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हड़ताल पर जा सकते हैं बैंक कर्मचारी
रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने दावा किया था कि रिज़र्व बैंक इस बात का ध्यान रख रहा है कि नोट प्रिटिंग प्रेस अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करें ताकि नए नोटों की मांग पूरी की जा सके.
ये बात उन्होंने बीते हफ़्ते पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कही थी. उन्होंने दावा किया था कि बैंक और एटीएम के बाहर क़तार कम होती जा रही है.
लेकिन ऑल इंडिया बैंक एप्लाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं.
उनका दावा है कि रिज़र्व बैंक से नोटों की सप्लाई बहुत कम है और डिमांड बहुत ज्यादा है. सिर्फ बीस से 25 फ़ीसदी मांग की पूर्ति हो पा रही है. रिज़र्व बैंक और सरकार का यह दावा ग़लत है कि उनके पास कैश की कमी नहीं है.
कैश की कमी के कारण ग्राहकों और कर्मचारियों को काफ़ी दिक्क़त हो रही है. कई जगह बैंक ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच झगड़े की ख़बर भी आ रही है.
वेंकटचलम का कहना है कि नोटों की सप्लाई की पारदर्शिता भी सवालों के घेरे में है. स्थिति नहीं सुधरी तो बैंक यूनियन दस दिनों के बाद हड़ताल पर जाने का विचार कर सकती है.
वो कहते हैं कि चूंकि ज्यादातर एटीएम अभी तक चालू भी नहीं हो पाए हैं इसलिए लोगों को बहुत तकलीफ़ हो रही है. बैंक का काम लोगों को कैश देना है जो वो नहीं दे पा रहे हैं. यह बहुत शर्म की बात है.
उन्होंने कहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया, सरकार और आईबीए को लिखे उनके ख़तों पर दूसरी तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
(सीएच वेंकटचलम से बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय की बातचीत पर आधारित)