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वो दिग्गज जिन्हें हार का मुंह देखना पड़ा
पांच विधानसभा चुनावों में जहां पार्टियों को अप्रत्याशित नतीजों का सामना करना पड़ा, वहीं चुनावी मैदान में उतरे कई दिग्गज नेताओं को हार का मुंह देखना पड़ा है.
जबकि पार्टियों की अंदरूनी कलह भी सामने आ रही है. जसवंत नगर सीट से समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव जीत गए. उन्होंने कहा है कि अखिलेश का घमंड समाजवादी पार्टी की हार का कारण बना.
उन्होंने मीडिया से कहा, "लोगों ने नेताजी और मेरे अपमान का बदला लिया है."
बड़ी खबर उत्तराखंड से आई, जहां हरिद्वार ग्रामीण सीट और किच्छा, दोनों जगहों से मुख्यमंत्री हरीश रावत हार गए. किच्छा सीट पर वो भाजपा के राजेश शुक्ला से बेहद कम वोटों से हार गए.
उत्तराखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को हार का सामना करना पड़ा. रानीखेत सीट से उनके विरोधी कांग्रेस के करण महारा की जीत हुई है.
गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर को भी हार का मुंह देखना पड़ा है. मनोहर पर्रिकर के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद नवंबर, 2014 में पारसेकर को गोवा का मुख्यमंत्री बनाया गया था.
गोवा के पूर्व सीएम कांग्रेस के दिगंबर कामत मार्गाओ सीट से जीते हैं.
मणिपुर में अपनी नई पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने वाली इरोम शर्मिला को भी मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के सामने हार का मुंह देखना पड़ा.
हार के बाद उन्होंने कहा, "मैं किसी तरह के चुनाव लड़ना नहीं चाहती."
पंजाब में पटियाला शहर की सीट कांग्रेस के खाते में गई, यहां से कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आम आदमी पार्टी के नेता बलबीर सिंह को हराया है.
लेकिन लांबी सीट पर उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा है. उन्हें प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री अकाली दल के प्रकाश सिंह बादल ने हरा दिया.
जबकि दल बदल कर बीजेपी में गईं रीता बहुगुणा जोशी ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ कैंट सीट से जीत हासिल की. उन्होंने मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव को तीस हज़ार से अधिक वोटों से हराया.
वो कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष थीं और चुनावों से पहले बीजेपी में शामिल हो गई थीं.
मऊ से बहुजन समाज पार्टी के मुख्तार अंसारी बड़े अंतर से जीते.
बीते साल मायावती को अपशब्द कहने के बाद चर्चा में आए भीजपा नेता दयाशंकर की पत्नी स्वाति सिंह सरोजिनी नगर से जीत गई हैं. दयाशंकर को भाजपा ने पहले प्रदेश उपाध्यक्ष पद से और फिर उसके बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया था.
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