जयललिता: 'ब्राह्मण विरोधी पार्टी की ब्राह्मण नेता'

वीडियो कैप्शन, 68 साल की जयललिता 22 सितंबर से अपोलो अस्पताल में भर्ती थीं.
    • Author, वासंती
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

पत्रकारों और विरोधियों को मानहानि के आरोपों में अदालत में खींच लेने वाली एक सख़्त राजनेता, माफ़ न करने वाली लीडर, बदला लेने वाली विरोधी, गैरदोस्ताना रवैया रखने वाली असहनशील और निष्ठुर मुख्यमंत्री की छवि ने उनके राज में लिए गए अच्छे प्रशासनिक फ़ैसलों को छाया में ढके रखा.

वीडियो कैप्शन, चार बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता का निधन
जयललिता

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प्रशंसकों और निष्ठावान वोटरों के लिए वो 'अम्मा' थीं. गुलाब की तरह खूबसूरत महिला. फ़िल्म से राजनीति में आए एमजीआर की राजनीतिक वारिस...एमजीआर ने ही ऑल इंडिया द्रविड मुनेत्र कडगम (एआईएडीएमके) की नींव रखी थी.

वीडियो कैप्शन, बीबीसी वर्ल्ड के कार्यक्रम हार्ड टॉक के लिए करण थापर ने जयललिता का इंटरव्यू किया था.

समर्थकों के लिए जयललिता एक ऐसी महिला थीं, जिन्हें उनके विरोधियों ने खूब परेशान किया. खासकर विरोधी दल डीएमके नेता करुणानिधि ने.

जयललिता की समर्थक

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उनके समर्थकों पर लुभावनी योजनाओं की बौछार होती रहती थी. मसलन मिक्सी, ग्राइंडर, सिलाई मशीन, बकरी, उनके बच्चों के लिए साइकिल और लैपटॉप. उन्हें राशन की दुकानों से बीस किलो चावल के बैग मुफ़्त मिलते थे.

उन्हें 'अम्मा कैंटीन' से रियायती दर पर खाना उपलब्ध कराया जाता था.

जयललिता की पार्टी के नेता

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समर्थकों के नज़रिए से देखें तो हक़ीकत ये थी कि उनकी पार्टी के नेता, उनके मंत्री अजीबो-गरीब तरीके से उनके कदमों में सर झुकाते थे.

जब वो हेलीकॉप्टर में सवार होकर आसमान में उड़ान भरती थीं तब भी वो ज़मीन पर उसी तरह दंडवत की मुद्रा में होते थे जैसे कि उनकी मौजूदगी में किया करते थे.

वो ऐसा इस वजह से करते थे क्योंकि ये साफ था कि जयललिता ही पार्टी का चेहरा हैं. वो चाहते थे कि जयललिता की उनके बारे में राय अच्छी रहे जिससे चुनाव के दौरान उन्हें टिकट मिल सके. उनके लिए जयललिता के नाम पर चुनाव में जीत दर्ज कर लेना भर ही काफी था.

उनका व्यक्तित्व ऐसा ही था. साफ रंग और खूबसूरत दिखने वाली महिला. उन्होंने भद्र और सम्मानित महिला की छवि तैयार करने के लिए जान बूझकर खुद को ग्लैमर से दूर कर लिया. एक ऐसी महिला जो पूरी दृढ़ता के साथ राज चला सकती है.

जयललिता

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वो अपनी ताकत से वाकिफ थीं और अपनी कमजोर नसों को भी पहचानती थीं. वो कॉन्वेंट में पढ़ी थीं. मिज़ाज से किसी भी तरह की बकवास से दूर रहने वाली महिला थीं.

जब पुरुष उनके पैरों में पड़ जाते थे तो उन्हें यकीनन खुशी मिलती होगी. ये सिलसिला साल 1991 में उनके पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ शुरु हो गया था. तब उनकी उम्र 40 साल से थोड़ी ही ज्यादा थी.

लेकिन उन्होंने ऐसा करने वालों को नहीं रोका. इसकी वजह से उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं से एक दूरी कायम रखने में मदद मिली. जयललिता कभी नहीं चाहती थीं कि वो उनसे वाकिफ हो पाएं.

उनके शासन के दौरान सत्ता के गलियारों में डर का माहौल रहता था. मंत्री और उच्चाधिकारी चुप्पी साधे रहते थे. वो उनकी मर्ज़ी के बिना एक भी शब्द बोलने से डरते थे.

उनके करिश्मे और पार्टी की उन पर निर्भरता ने एक ऐसा रिश्ता बना दिया जिसे बाहरी लोगों के लिए समझना मुश्किल है.

जयललिता के समर्थक

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हालांकि, वो एक साधारण महिला ही थीं जिनकी ज़िंदगी असाधारण बन गई.

उनका नाता कर्नाटक से था. उन्होंने एक ब्राह्मण परिवार में जन्म लिया था. वो एक अभिनेत्री रह चुकी थीं. उनके साथ ऐसी तमाम चीजें जुड़ी थीं जो उन्हें कामयाब होने से रोक सकती थीं लेकिन वो एक द्रविड पार्टी की प्रमुख बनीं, जिसकी नींव ब्राह्मणों के विरोध के लिए पड़ी थी और वो अपने मेंटर एमजीआर की जगह लेने में कामयाब रहीं जिन्हें 'देवतुल्य' माना जाता था.

उन पर भ्रष्टाचार के आरोपों में कई अदालती मामले थे. आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें बरी किए जाने के आखिरी मामले में उन्हें कुछ देर के लिए जेल भी जाना पड़ा लेकिन फिर उन्होंने कोर्ट से ही इस मामले में राहत मिली.

इन तमाम मामलों के बावजूद वो अपनी पार्टी और राज्य के लिए किवदंती सरीखी थीं.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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