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नोटबंदी के दौर में बैंक परिसर में पैदा, नाम खज़ांची
- Author, रोहित घोष
- पदनाम, कानपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
अनिल नाथ के भतीजे का जन्म बैंक परिसर में हुआ था और नोटबंदी के इस दौर में उन्हें भतीजे का नाम खज़ांची ही सूझा.
उन्होंने भतीजे का नाम खजांची नाथ ही रख दिया है और इस नाम से परिवार के बाकी लोग भी खुश हैं.
ये घटना कानपुर देहात ज़िले के झींझक तहसील की है. झींझक में खज़ांची नाथ चर्चा का विषय बना हुआ है.
नोटबंदी के चलते सर्वेशा देवी कई दिनों से बैंक में कतार में लग रही थीं.
अनिल के बड़े भाई जसमेर की तीन महीने पहले बीमारी की वज़ह से मौत हो गई थी.
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ़ से अनिल की भाभी सर्वेशा देवी को 2. 75 लाख रुपए की आर्थिक मदद मिली थी.
30 वर्षीय सर्वेशा देवी दिव्यांग हैं और उनका परिवार गरीबी रेखा से नीचे आता है.
गर्भवती सर्वेशा देवी झींझक के पंजाब नेशनल बैंक में अपना पैसा निकालने गई थीं.
लेकिन नोट बंदी की वजह से बैंक में भारी भीड़ थी.
वह कतार में लगी थीं लेकिन उनकी बारी आने से पहले ही बैंक में कई बार पैसा ख़त्म हो गया.
शुक्रवार सुबह भी सर्वेशा देवी बैंक पहुंची. वो लाइन में लगी थीं कि शाम चार बजे के आसपास उन्हें प्रसव पीड़ा हुई.
सर्वेशा देवी के साथ उनकी सास शशि भी थीं. इससे पहले कि सर्वेशा देवी को अस्पताल ले जाया जाता. उन्होंने बैंक परिसर में ही बच्चे को जन्म दिया.
बैंक के कर्मचारियों ने एम्बुलेंस के लिए फ़ोन किया पर एम्बुलेंस के न पहुँचने पर सर्वेशा देवी और नवजात शिशु को पुलिस की जीप में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर भेजा गया.
बैंक ने 20,000 रूपए सर्वेशा देवी की सास को दे दिए.
अनिल नाथ ने बीबीसी को बताया, "मेरी भाभी और भतीजा स्वस्थ हैं और उनको घर ले आए हैं. नोटबंदी के इस दौर में मेरे भतीजे का जन्म बैंक परिसर में हुआ तो मुझे सबसे उपयुक्त नाम खज़ांची ही लगा. परिवार के बाकी लोगों को भी ये नाम अच्छा लगा."
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