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सुप्रीम कोर्ट: दोनों पक्ष राम मंदिर का मसला आपस में सुलझाएँ
अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम टिपप्णी करते हुए कहा कि दोनों पक्ष मसले को बातचीत के ज़रिए सुलझाएं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये धर्म और आस्था से जुड़ा मामला है और संवेदनशील मसलों का हल आपसी बातचीत से हो.
मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने सुनवाई के दौरान कहा, "ये धर्म और आस्था से जुड़ा मामला है. आपस में बैठें और सुलझाएँ."
कोर्ट ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए अगले शुक्रवार यानी 31 मार्च तक का समय दिया है.
भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट में अयोध्या मामले की तुरंत सुनवाई के लिए याचिका दायर की हुई है.
सुब्रमण्यम स्वामी ने हाल ही में बीबीसी से किए फ़ेसबुक लाइव में कहा था कि अयोध्या में दो साल के भीतर वो राम मंदिर बनवाएंगे और वहीं बनवाएंगे जहां वो पहले से मौजूद है.
उन्होंने कहा था, "हम कहीं और राम मंदिर नहीं बना सकते क्योंकि ये आस्था का मामला है."
1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढाह दिया गया था.
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ पीठ ने बहुमत से यह फ़ैसला दिया था कि जिस जगह पर राम की मूर्ति स्थापित है वहाँ मूर्ति ही रहेगी और शेष ज़मीन को तीन बराबर हिस्सों में बाँटा जाएगा.
इसमें से एक हिस्सा सुन्नी वक्फ़ बोर्ड को देने का फ़ैसला किया गया था.
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