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सोमवार, 16 जून, 2008 को 13:36 GMT तक के समाचार
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'बापू पर गीत लिखना सबसे चुनौतीपूर्ण'
लगे रहो मुन्नाभाई
लगे रहो मुन्नाभाई देश भर में लोगों को काफ़ी पसंद आई थी
राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके गीतकार स्वानंद किरकिरे ने यूँ तो परिणीता से लेकर जय संतोषी माँ जैसी विविध फ़िल्मों के लिए गीत लिखे हैं लेकिन वे मानते हैं कि लगे रहो मुन्ना भाई के लिए महात्मा गांधी पर गीत लिखना उनके करियर का सबसे मुश्किल काम था.

स्वानंद किरकिरे को लगे रहो मुन्नाभाई के गाने ‘बंदे में है दम’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा, "इस गीत को लिखने में मुझे अपनी पूरी जानकारी और हुनर का इस्तेमाल करना पड़ा. राष्ट्रपिता पर टपोरी स्टाइल में गाना लिखने को मैं अपनी जीवन में किया गया सबसे ज़िम्मेदाराना और क्रेज़ी काम मानता हूँ."

सबसे बड़ी उपलब्धि

लगो रहे मुन्नाभाई का निर्माण विधु विनोद चोपड़ा ने किया है. स्वानंद बताते हैं कि विधु चोपड़ा उनके पास इस गाने का विचार लेकर आए और उन्हें लगा कि गाने में वंदे मातरम शब्द का इस्तेमाल करना अच्छा रहेगा.

स्वानंद ने पीटीआई को बताया, "किसी विवाद से बचने के लिए हर शब्द का पूरा ध्यान रखा गया क्योंकि अगर मैं कुछ भी ग़ैर ज़िम्मेदाराना शब्द लिखता तो पूरे देश में मुद्दा बन जाता."

वे इस गीत को अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हैं.

स्वानंद मानते हैं कि राष्ट्रीय पुरस्कार जीतना भी उनके लिए प्रेरणास्रोत था. उनका कहना है," जब कोई आपके काम का सम्मान करता है तो संतुष्टि मिलती है. मैं मुन्नाभाई की टीम को पूरा क्रेडिट देता हूँ जिनके बगैर ये संभव नहीं होता."

लगे रहो मुन्नाभाई को देश भर में बेहद पसंद किया गया था और इसने बॉक्स ऑफ़िस पर भी अच्छी कमाई की थी.

स्वानंद किरकिरे का कहना है कि वे नहीं चाहते कि उन्हें किसी ख़ास तरह के गीतकार के रूप में जाना जाए.

उन्होंने फ़िल्म जय संतोषी माँ के लिए गीत लिखे थे लेकिन स्वानंद कहते हैं कि वो उनके टाइप के बोल नहीं थे.

स्वानंद मुंबई में निर्देशक बनने के इरादे से आए थे. गायन और अभिनय में हाथ आज़माने के बाद वे आख़िरकर गीतकार बन गए.

सुधीर मिश्रा की फ़िल्म 'हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी' से स्वानंद को पहचान मिली और फिर वे सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते चले गए.

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