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प्रेस रिव्यू: 'शादी का वादा, रेप के हर मामले में वजह नहीं'
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि अदालत ने कहा है कि पढ़ी लिखी लड़कियां धोखा मिलने पर बलात्कार की शिकायत नहीं लगा सकतीं.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि शादी का वादा रेप के हर मामले में कारण नहीं माना जा सकता.
21 साल के एक युवक पर उसकी पूर्व गर्लफ़्रेंड ने शादी का झांसा देकर रेप का आरोप लगाया है. इस युवक को ज़मानत देते हुए अदालत ने कहा कि पढ़ी लिखी लड़की जिसने मर्ज़ी से शादी से पहले सेक्स किया हो उसे अपने फ़ैसले की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की सोशल मीडिया पर खिल्ली उड़ाई गई है.
हाईटैक माने जाने वाले डीआरडीओ के ट्विटर अकाउंट पर शुक्रवार को पूछा गया कि फ़ेसबुक पेज पर लॉग इन करने में दिक्कत आ रही है और क्या कोई मदद कर सकता है?
लगे हाथों ट्विटर पर कई लोगों ने डीआरडीओ का मज़ाक उड़ाया.
@1astknight ने लिखा, "क्या आपने कंप्यूटर बंद करके दोबारा चालू किया", वहीं @kiduva ने लिखा कि फ़ेसबुक पर कैंडी क्रश खेलने के बजाय भारत की रक्षा पर ध्यान दें. कम से कम देश की सीमा पर सैनिकों के बारे में सोचें.
डीआरडीओ ने ट्वीट को तीन घंटे बाद हटा लिया. डीआरडीओ के प्रवक्ता ने कहा कि ये संचालन की गड़बड़ी थी हैकिंग नहीं.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर है कि जल्द ही खाने के पैकेट्स पर जंक फ़ूड का लेबल लगा हो सकता है.
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण एफ़एसएसआई के सीईओ पवन कुमार अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य के लिए अच्छे और बुरे खाने के बीच का फ़र्क लोगों को बताने के लिए खाने के पैकेट पर जंक फ़ूड का लेबल लाने पर विचार किया जा रहा है.
द पायोनियर ने लिखा है कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने शुक्रवार को बताया कि कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नोटबंदी के बाद ऑनलाइन ट्रांसज़ेक्शन में होने वाले खर्च को कम करने की दिशा में काम किया जा रहा है.
आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने संसद की पीएसी के सामने कहा कि बैंकों, पेमेंट गेटवेज़ और अन्य जुड़े पक्षों से ऑनलाइन ट्रांसज़ेक्शन में होने वाले खर्च को कम करने की दिशा में काम हो रहा है.
उन्होंने भरोसा दिलाया कि गांवों में नक़दी की कमी को आने वाले एक दो हफ़्तों में काबू में कर लिया जाएगा.
जनसत्ता ने लिखा है कि कश्मीरी पंडितों की कश्मीर घाटी में वापसी के लिए अनुकूल माहौल बनाने संबंधी प्रस्ताव को जम्मू-कश्मीर विधान परिषद में सर्वसम्मति से पारित किया गया. इससे पहले विधानसभा में भी ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया था.
राज्य सरकार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वह विस्थापित समुदाय के लिए अस्थाई शिविर स्थापित करने के लिए अपने प्रस्ताव पर आगे बढ़ेगी. अलगाववादी इसका विरोध कर रहे हैं.
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