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नोटबंदी: एटीएम कतारों के आसपास की कहानियां
- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मेहरारू को बता के तो आए हो न?
पीछे वाले सज्जन बोले, "कोई फ़र्क नहीं पड़ता. बस कैश ले जाके दिखा देना है. नहीं तो फालतू शक करेगी कि सुबह-सुबह मेरा कोई चक्कर चल रहा है."
लाइन में लगे सभी पुरुष उसकी बात पर खिलखिला पड़े.
सुबह के साढ़े पांच बजे हैं, कोहरे ने दस्तक देनी शुरू कर दी है. नोएडा के एक सेक्टर में एटीएम के बाहर कतार लंबी होती जा रही है.
पास के एक गाँव से शायद ताज़े गोबर के कंडे बना कर लाइन में लगी एक अधेड़ महिला मेरे आगे खड़ी है.
वो बोली, "इनने मजा आवे लगा है यहाँ आते-आते. घर-बार से लेना देना न, भोर हुई न कि चार एटीएम कारड ले आ लिए. लाइण अलग से सुस्त कर देवे हैं".
हंसी-ठिठोली कर रहे पुरुष एकदम से चुप हो जाते हैं.
तभी एटीएम का गार्ड अंगड़ाई लेते हुए अंदर से आवाज़ देता है, "ओ भाई, दो से ज़्यादा कार्ड कोई मत लाना. कैमरा लगा है".
सुबह की मॉर्निंग वॉक के लिए तैयार होकर आए एक रिटायर्ड फौजी उबल पड़े, 'मज़ाक बना रखा है? कल से पांचवा एटीएम मिला है जो चल रहा है. सबकी सैलरी देने का वक़्त है. अपने पाँचों कार्डों से 2,000 निकाल के ही जाऊँगा".
इस बार अधेड़ महिला दबे स्वर में बोली, "लो कर लो बात. इनने तो मसीन ही घर ले जाणी हैं!".
रात की पार्टी के बाद शायद कुछ एमबीए स्टूडेंट्स भी लाइन में आ चुके हैं.
"भाई साहब, पैसे-वैसे है भी कि नहीं? या आप भी पार्टी के बाद सीधे लाइन में ही लग गए थे?".
मन में मैं उसे कोस रहा था क्योंकि आज सुबह की जॉगिंग का वक्त पैसे निकालने के नाम पर भेंट चढ़ चुका है और ये 'छोकरा' मज़ाक के मूड में है.
"अबे, घर से ड्राफ़्ट पहुंचा कि नहीं?". दूसरे ने कहा, "बाबूजी को याद दिलाया तो बोले, आगे से साइबर कैफ़े जाकर ई-ट्रांसफर कर देंगे".
तीसरा दोस्त बोला, "बेटा, अब तो सिगरेट भी मोबाइल पर ही खरीदनी पड़ेगी, हाहाहा और उसका हिसाब भी बाबूजी साइबर कैफ़े से तेरे अकाउंट में जाकर देख सकेंगे."
पास की सिलाई फैक्ट्री में काम करने वाले एक व्यक्ति मुझसे दो नंबर आगे हैं.
"छपरा में बहुतै बुरा हाल है. कल मेहमान फ़ोन किए थे, बोलें कि लगता है पैसवा निकाले दिल्लिए आना पड़ेगा".
लाइन में लगे हुए पौन घंटे हो चुके हैं. छह बजने को हैं, उजाला होने में अभी भी कोई 20 मिनट है.
क़रीब 50 मीटर आगे एक वीरान से पड़े दूसरे बैंक के एटीएम के सामने एक कैश वैन रुकती है. हमारी लाइन से करीब 10-15 आदमी एक नई लाइन बनाने के लिए भागते हैं.
भारत में लाखों एटीएम मशीनों पर इन दिनों पैसों से ज़्यादा कहानियों की भरमार है.