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'नोटबंदी का कोई नकारात्मक असर नहीं रहा'
शुरुआती रुझानों में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है.
यहां तक कि मणिपुर में भी उसका प्रदर्शन अच्छा जा रहा है.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मतदाताओं पर नोटबंदी का नकारात्मक असर नहीं पड़ा है, जैसा कि इससे पहले विपक्षी दल दावा कर रहे थे.
वरिष्ठ पत्रकार प्रमोदी जोशी का कहना है कि नोटबंदी का चुनावों में नोटबंदी का कम से कम कोई नकारात्मक असर नहीं देखने को मिला.
उनके मुताबिक़, पांच राज्यों में जहां बीजेपी और उसके सहयोगी दल पिछड़े हैं वहां सत्ता विरोधी लहर की भूमिका ज़्यादा अहम है.
वो गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर के हार जाने का उदारण देते हैं.
यहां कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है और बदलाव के स्पष्ट संकेत देखे जा रहे हैं.
नोटबंदी से फायदा
वहीं वरिष्ठ पत्रकार और आर्थिक विश्लेषक आलोक पुराणिक का कहना था कि नोटबंदी का नकारात्मक असर तो दूर की बात है, मोदी ने इसे जिस तरह पेश किया, उससे समग्र रूप से इसने भाजपा को फायदा ही पहुंचाया है.
उनके अनुसार, प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की मार्केटिंग करने में सफल रहे और इसे ऐसे पेश किया जैसे यह भ्रष्ट अमीरों के खिलाफ गरीबों की लड़ाई है.
आलोक पुराणिक कहते हैं, "उन्होंने ऐसी धारणा बनाने की कोशिश कि जो नोटबंदी के ख़िलाफ़ है वो गरीबों के खिलाफ है. यह धारणा सब तरफ गई. इसका असर दिखा भी, चाहे निकाय चुनाव हों या राज्य के चुनाव रहे हों."
उनके अनुसार, "यही वजह रहा कि यूपी में नोटबंदी कोई मुद्दा बन ही नहीं पाया. इसके साथ ही बीजेपी की तरफ से ये भी संदेश देने की कोशिश की गई कि नोटबंदी के फायदे को जनता के बीच ले जाया जाएगा."
स्पष्ट रुझानों से ऐसा लग रहा है कि ये धारणा व्यापक रूप से जनता के बीच गई और नोटबंदी से नुकसान की बजाय बीजेपी को एक हद तक फायदा पहुंचा.
प्रमोदी जोशी कहते हैं, "जिस तरह का रुझान सामने आ रहा है उससे लग रहा है कि मतों का प्रतिशत 40 प्रतिशत के आस पास रहेगा, जोकि आम चुनावों के क़रीब 43 प्रतिशत से थोड़ा ही कम हुआ है."
उनके मुताबिक, "उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जीत ज्यादा है."
उनका कहना है कि इस साल दो राज्यों में और चुनाव होने वाले हैं हिमाचल और गुजरात में. अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए यूपी का चुनाव जीतना बीजेपी के बहुत अहम था.
इसके अलावा राष्ट्रपति चुनाव और राज्यसभा में संख्याबल बढ़ाने के लिहाज से भी यह चुनाव बीजेपी के बहुत ही अहम था.
यूपी की विधायकों की संख्या राष्ट्रपति चुनावों में जीत के लिए बहुत महत्वपूर्ण कारक है. इनके आधार पर राज्यसभा में भी भाजपा का संख्या बल बढ़ेगा और हो सकता है कि इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब बीजेपी की राज्यसभा सदस्यों की संख्या कांग्रेस की सदस्य संख्या को पार कर जाएगी.
उनके अनुसार, 2019 के आम चुनावों के पहले ये परिणाम बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने में बहुत कारगर सिद्ध होंगे.
आलोक पुराणिक का मानना है कि विशेषकर यूपी में बीजेपी के चार कारक महत्वपूर्ण साबित रहे- पहला, गैर जाटव, गैर यादव में सेंध के जरिए सोशल इंजीनियनरिंग, दूसरा, हिंदू-मुस्लिम कार्ड खेलकर सॉफ्ट पोलेलेराइजेशन करना, विकास को एजेंडा बनाना और जाति और धर्म से अलग वो नौजवान वोटर जिनके हीरो मोदी हैं.
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