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मंगलवार, 01 अप्रैल, 2008 को 16:47 GMT तक के समाचार
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राजस्थान-सिंध बस सेवा शुरु होने की आस

थार एक्सप्रेस
राजस्थान को सिंध प्रांत से जोड़ती थार एक्सप्रेस 2006 में फिर से शुरू की गई थी
भारत और पाकिस्तान को जोड़ती रेल सेवा के बाद लोगों में अब सिंध और राजस्थान के बीच बस सेवा शुरू होने की उम्मीद जगी है.

बाड़मेर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद मानवेंद्र सिंह का कहना है की भारत इस सेवा के लिए तैयार है.

उन्होंने हाल में ये मुद्दा विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति में उठाया था.

उनका कहना है, ''पाकिस्तान में एक चुनी हुई सरकार ने काम शुरु कर दिया है. जल्द ही दोनों मुल्कों की बैठक में ये मुद्दा सामने आएगा. सरहद के उस तरफ़ सड़क नहीं होना इस बस सेवा प्रारंभ होने में एक बड़ी बाधा थी,अब उस तरफ़ सड़क बन कर तैयार हो गई है.हम चाहेंगे की बाड़मेर और मीरपुर खास(सिंध) के बीच बस सेवा शुरू हो और लोग इसका लाभ उठाएँ.”

कोई चालीस साल पहले इस मार्ग पर बसें दौड़ती थीं और लोगों को मिलाती थीं. लेकिन 1965 मे जब भारत-पाकिस्तान में जंग छिड़ी तो ,दोनों देशों के बीच आई तल्ख़ी ने इस बस सेवा की बलि ले ली.

फिर कभी ये बस सेवा शुरु नहीं हो पाई. कुछ साल पहले पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के नेतृत्व में एक दल पहली बार इस सड़क मार्ग से सिंध गया था.

उस समय दोनों तरफ़ के लोगों को लगा था कि काश वो पुराने दिन फिर लौट आएँ जब सड़क मार्ग से लोगों का आना-जाना शुरू हो.

पहले चलती थी बस...

 ''पाकिस्तान में एक चुनी हुई सरकार ने काम शुरु कर दिया है.जल्द ही दोनों मुल्कों की बैठक में ये मुद्दा सामने आएगा. सरहद के उस तरफ़ सड़क नहीं होना इस बस सेवा प्रारंभ होने में एक बड़ी बाधा थी,अब उस तरफ़ सड़क बन कर तैयार हो गई है.हम चाहेंगे की बाड़मेर और मीरपुर खास(सिंध) के बीच बस सेवा शुरू हो और लोग इसका लाभ उठाएँ
मानवेंद्र सिंह

मानवेंद्र सिंह कहते है कि ये दोनों राज्यों के बीच एक पारम्परिक मार्ग रहा है और पहले तो वाहनों के अलावा पैदल यात्री भी जा सकते थे.

जैसलमेर के एक गाँव में रहने वाले लालदीन कहते है, "अगर ये सड़क मार्ग खुल जाए तो हम सब इसका स्वागत करेंगे क्योंकि बस मार्ग सस्ता और कम समय लेने वाला होगा."

लालदीन जैसे हज़ारों लोग हैं जो इस राह के आसन होने की बाट जोह रहे हैं.

दोनों देशों के रिश्ते जब सुधरने शुरु हुए तो कोई चार दशक बाद इस मार्ग थार एक्सप्रेस पटरी पर लौटी.

कभी इस मार्ग से ऊँटो पर काफ़िले इधर से उधर आवाजाही करते थे.मगर अब वो इतिहास की बात हो गई.

बहरहाल लोग इससे भी खुश होंगे की इस मार्ग पर फिर से बसों की आमद शुरू हो और इंसानी रिश्तों का हॉर्न इस मरुस्थल में दोस्ती की सदा बुलंद करे.

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