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नवाज़ शरीफ़ के सामने गायत्री मंत्र गाने वाली पाकिस्तानी लड़की
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
पिछले सप्ताह कराची में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के सामने गायत्री मंत्र गाकर चर्चा में आने वाली पाकिस्तानी गायिका नरोधा मालनी का कहना है कि वे अपने हरेक कार्यक्रम की शुरुआत गायत्री मंत्र से ही करती हैं.
पाकिस्तान की पहली हिंदू गायिका होने का दावा करने वाली नरोधा का कहना है कि यह महज़ संयोग था कि उस आयोजन में प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ भी मौज़ूद थे.
पाकिस्तानी आर्ट्स काउंसिल की सदस्य नरोधा कहती हैं, "हर साल हम पाकिस्तान में धूमधाम से होली मनाते हैं. इस बार भी कराची में होली पर वह आयोजन था, जिसमें प्रधानमंत्री उपस्थित थे. जब मैंने गायत्री मंत्र का गायन किया तो उन्होंने तालियां बजा कर मेरी हौसलाफ़ज़ाई की. वे बेहद ख़ुश नज़र आ रहे थे."
नरोधा इन दिनों छत्तीसगढ़ के रायपुर में स्थित सिंधी समाज के तीर्थस्थल शदाणी दरबार के एक आयोजन में भाग लेने के लिये भारत आई हुई हैं.
संगीत की प्रेरणा
अपने हिंदू और सूफी धार्मिक गीतों के लिए चर्चित नरोधा ने नौ साल की उम्र में ही गाना शुरू कर दिया था. परिवार में हालांकि गायन की कोई परंपरा नहीं थी.
कराची से लगे हुए गडाप में हेल्थ टेक्निशियन के पद पर काम करने वाले नरोधा के पिता चंदीराम और उनकी मां ने उन्हें संगीत के लिए प्रेरित किया.
नरोधा ने शौकिया गाना शुरू किया और फिर संगीत की शिक्षा भी ली. पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित संगीत प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी पहचान बनाने वाली नरोधा सिंधी, उर्दू, पंजाबी समेत कई भाषाओं में गाती हैं.
नरोधा मालनी का दावा है कि उन्होंने पिछले बारह सालों में एक हज़ार से अधिक गाने गाए हैं और ये अलबम पाकिस्तान के साथ-साथ भारत में भी लोकप्रिय हुए.
नरोधा कहती हैं, "मेरे चाहने वाले जब मुझे सिंध की कोयल और सिंध की लता जैसी उपाधियों से नवाज़ते हैं तो मुझे लगता है कि इससे अधिक कुछ नहीं चाहिए. मेरी ज़िंदगी में संगीत रचा-बसा है और संगीत में मेरी ज़िंदगी. मेरे मुल्क़ पाकिस्तान में मुझे जो प्यार मिलता है, उसको मैं लफ़्ज़ों में बयान नहीं कर सकती."
कराची में विज्ञान विषय से ग्रैजुएशन कर रही नरोधा पाकिस्तानी गायिका नूरजहां, बांगलादेश की गायिका रूना लैला और लता मंगेशकर को अपना आदर्श मानती हैं.
नरोधा का कहना है कि नई पीढ़ी अगर अपनी परंपरा को पहचाने तो पूरी दुनिया में एशिया के संगीत का बोलबाला हो सकता है.
नरोधा कहती हैं, "पाकिस्तान और हिंदुस्तान के कलाकारों को आपस में और अधिक मिलजुल कर काम करने की ज़रूरत है. एक दूसरे के साथ संगीत में कई प्रयोग किए जा सकते हैं, जो बेमिसाल साबित होंगे."
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