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यूपी में बीजेपी का महिला चेहरा बन पाएंगी स्वाति सिंह?
- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की जो सीटें हाई प्रोफाइल बन रही हैं, उसमें लखनऊ के सरोजनी नगर सीट का नाम भी जुड़ने वाला है.
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश महिला विंग की अध्यक्ष स्वाति सिंह को सरोजनी नगर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. स्वाति सिंह मायावती के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले भाजपा के पूर्व नेता दयाशंकर सिंह की पत्नी हैं.
इसी सीट से पहले राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने की चर्चा चल रही थी और अब पार्टी उनके चचेरे भाई अनुराग यादव को यहां से उम्मीदवार बनाने जा रही है.
इसके अलावा समाजवादी पार्टी की टिकट पर पिछला चुनाव जीत चुके शारदा प्रताप शुक्ला और बहुजन समाज पार्टी के शिव शंकर सिंह भी चुनाव मैदान में हैं.
इस लिहाज से देखें तो स्वाति सिंह के लिए मुक़ाबला बेहद मुश्किल है, लेकिन वे इस चुनौती के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.
स्वाति को लोगों का भरोसा मिलेगा?
उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "पार्टी ने मुझमें भरोसा दिखाया है तभी तो मुझे मुश्किल सीट से उतारा है क्योंकि उन्हें लगा होगा कि ये सीट स्वाति ही निकाल सकती है. मुझे पूरा विश्वास है कि लोगों का सहयोग मिलेगा."
21 जुलाई, 2016 से पहले स्वाति सिंह कभी राजनीति में आएंगी, ऐसा ख़ुद स्वाति सिंह ने भी नहीं सोचा था. लेकिन परिस्थितियों ने स्वाति को ना केवल राजनीति में ला दिया, बल्कि उस स्थिति में पहुंचा दिया जहां से भारतीय जनता पार्टी को उनमें उम्मीद दिख रही है.
दरअसल, दयाशंकर सिंह ने उसी दिन बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की. बहुजन समाज पार्टी के कुछ नेताओं ने उनके घर के बाहर प्रदर्शन किया और उनकी पत्नी, मां और बेटी के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की.
उधर पार्टी ने उन्हें निकाल दिया. नौ दिन तक पुलिस से वे भागे फिरते रहे. चारों तरफ दयाशंकर सिंह को आलोचना का सामना करना पड़ रहा था.
तब स्वाति सिंह बसपा कार्यकर्ताओं की टिप्पणियों का जोरदार अंदाज में विरोध करने के लिए बाहर निकलीं और मायावती के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया.
तब मिला स्वाति का साथ
इस बारे में दयाशंकर सिंह कहते हैं, "जब हर किसी ने मेरा साथ छोड़ दिया था तब स्वाति सिंह ने मोर्चा संभाला, वो भी उस मायावती से जिसका सीधा विरोध करने से लोग डरते हैं."
स्वाति सिंह ने जिस आक्रामक अंदाज़ में इस पूरे मुद्दे पर अपने पति का पक्ष रखा, उससे पार्टी को भी शर्मसार नहीं होना पड़ा और पार्टी को उनमें संभावना नज़र आई और उन्हें पार्टी के राज्य महिला विंग का अध्यक्ष बना दिया गया.
वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार शरद गुप्ता कहते हैं, "स्वाति सिंह की अपनी भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा रही होगी और उन्हें वह मौका उदयशंकर सिंह और नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने उपलब्ध करा दिया. वहीं भारतीय जनता पार्टी को भी अपने अजेंडे के लिए वे फ़िट नज़र आईं."
वैसे ये प्रकरण नहीं होता तो दयाशंकर इस बार बलिया विधानसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार हो सकते थे. ऐसे में स्वाति का दावा बलिया सीट पर ही था. लेकिन समझौते के तहत ये सीट भारतीय जनता पार्टी ने भारतीय समाज पार्टी को दे दी.
स्वाति सिंह कहती हैं, "बलिया से चुनाव लड़ती तो बहुत आसानी से जीत सकती थी, लेकिन सरोजनीनगर में भी कोई कसर नहीं छोड़ेंगे."
स्वाति की मुश्किल डगर
हालांकि सरोजनीनगर सीट पर अब तक हुए विधानसभा चुनावों में कभी भारतीय जनता पार्टी को जीत नहीं मिली है.
क्षेत्र के मौजूदा विधायक और अखिलेश सरकार में मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल ने इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का मन बना लिया है. वे कहते हैं, "मुलायम सिंह के खेमे का होने के चलते मुझे टिकट नहीं मिल रहा है, लेकिन मैं चुनाव लड़ूंगा निर्दलीय ही सही."
वहीं पिछले चुनाव में शारदा से कुछ हज़ार मतों से हारे बहुजन समाज पार्टी के शिव शंकर सिंह अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं. वे कहते हैं, "समाजवादी पार्टी का तो उम्मीदवार ही तय नहीं हो रहा है जबकि स्वाति सिंह कहीं मुक़ाबले में ही नहीं हैं. उनकी तो जमानत नहीं बचेगी."
वहीं समाजवादी पार्टी के लिए भी ये सीट बेहद अहम मानी जा रही है. इस सीट पर पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव के छोटे भाई अनुराग यादव को टिकट दिया जा रहा है. उनकी उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है, लेकिन वे अपना चुनाव प्रचार शुरू कर चुके हैं.
अखिलेश के छोटे भाई होने और सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवार होने का फ़ायदा उन्हें मिलेगा. ऐसे में स्वाति सिंह के लिए इस सीट पर जीत हासिल करने बेहद मुश्किल दिख रहा है.
कितना भरोसा, कितनी उम्मीद?
वैसे एक सवाल ये भी है कि क्या स्वाति सिंह के रूप में भारतीय जनता पार्टी को राज्य में एक ऐसा चेहरा मिल गया है, जो आगे की रणनीति के मुताबिक फ़िट दिख रहा है?
दयाशंकर सिंह कहते हैं स्वाति ने अब तक पार्टी की दी गई जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभाया है और आगे भी वे निभाती रहेंगी.
स्वाति सिंह आकर्षक हैं, युवा हैं, उनमें एक तरह का तेवर भी नज़र आया है. लड़ने भिड़ने की क्षमता भी वे दिखा चुकी हैं. लेकिन राजनीति केवल इन्हीं से नहीं चलती.
वहीं शरद गुप्ता कहते हैं, "स्वाति भारतीय जनता पार्टी का यूपी में कोई चेहरा बनेंगी या नहीं- ये तो इस चुनाव पर निर्भर है. अगर वह विधायक बनती हैं तभी आगे का रास्ता शुरू होगा. चुनाव नहीं जीतीं तब तो बड़ी मुश्किल होगी"
लेकिन स्वाति को उम्मीद है कि बीते कुछ महीनों में जिस तरह उनकी जिंदगी बदलती चली गई है वो दौर आगे भी बना रहेगा और वे भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले महिलाओं के मुद्दों पर सार्थक काम करती रहेंगी.
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