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'ब्राइडल योगा'- स्वास्थ्य या सामाजिक दबाव?
- Author, प्रमिला कृष्णन
- पदनाम, बीबीसी तमिल सेवा
चेन्नई शहर में रहने वाली की 24 साल की गोमती (बदला हुआ नाम) भारत की उन हज़ारों दुल्हनों में से एक है जो शादी से पहले अपना वज़न कम करना चाहती है.
गोलियां, जिम में कसरत करने जैसे कई तरीकों पर हाथ आज़माने के बाद, गोमती को आख़िकार इसका उपाय मिला 'ब्राइडल योगा' क्रार्यक्रम के रूप में जो चेन्नई का तमिलनाडु गवर्नमेंट योगा एंड नैचुरोपैथी मेडिकल कॉलेज' अस्पताल आयोजित करता है.
गोमती ने बताया कि दो लोगों ने उन्हें 'बहुत मोटी' बताकर उन्हें रिजेक्ट कर दिया था.
वो कहती हैं, "इस बात से मुझे दुख हुआ, इसलिए नहीं कि उन्होंने मुझे 'ना' कहा, बल्कि इसलिए कि उन्होंने कहा कि मैं बहुत मोटी हूं और वो मुझे पसंद नहीं कर सकते. मुझे ठुकराए जाने जैसा लगा."
लेकिन जल्द ही गोमती ने इस इंकार को अपनी इच्छाशक्ति में बदला और फ़ैसला किया कि चाहे जो हो जाए वो हर हालत में अपनी वज़न कम करके ही दम लेंगी.
गोमती कहती हैं, "मैंने कई तरीके आज़माए, जैसे डायटिंग करना, गोलियां लेना, जिम में कसरत करना लेकिन कुछ भी काम नहीं कर रहा था. फिर मैंने ब्राइडल योगा कार्यक्रम आज़माया और अपना वज़न 82 किलो से 76 किलो तक किया."
वो कहती हैं कि वो अभी और योगा करना चाहती हैं ताकि वो फिट हो कर एक सुंदर दूल्हा पा सकें. वो कहती हैं, "मैं बहुत हल्का महसूस कर रही हूं. इस कार्यक्रम से न केवल मेरा वज़न कम हुआ बल्कि मेरी मानसिक तनाव भी कम हुआ है."
इस योगा अस्पताल कार्यक्रम में शामिल हो कर इसमें कम से कम 15 दिन तक बने रहने वालों के लिए ख़ास योगा उपचार और डाइट चार्ट का सुझाव दिया जाता है.
एक और भावी दुल्हन गायत्री ने अस्पताल में 15 दिन रहने के बाद 7 किलो वजन कम किया है.
25 साल की गायत्री कहती हैं, "मुझे पहले बहुत शर्म आती थी, मैं नर्वस हो जाती थी, कॉलेज जाती थी तो लड़कियां मुझे घूरती रहती थीं. मुझे चिंता रहती थी कि मैं ऐसी ही मोटी रही तो अपनी शादी के लिए अच्छे से सज-धज नहीं पाऊंगी. मेरे बाजुओं और जांघों पर बना ज़्यादा वसा योगा के बाद कम हुआ है और मुझमें ज़्यादा आत्मविशवास आया है."
योगा क्लीनिक में काम कर रही डॉ दीपा सर्वानन कहते हैं, "वज़न कम करने के लिए योगा के साथ खान-पान की भी अहम भूमिका है. जब युवा लड़के और लड़कियां इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं वो योगा और नियमानुसार खाने से पहले 15 दिनों में ही 5 से 7 किलो वज़न कम करते हैं. अचानक इतना वज़न कम करने से उनके शरीर को कोई नुक़सान नहीं पहुंचता क्योंकि न तो उन्होंने ज़्यादा कसरत की और न ही ग़लत खाने की आदत डाली."
अस्पताल में डॉक्टरों का कहना है कि रोज़ यहां 200 से अधिक लोग आते हैं जिनमें से क़रीब 80 मोटापे से या इससे जुड़ी समस्याओं से परेशान होते हैं.
अस्पताल के डीन मानावलन कहते हैं, "हमारे पास आने वाले युवा अधिकतर 25 से 30 साल की उम्र के होते हैं और उन्हें मानसिक तनाव, मोटापे के कारण रक्तचाप और दूसरी समस्याएं होती हैं. ब्राइडल योगा युवाओं के ध्यान में रखते हुए बनाया गया है. हम शादी से पहले उनके अधिक मोटापे को कम करने की कोशिश करते हैं और उनको अच्छा स्वास्थ्य कैसे बनाए रखना है इसके बारे में भी बताते हैं."
जानीमानी महिला अधिकार कार्यकर्ता और त्रिची के भारतीदासन विश्वविद्यालय में वीमेन स्टडीज़ विभाग की प्रमुख, मणिमेखला कहती हैं कि शादी के लिए लड़की का पतला और फिट होना पुरुष-सत्तात्मक मानसिकता को दर्शाता है.
वो कहती हैं, "बचपन से ही लड़कियों को उनके रंग और वज़न को ले कर सचेत रहने के लिए कहा जाता है. जहां एक दूल्हे को आंकने का पैमाना उसकी पढ़ाई, तनख़्वाह होती है, लड़की को केवल उसके अच्छा दिखने या न दिखने के लिए आंका जाता है. स्वस्थ होने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन शादी से पहले महिला पर उसका वज़न घटाने के लिए ज़ोर देना एक तरह का सामाजिक दबाव है जिसके बारे में चर्चा होनी चाहिए."
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