|
क्या खूब लगती हो, बड़ी सुंदर दिखती हो... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में रहने वाली सात साल की नन्ही पिंकी इनदिनों पूरे गाँव की दुलारी बनी हुई है. पिंकी पर बनी लघु डॉक्यूमेंट्री स्माइल पिंकी को ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का अवॉर्ड जो मिला है. पिंकी रानी जहाँ पूरी ठाठ-बाठ के साथ लॉस एंजेलेस में धूम मचा रही है तो उनके गाँव में भी जश्न जैसा माहौल है. पिंकी के पिता भी उसके साथ अमरीका गए हैं. हमने पिंकी के गाँव फ़ोन लगाकार पिंकी की माँ से बात की. उनकी आवाज़ में जहाँ उत्साह था, वहीं बेटी के लिए ममता भी. उन्होंने बताया, "मैं तो बहुत ख़ुश हूँ, पूरे गाँव में बाजा बज रहा है, नारे लगाए जा रहे हैं, पिंकी के लिए गाँव में कई दिनों से पूजा पाठ हो रहा था ताकि वो जीते. फ़िल्मी दुनिया की चमक-दमक से दूर छोटे से गाँव में रहने वाली पिंकी की माँ भले ही ठीक से ऑस्कर शब्द का उच्चारण भी नहीं कर पा रही थीं लेकिन उन्होंने जगकर ऑस्कर में रेड कार्पेट पर अपनी बिटिया को टीवी पर ज़रूर देखा. वे कहती हैं, “मैने टीवी पर ऑक्सर में पिंकी को देखा, अब जब वो लौटेगी तो हम पूजा पाठ करेंगे.” स्वागत की तैयारी
यूँ तो हर माँ को अपना बच्चा हमेशा सुंदर लगता है लेकिन ऑस्कर में पिंकी को नए कलेवर में देखकर तो एक बार के लिए उसकी माँ भी हैरान रह गई. उन्होंने बताया, “पिंकी को अमरीका में देखकर बहुत ही बढ़िया लगा. गाँव में तो ऐसी ही रहती थी लेकिन वहाँ तो वो एकदम दूसरी ही ड्रेस में थी, बिल्कुल स्टाइल में. पहचानने में थोड़ा वक़्त लगा मुझे. बहुत सुंदर दिख रही थी.” पुरस्कार जीतने के बाद माँ-बेटी की बात नहीं हो पाई है जिससे माँ का मन कुछ उदास भी लगा. लेकिन जब हमने बताया कि पिंकी को फ़ोन लगाकर हम उससे बात करने की कोशिश कर रहे हैं तो माँ ने कहा हमारा संदेश भी दे देना कि जल्दी से घर लौट आओ. स्वागत में माँ ने बिटिया के लिए स्वादिष्ट व्यंजन बनाने की भी तैयारी की है. शिमला देवी कहती हैं वे बेटी को सब्ज़ी, पूड़ी और ख़ूब मिठाई खिलाएँगी. पिंकी के गाँववालों को भी पिंकी का इतज़ार है. ये वही पिंकी है जिसका होंठ कटा होने के कारण उसे गाँव में सामाजिक तिरस्कार का सामना करना पड़ा था और उसका स्कूल भी छूट गया था. लेकिन ऑपरेशन के बाद वो ठीक हो गई है और स्कूल भी जाने लगी है. पिंकी की संघर्ष की इसी दास्तां को निर्देशक मेगन मायलन ने अपने वृत्तचित्र में क़ैद किया है. होंठ कटे होने के कारण बच्चों को कई तरह के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दवाबों का सामना करना पड़ता है. आँकड़ो के मुताबिक भारत में दस लाख से ज़्यादा बच्चों को तालु या कटे होंठ होने के कारण ऑपरेशन की ज़रूरत है और हर साल 35 हज़ार बच्चे ऐसे पैदा होते हैं जिनके होंठ या तालु कटे होते हैं. |
इससे जुड़ी ख़बरें स्माइल पिंकी ने भी जीता ऑस्कर23 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस ऑस्कर में रहमान की जय-जय23 फ़रवरी, 2009 | मनोरंजन एक्सप्रेस किसने क्या कहा....23 फ़रवरी, 2009 | मनोरंजन एक्सप्रेस ऑस्कर में स्लमडॉग मिलियनेयर की गूंज23 फ़रवरी, 2009 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||