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'गंदे पानी में खड़े हैं मोदी पर कैसे भरोसा करें'
- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वाराणसी से
बनारस शहर में तीन विधानसभा सीटें हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीनों पर अलग-अलग दिन रोड शो कर रहे हैं.
भारतीय जनता पार्टी ने पूरी ताक़त बनारस में झोंक दी हैं. तो क्या ये माना जाए कि बीजेपी बनारस में पिछड़ रही है?
गंगा नदी में नाव चलाने वाले निषाद समुदाय से बात करने के बाद ये संकेत मिलता है कि बीजेपी की राह आसान नहीं है.
शिवपुरवा निरालानगर के लोगों के साथ जब बीबीसी हिंदी ने फ़ेसबुक लाइव किया तो लोगों ने राज्य और केंद्र सरकार के प्रति नाराज़गी ज़ाहिर की.
विकास है मुद्दा
बनारस के इस इलाक़े में विकास ने अभी दस्तक नहीं दी है. सड़कें गंदगी से अटी पड़ी हैं.
एक महिला ने कहा, "जेठ हो या बैसाख, यहां हालात ऐसे ही रहते हैं. बच्चे ड्रैस पहनकर स्कूल जाते हैं, सब गंदा हो जाता है."
बनारस के इस इलाक़े में न अखिलेश का 'काम बोल रहा' है और न मोदी वाले 'अच्छे दिन' ही आए हैं.
गंदगी बीमारियों की वजह बन गई है. एक और महिला कहती हैं, "हमारी जेठानी बीमार हैं, पति बीमार हैं. बच्चे-बूढ़े क्या जवान तक बीमारी से मर रहे हैं."
"हम सीवर का पानी पी रहे हैं. हमारी ज़िंदगी दलितों से भी बदतर हो गई है. हमने मेयर से लेकर सांसद तक दिया. सांसद क्या हमने प्रधानमंत्री इस देश को दिया लेकिन फिर भी नर्क जैसा जीवन जीने को विवश हैं."
यहां का निषाद समुदाय इतना निराश है कि उसने अपनी पार्टी ही गठित कर ली है. पार्टी के गठन की वजह बताते हुए पार्टी के एक सदस्य कहते हैं, "हमने ये पार्टी बलहीन और ग़रीब लोगों के लिए बनाई है."
अच्छे दिन कैसे आएंगे?
बनारस कैंट से निषाद पार्टी के उम्मीदवार विनोद निषाद कहते हैं, "उन्होंने हमें क़ाग़ज़ों में मलिन बस्ती बना दिया है लेकिन कोई सुविधा नहीं दी. यहां जब हम घर से बाहर निकलते हैं तो हमारे पैर गंदगी में पड़ते हैं. जब दिन की शुरुआत ही इतनी बुरी हो तो हमारे अच्छे दिन कैसे आएंगे?"
पिछड़े वर्ग में शामिल निषाद समुदाय भाजपा को वोट देता रहा है लेकिन इस बार समुदाय ने अपनी पार्टी से उम्मीदवार उतार दिए हैं. बनारस निषाद समुदाय की तादाद अच्छी खासी है.
ये समुदाय बनारस के घाटों पर जैटी बनने से भी नाराज़ हैं. जैटी पर्यटकों के गंगा आरती देखने के लिए नदी पर बना एक प्लेटफ़ार्म होगा. फिलहाल पर्यटक नावों से आरती देखते हैं. इसकी वजह बताते हुए विनोद निषाद कहते हैं, "इस प्लेटफ़ार्म से निषाद समुदाय का नुक़सान होगा, हमारा रोज़गार छिन जाएगा."
मोदी पर भरोसा करेंगे?
जब एक महिला से पूछा गया कि क्या वो नरेंद्र मोदी पर विश्वास करती हैं तो उन्होंने कहा, "भैया गंदे पानी में खड़े हैं और आप बताओ कैसे भरोसा करें?"
यहां के लोग नेताओं से इतने निराश हैं कि एक व्यक्ति ने कहा, "हम तो 'नाटो बटन' दबाने का सोच रहे हैं."
निषाद पार्टी के कार्यकर्ता इस चुनाव को 'असली गंगापुत्र' बनाम 'नकली गंगापुत्र' भी बता रहे हैं.
निषाद समुदाय की पार्टी चुनावों पर कितना असर डाल पाएगी ये कहना अभी मुश्किल हैं. फिलहाल शिवपुरवा निरालानगर के लोग व्यवस्था से परेशान हैं और किसे वोट करना हैं इसे लेकर उनका मत विभाजित है.