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ELECTION SPECIAL: प्यासा बुंदेलखंड मांगेगा हिसाब
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के चौथे दौर के लिए पूरी तैयारियां हो गई हैं. अब बस लोगों के बटन दबाने भर की देर है और इसके साथ ही 12 ज़िलों के 53 सीटों पर 680 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो जाएगी.
इलाक़े में कुल 1.84 करोड़ वोटर हैं जिनमें 84 लाख महिलाएं और 1,032 किन्नर भी शामिल हैं.
सबसे ज़्यादा 26 उम्मीदवार इलाहाबाद उत्तरी सीट पर मैदान में हैं जबकि फतेहपुर की खगा, कौशांबी की मांझनपुर और प्रतापगढ़ की कुंडा सीट पर केवल छह उम्मीदवार खड़े हुए हैं.
2012 के चुनाव में 53 में से समाजवादी पार्टी को 24, बीजेपी को पांच और बहुजन समाजवादी पार्टी को 15 सीटें मिली थीं. कांग्रेस को छह और अन्य को तीन सीटें हासिल हुईं.
पिछले नतीजों से जाहिर है कि समाजवादी पार्टी के लिए यहां दांव पर ज़्यादा सीटें हैं. लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान कहते हैं, "सीटें ज़्यादा होने के साथ ही समाजवादी पार्टी के लिए इलाक़े में विकास ना होना भी बड़ी चुनौती है जो उनके लिए एंटी इंकमबेंसी को ज़्यादा बड़ा बनाएगा. लेकिन उनके विरोधियों की कमज़ोरी उनके लिए फायदेमंद हो सकती है."
जिन 12 ज़िलों में चुनाव होना है उनमें पानी के लिए तरसते बुंदेलखंड से लेकर नेहरू-गांधी परिवार की सीट माना जाने वाला रायबरेली भी शामिल है.
हालांकि 1998 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि रायबरेली से सांसद और कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने इलाक़े में चुनाव प्रचार करने नहीं पहुंचीं.
इनके अलावा प्रतापगढ़, इलाहाबाद, जालौन और कौशांबी के साथ ही झांसी, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट और बांदा में भी चुनाव आज ही हो रहे हैं.
रायबरेली में कांग्रेस ने अदिति सिंह को उतारा है जो अखिलेश सिंह की बेटी हैं, दूसरी तरफ ऊंचाहार से बीएसपी छोड़कर बीजेपी में आए स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कर्ष मैदान में हैं.
प्रतापगढ़ के कुंडा से रघुराज प्रताप उर्फ़ राज भैया खड़े हैं तो इसी ज़िले की रामपुर ख़ास सीट से कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी और वर्तमान विधायक अराधना मिश्रा भी अपनी सीट बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं.
नेता प्रतिपक्ष चरन दिनकर बांदा भी नरैनी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रेवती रमण सिंह के बेटे उज्वल रमण सिंह इलाहाबाद की खरचाना सीट से मैदान में हैं.
इलाहाबाद पश्चिम की सीट पर युवा नेता ऋचा सिंह को समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया है. ऋचा सिंह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी छात्र संघ की अध्यक्ष रह चुकी हैं.
शरद प्रधान मानते हैं कि इस चरण के चुनाव में धार्मिक ध्रुवीकरण की ज़्यादा अहमियत नहीं रहेगी.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "लोगों का ध्यान व्यक्तित्व पर ज़्यादा है. एक तरफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हैं तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी. कुछ सीटों पर लोग इन चेहरों को ही देख कर वोट देंगे. अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने धार्मिक ध्रुवीकरण पर बयान दिए हैं लेकिन मुझे नहीं लगता कि इस दौर में उसका कुछ असर होगा. बहुजन समाज पार्टी के पास पहले से 15 सीटें हैं जो कम नहीं हैं और वो दोनों पार्टियों के लिए अच्छी चुनौती पेश करेगी."
इस दौर के चुनाव प्रचार ने नेताओं की तल्ख़ बयानबाज़ी देखी है लेकिन मतदाताओं पर इन बयानों का क्या असर हुआ है ये देखना दिलचस्प रहेगा.
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