 100 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूल करे."
इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा, "और गैरक़ानूनी तरीके से अर्जित सारी संपत्तियां सरकार के पास चली जाएंगी."
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के तुरंत बाद शशिकला को जयललिता की जगह मुख्यमंत्री बनने की योजना छोड़नी पड़ी.
जेल जाने के लिए और समय के उनके अनुरोध को जब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया तो शशिकला ने बेंगलुरू के ट्रायल कोर्ट में अगले दिन समपर्ण कर दिया.
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