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दलित छात्रों के साथ 'भेदभाव' पर बनी थोराट रिपोर्ट क्या कहती है?
जेएनयू में कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले मुथुकृष्णनन जीवानंदम ने अपने आख़िरी पोस्ट में, 'थोराट कमेटी की रिपोर्ट लागू न किए जाने पर' निराशा व्यक्त की थी.
उहोंने फ़ेसबुक पर लिखा था, "एम. फिल/पीएचडी दाख़िलों में कोई समानता नहीं है, मौखिक परीक्षा में कोई समानता नहीं है. सिर्फ समानता को नकारा जा रहा है. प्रोफ़ेसर सुखदेव थोराट की अनुशंसा को नकारा जा रहा है."
असल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एससी/एसटी विद्यार्थियों के साथ कथित भेदभाव को लेकर 2007 में प्रोफ़ेसर सुखदेव थोराट के नेतृत्व में एक कमेटी बनी थी.
इस कमेटी ने विस्तृत अध्ययन कर, भेदभाव मिटाने के संबंध में कई सिफ़ारिशें की थीं.
लेकिन दलित छात्रों का कहना है कि इन्हें संस्थानों में लागू नहीं किया जा रहा है. रोहित वेमुला आत्महत्या मामले में भी कैंपसों में होने वाले भेदभाव का मुद्दा उठा था.
क्या हैं सिफ़ारिशें
1- संस्थानों में एससी/एसटी छात्रों के लिए अंग्रेज़ी और अन्य बेसिक विषयों की विशेष कोचिंग या रेमेडियल क्लासेज़ की व्यवस्था करनी चाहिए.
2- छात्रों और शिक्षकों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए विशेष कोशिशें करनी चाहिए. इसके लिए औपचारिक शेड्यूल की व्यवस्था की जानी चाहिए.
3- थ्योरी और प्रैक्टिकल में पक्षपात से बचने के लिए वैकल्पिक प्रश्नों की संख्या को अधिक और लिखित को कम से कम किया जाए. इसके अलावा वायवा के नंबर को न्यूनतम स्तर पर लाना चाहिए.
4- कक्षा में भेदभाव पर अंकुश लगाने के लिए कक्षा प्रतिनिधियों की संख्या दो की जाए, जिसमें एक एससी/एसटी से हो.
5- गवर्निंग बॉडी को छात्रों, शिक्षकों और रेजिडेंट्स की एक संयुक्त कमेटी बनानी चाहिए, जो कैंपस और निजी मेसों में सामाजिक विभाजन की समस्या को ख़त्म करने पर ध्यान दे.
6- एससी/एसटी और ओबीसी स्टूडेंट्स से जुड़े मुद्दों को निपटाने के लिए 'इक्वल अपॉर्चुनिटी ऑफ़िसर' के रूप में एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति की जाए. इसी की निगरानी में रेमेडियल कक्षाएं चलाई जाएं.
7- इसी कार्यालय के मार्फत एससी/एसटी स्टूडेंट्स की शिकायतों और अन्य समस्याओं का निवारण किया जाए.
8- छात्रों से जुड़े मसलों को हल करने के लिए बनने वाली सभी कमेटियों में एससी/एसटी स्टूडेंट्स को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए.
9- शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में आरक्षण के प्रावधानों का पालन किया जाए.
10- स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आरक्षण के लागू किए जाने की सीधी निगरानी की जानी चाहिए.
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