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नोटबंदी- '50% टैक्स स्कीम से भी बच सकते हैं लोग'
- Author, प्रोफ़ेसर अरुण कुमार
- पदनाम, अर्थशास्त्री
भारत में केंद्र सरकार ने उन लोगों को एक और मौका दिया है जो अपनी अघोषित आय या ब्लैक मनी को बैंक तक ले जाने में अब भी दुविधा में थे.
यानी इनकम टैक्स कानून में एक संशोधन होने के बाद ये लोग अपने काले धन में से कुछ को क़ानूनी तौर से या व्हाइट मनी के तौर पर रख सकेंगे.
सरल भाषा में कहूं तो सरकार ने एक तरह से काले धन को घोषित कर, कानूनी कार्रवाई से बचने वाली अपनी पुरानी स्कीम को एक नए तरीके से कुछ दिनों के लिए दोबारा लागू कर दिया है.
कोई भी व्यक्ति अपनी अघोषित आय या काले धन पर 50% टैक्स देकर बचा हुआ 50% अपने नाम सुरक्षित करा सकता है.
लेकिन व्हाइट मनी बने 50% काले धन में से 25% रकम ही व्हाइट होकर तत्काल वापस मिलेगी और बैंकों में फ्रीज़ की गई 25% रकम चार वर्ष बाद बिना ब्याज वापस मिलेगी.
लेकिन इस प्रस्तावित कानून के मुताबिक़ अगर सरकार या इनकम टैक्स विभाग किसी की अघोषित ब्लैक मनी तक ख़ुद पहुँचता है तब फिर 85% टैक्स और पेनल्टी देना होगा.
दरअसल सरकार को लग रहा है कि बहुत लोग अपने काले धन को सफ़ेद करने के लिए या नई करेंसी में बदलने के लिए बैंक में जमा कर के निकाल रहे हैं.
सरकार चाहती है कि जो काली कमाई है -ख़ास तौर से बड़ी रकम- वो कहीं बच न जाए, यानी लोगों को ऐसा पैसा बाहर निकालने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश है.
लेकिन सवाल ये उठता है कि जो अपनी अघोषित कमाई की घोषणा कर रहे हैं, वो ये दावा कर रहे हैं कि ये हमारी इस साल की या पिछले साल की अघोषित आमदनी भर है.
एक तरह से इससे कई लोग अपना बहुत सारा काला धन घोषित कर के उसमें से ख़ासा बचाने का प्रयास भी कर रहे हैं.
लोग कह भी रहे हैं कि तमाम लोग जन धन अकाउंट में कथित काला धन डाल कर उसे रीसाइकिल कर रहे हैं.
लगता है कि सरकार के आर्थिक सलाहकारों को लगता है कि किसी न किसी तरह रीसाइकिल होने वाली काली कमाई को पकड़ना है.
चूंकि नोटबंदी को एक भ्रष्टाचार-विरोधी मुहिम बताया गया है तो ये भी सही है कि सरकार चाहती है कि पहले से दूसरे सेक्टरों में हो चुके निवेश को फ़िलहाल छोड़े, लेकिन लोग ज़्यादा से ज़्यादा नकदी रक़म तो घोषित करें.
लेकिन रिपोर्ट यही आ रही है कि जिन लोगों के पास ज़्यादा काला धन था उन्होंने अभी तक बड़ा अमाउंट तो रियल एस्टेट, सोने वैगेरह में ही लगा दिया है.
मैं दोहराना चाहूँगा कि बचने वाली इस प्रस्तावित स्कीम से भी बच कर 50% के बजाय सिर्फ़ 30% टैक्स देकर ही निकलने की कोशिश करेंगे.
उन्हें अपने अघोषित धन को इस वर्ष या पिछले वर्ष की आमदनी भर साबित करना है.
(बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव से हुए ऑडियो इंटरव्यू पर आधारित)