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मंगलवार, 25 दिसंबर, 2007 को 10:06 GMT तक के समाचार
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शाहरुख़-अक्षय ने पार लगाई नैया

शाहरुख़
शाहरुख़ की दोनों फ़िल्मों को लोगों ने हाथों-हाथ लिया
कई उतार-चढ़ावों से गुज़रा बॉलीवुड का ये साल बेशक बादशाह शाहरुख़ खान और खिलाड़ी अक्षय कुमार के नाम रहा.

हिट फ़िल्मों के लिए तरसते बॉलीवुड की नैया को इन दोनों ने ही पार लगाया. वरना साँवरिया, राम गोपाल वर्मा की आग, एकलव्य, झूम बराबर झूम और आजा नचले जैसी बड़ी फ़िल्मों की विफलता के कारण ये नैया डोलती नज़र आ रही थी.

चक दे इंडिया और ओम शांति ओम के रूप में दोहरी हिट फ़िल्में देकर जहाँ शाहरुख़ ने सुनिश्चित किया कि बॉलीवुड के कैश रजिस्टर मालामाल रहें, तो है-ट्रिक देकर अक्षय कुमार दर्शकों को साल भर हँसते-गुदगुदाते रहे. अक्षय की नमस्ते लंदन, भूलभुलैया और हे बेबी तीनों हिट रहीं.

इनका चला जादू
 चक दे इंडिया, ओम शांति ओम, हे बेबी, भूलभुलैया, नमस्ते लंदन, भेजा फ़्राई, पार्टनर, लाइफ़ इन ए मेट्रो, धमाल

वर्ष 2006 बॉलीवुड के लिए बेहतरीन रहा था,उसके बाद 2007 से भी उम्मीदें बहुत थीं. और आगाज़ भी अच्छा ही रहा. अभिषेक बच्चन-ऐश्वर्या राय की फ़िल्म गुरु हिट रही. फिर मार्च में आई अक्षय कुमार-कैटरिना कैफ़ की हल्की-फ़ुल्की नमस्ते लंदन और इसकी सफलता लोगों को हैरान कर गई.

लेकिन साल के पहले हिस्से में फ़िल्म जगत आम तौर पर हिट के लिए तरसता ही रहा. बड़ी स्टार कास्ट वाली निखिल आडवाणी की सलामे-इश्क औंधे मुँह गिरी. अमिताभ की दो बड़ी फ़िल्में फ़्लॉप साबित हई. फ़रवरी में आई विधु विनोद चोपड़ा की एकलव्य अपना निशाना चूकी तो मार्च में आई निशब्द की बात सुनने वाला भी कोई नहीं था.

बॉक्स ऑफ़िस को बड़ा धक्का तब लगा जब हिट फ़िल्मों की फ़ैक्टरी यशराज फ़िल्मस की ता रा रम पम अप्रैल में कुछ ख़ास कारोबार नहीं कर पाई.

फिर भी लोगों को यशराज की जून में आने वाली फ़िल्म झूम बराबर झूम से उम्मीद थी कि सब ठीक-ठाक हो जाएगा. लेकिन फ़िल्म के एक गाने पर झूमने के अलावा लोगों को इसमें कुछ ख़ास पसंद नहीं आया.

छोटे बजट की फ़िल्में

छोटे बजट की भेजा फ़्राई ख़ूब चली

इस बीच ताज़े हवा के झोंके की तरह आई छोटे बजट वाली भेजा फ़्राई और हनीमून ट्रेवल्स लिमिटिड. न बड़े सितारे, न जाने-माने निर्देशक लेकिन मल्टीपलेक्सों में ये फ़िल्में अपनी लागत निकालने में कामयाब रहीं और साथ ही लोगों का दिल जीतने में भी.

हल्की फ़ुल्की फ़िल्म चीनी कम में अमिताभ बच्चन-तब्बू की केमिस्ट्री भी लोगों को पसंद आई. तो कई कहानियों वाली अनुराग बासु की लाइफ़ इन ए मेट्रो भी चल गई.

वैसे कुछ अजब ही संयोग था कि कम उम्र की लड़की और बड़ी उम्र के पुरुष वाला थीम लिए अमिताभ की ही निशब्द फ़्लॉप हुई लेकिन चीनी कम पर लोगों की प्रतिक्रिया इतनी सख़्त नहीं थी. वैसे ही समानांतर कहानियों वाली सलामे-इश्क नहीं चली पर लाइफ़ इन ए मेट्रो लोगों को भा गई. फ़िल्मों में वापसी कर रहे कॉमेडी किंग गोविंदा और सलमान खान की पार्टनर-शिप भी दर्शकों को पसंद आई.

लेकिन इन औसत फ़िल्मों के बीच फ़्लॉप फ़िल्मों का सिलसिला जारी रहा-शाका लाका बूम बूम, नक़ाब, नन्हें जैसलमेर, कैश, स्पीड......

