प्रेस रिव्यू: 'चाइल्ड पोर्न शेयर करने में अमृतसर सबसे आगे'

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ भारत के मेट्रो शहरों के अलावा टियर टू के शहर इंटरनेट पर चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी ढूंढ़ने में और शेयर करने में काफ़ी आगे हैं.
चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी की 30 हज़ार फ़ाइल्स शेयर करने वाले अमरीकी नागरिक किर्क जोन्स की पिछले हफ्ते गिरफ्तारी के बाद हैदराबाद में काफ़ी हंगामा बरपा था.
लेकिन ताज़ा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ अमृतसर, लखनऊ, अलपुझा और त्रिचूर जैसे दस शहरों में पिछले छह महीनों में चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी की लाखों फ़ाइलें शेयर की गईं.

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अमृतसर इस सूची में सबसे ऊपर था, यहां एक जुलाई 2016 से 15 जनवरी 2017 के बीच चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ी 4.3 लाख फ़ाइलें इंटरनेट पर शेयर की गईं.
दिल्ली दूसरे और लखनऊ तीसरे स्थान पर रहे.
ये आंकड़े सिर्फ़ भारत में स्थित आईपी एड्रेस तक सीमित हैं जबकि कई ऐसे आईपी एड्रेस हैं जो द ओनियन राउटर के ज़रिए खुद को ट्रैक होने से बचा लेते हैं.

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हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि भारत में महिलाओं के प्रति छेड़छाड़ की घटनाओं के विरोध से जुड़ी एक मुहिम के तहत 30 शहरों की सड़कों पर बड़ी संख्या में महिलाएं शनिवार देर रात निकलीं.
बेंगलुरू में 31 दिसंबर को महिलाओं के साथ सामूहिक छेड़छाड़ की रिपोर्टों के बाद इन महिलाओं ने 'आई विल गो आउट' के बैनर तले सड़कों पर निकलने की ठानी.
दिल्ली से कोलकाता, चेन्नई से मुंबई तक कार्यकर्ता, छात्राएं, कामकाजी महिलाएं सभी मार्च में शामिल हुईं, कई जगह नुक्कड़ नाटक किए गए.
इन कार्यक्रमों में महिलाओं और लड़कियों ने गाने गाए और महिलाओं की बराबरी पर कविताएं पढ़ीं. इन कार्यक्रमों में पुरुष भी शामिल हुए.

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इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि पाकिस्तान ने दावा किया कि चंदू चव्हाण ने नियंत्रण रेखा पर अपने पोस्ट छोड़ने के बाद पाकिस्तान सेना के सामने समर्पण कर दिया था.
पिछले साल पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में कथित सर्जिकल स्ट्राइक के कुछ घंटों बाद चंदू ने 29 सितंबर को एलओसी पार कर ली थी.
हालांकि भारतीय सेना का कहना है कि उसकी बटालियन सर्जिकल स्ट्राइक का हिस्सा नहीं थी और वो अपने वरिष्ठ अधिकारी से किसी अनबन के बाद मेंधार सेक्टर में एलओसी पार कर गया था.

द हिंदू की ख़ास ख़बर के मुताबिक़ भोपाल के एम्स अस्पताल से पढ़ने वाले मेडिकल छात्र ऑपरेशन थियेटर में बिना किसी प्रायोगिक योग्यता हासिल किए ही स्नातक हो जाएंगे.
दिल्ली के एम्स अस्पताल की तर्ज पर भोपाल में 2012 में एम्स खोला गया था.
लेकिन इसमें पढ़ाई शुरू करने वाले पहले बैच के छात्रों को सर्जरी, गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी या फिर इमरजेंसी केस का कोई भी प्रायोगिक अनुभव नहीं दिया गया.
पांच साल पहले मेडिकल छात्रों के पहले बैच को प्रवेश दिया गया था लेकिन भोपाल के एम्स में अब तक ब्लड बैंक नहीं है.
ब्लड बैंक नहीं होने की वजह से इमरजेंसी विभाग, सर्जरी और गायनोकॉलोजी जैसे ज़रूरी विभागों में काम नहीं हो पा रहा. छात्रों का कहना है कि इस वजह से उनकी तालीम अधूरी रह गई है.

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि भारत में सेना, वायुसेना और नौसेना प्रमुख की तरह सेना की तीनों शाखाओं के लिए फ़ोर स्टार जनरल को प्रमुख बनाया जा सकता है.
इसका मक़सद सेना की तीनों शाखाओं के बीच ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स और योजना को लेकर एक सामंजस्य बैठाना है.
देहरादून की भारतीय सेना अकादमी में कमांडरों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर भी शामिल हुए जिसमें सेना से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.
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