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सोनिया पर फ़िल्म रुकी, चुनाव बाद विचार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
निर्देशक जगमोहन मूंदड़ा ने कहा है कि सोनिया गांधी पर उनकी प्रस्तावित फ़िल्म शुरु नहीं हो पाई है पर आम चुनाव के बाद वे फ़िल्म शुरु करने के बारे में विचार कर सकते हैं. जगमोहन मूंदड़ा ने कुछ वर्ष पहले कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी पर फ़िल्म बनाने की घोषणा की थी और इस रोल के लिए उन्होंने इतालवी अभिनेत्री मोनिका बलुची को पसंद किया था. लेकिन बाद में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें क़ानूनी नोटिस जारी कर दिया.ये क़ानूनी नोटिस उन्हें फ़िल्म बनाने से रोकने के लिए जारी किया गया था. पार्टी का कहना था कि उसे इस बात पर आपत्ति है कि फ़िल्म बनाने से पहले सोनिया गांधी या उनके परिवार के किसी भी सदस्य से इजाज़त नहीं ली गई.
लंदन में इंडिया-ईयू फ़िल्म इनिशिएटिव के एक कार्यक्रम में जगमोहन मूदड़ा ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद वे सोनिया गांधी से मिले भी थे लेकिन ये ख़बर मीडिया में नहीं आई. सोनिया गांधी से अपनी मुलाक़ात के बारे में जगमोहन मूंदड़ा ने बताया कि सोनिया यह बात जानने को बेहद उत्सुक थीं कि क्या इससे पहले जीवित व्यक्तियों पर फ़िल्में बन चुकी हैं या नहीं क्योंकि उनकी नज़र में ऐसी फ़िल्में लोगों के मरने के बाद ही बनाई जाती हैं. सोनिया से मुलाक़ात जगमोहन मूंदड़ा ने कहा कि सोनिया गांधी के साथ मुलाकात काफ़ी सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और उन्होंने क़ानूनी नोटिस का ज़िक्र भी नहीं किया. मुलाक़ात के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "फ़िल्म के लिए मैने काफ़ी शोध किया था और जब मैने सोनिया गांधी को उन्हीं के जीवन के कुछ किस्से सुनाए तो वे हैरान रह गई- जैसे उनकी और राजीव की पहली मुलाक़ात, केम्ब्रिज की वो दुकान जहाँ राजीव गांधी आईसक्रीम बेचा करते थे." लेकिन मुलाक़ात के दौरान सोनिया गांधी ने जगमोहन मूंदड़ा से स्पष्ट किया कि वे अपनी निजता का बहुत ध्यान रखती हैं और ये कल्पना करना उनके लिए मु्श्किल है कि कोई उनकी ज़िंदगी के बारे में फ़िल्म बनाना चाहता है. उन्होंने बताया कि सोनिया से मुलाकात के बाद फ़िल्म ठंडे बस्ते में चली गई. पर साथ ही जगमोहन मूंदड़ा ने इशारा किया कि भारत में आम चुनाव के बाद वे फ़िल्म शुरू करने पर विचार कर सकते हैं. जगमोहन मूंदड़ा अपनी फ़िल्म राशिद किदवई की सोनिया गांधी पर लिखी किताब पर आधारित करने वाले थे. फ़िल्म शुरु करने से पहले सोनिया गांधी से बात न करने के बारे में जगमोहन मूंदड़ा का तर्क था कि ऐसा कर उन्होंने सोनिया गांधी को असहज स्थिति से बचाया था. जगमोहन मूंदड़ा के मुताबिक अगर वे सोनिया गांधी से पूछते और वे हाँ कहतीं तो लोग उनपर प्रचार के लिए फ़िल्म बनवाने का आरोप लगाते. और अगर सोनिया मना कर देतीं तो लोग उन पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन का आरोप लगाते. | इससे जुड़ी ख़बरें 'प्रोवोक्ड की भूमिका दिल को छू गई'04 अप्रैल, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस सोनिया पर फ़िल्म के निर्देशक को नोटिस20 जुलाई, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'क्योंकि सोनिया ने चुनौतियाँ झेली हैं' 06 सितंबर, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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