चक दे का कमाल तो आग पर बवाल

बॉलीवुड को अब भी इंतज़ार था उस मेगा-हिट का जिसका जादू सर चढ़ कर बोले-लोगों पर भी और बॉक्स ऑफ़िस पर भी. ये इंतज़ार ख़त्म हुआ अगस्त में यशराज फ़िल्मस और शाहरुख़ खान की चक दे इंडिया से. राम गोपाल वर्मा के साथ काम कर चुके निर्देशक शिमित अमीन ने एक ऐसी फ़िल्म दी जो अपने आप में देश भर का नारा बन गई.

प्रेम कहानी, रोमांस, नाच-गाने, हीरोइन- हिट मसाला फ़िल्म के किसी भी मानक पर खरी नहीं उतरती थी ये फ़िल्म. आख़िर किंग ऑफ़ रोमांस शाहरुख़ खान स्क्रीन पर ख़ूबसूरत हसीना के साथ रोमांस करते न नज़र आएँ- फ़िल्म के रिलीज़ से पहले सवाल कई उठे. पर फ़िल्म के ज़बरदस्त प्रदर्शन ने सबको लाजवाब कर दिया.

जहाँ शार्गिद शिमित अमीन ने नए आयाम बनाते हुए चक दे इंडिया के रुप में साल की अब तक की सबसे हिट फ़िल्म दी वहीँ गुरू राम गोपाल वर्मा को मुँह की खानी पड़ी.

साल की सबसे चर्चित फ़िल्मों में से एक राम गोपाल वर्मा की आग जलने से पहले ही बुझ गई. वितरकों ने एक हफ़्ते के अंदर ही फ़िल्म को थिएटरों से उतार लिया.

इसके बाद लागा यशराज की चुनरी में दाग़ की विफलता ने एक और झटका दिया. नो स्मोकिंग हो या ढोल, या फिर जॉन-बिपाशा की गोल..कुछ भी काम नहीं किया.

कहीं अक्षय तो कहीं शाहरुख़

ऐसे में एक बार फिर शाहरुख़ खान ने साबित किया कि क्यों वे किंग खान कहलाते हैं. फ़राह खान के निर्देशन में बनी शाहरुख़ की ओम शांति ओम दीवाली बंपर साबित हुई और रिकॉर्ड कमाई की.

वहीं अक्षय कुमार ने भी हर क़दम पर शाहरुख़ को टककर दी. नमस्ते लंदन के बाद उनकी भूलभुलैया और हे बेबी हिट रहीं. उनका कोई वार निशाने से नहीं चूका.

दिलचस्प बात है कि जहाँ शाहरुख़ अक्षय कुमार की हे-बेबी के गाने में झूमते नज़र आए तो अक्षय ने शाहरुख़ की ओम शांति ओम में छोटा सा रोल किया जिसे लोगों ने ख़ूब पसंद किया. ये बात और है कि वे आलोचकों को नहीं रिझा पाए.

वैसे दीवाली के दिन एक साथ रिलीज़ हुई ओम शांति ओम और साँवरिया की किस्मत बिल्कुल अलग-अलग रही. अपनी आलीशान, संवदेनशील फ़िल्मों के लिए पहचाने जाने वाले संजय लीला भंसाली की साँवरिया को आलोचकों और आम लोगों दोनों ने नकार दिया.

ख़ास बातें

वर्ष 2007 में रणबीर कपूर, सोनम कपूर और दीपिका पादुकोण जैसे नए कलाकार फ़िज़ा में एक अलग तरह की ताज़गी ज़रूर लेकर आए. जॉनी गद्दार के नए नवेले नितिन नील मुकेश ने भी अपनी छाप छोड़ी.

नहीं चल पाईँ
साँवरिया
राम गोपाल वर्मा की आग
एकलव्य
निशब्द
लागा चुनरी में दाग़

वहीं कमबैक क्वीन माधुरी दीक्षित को लेकर उत्सुकता तो बेहद थी लेकिन यशराज की फ़िल्म आजा नचले का हश्र उसकी इस साल की ज़्यादातर फ़िल्मों की तरह ही हुआ-विफल.

यशराज की तीन बड़ी फ़िल्मों की विफलता से लोगों को काफ़ी निराशा हुई और बॉक्स ऑफ़्सि को आर्थिक नुकसान भी.आख़िर यशराज ने लोगों को हिट फ़िल्में देने का चस्का सा जो लगा रखा था

बॉलीवुड में रोमांटिक-कॉमेडी फ़िल्मों का परचम लहराए रखा करीना-शाहिद की जब वी मेट ने. दोनों की रियल लाइफ़ जोड़ी भले ही टूट गई हो लेकिन रील-लाइफ़ केमिस्ट्री कमाल की थी.

वहीं गांधी माई फ़ादर, ब्लू अंब्रेला और मनोरमा सिक्स फ़ीट अंडर जैसी फ़िल्मों को व्यावसायिक तो नहीं पर आलोचकों की ख़ूब सराहना मिली. तो हिमेश रेशमिया ने सब आलोचकों को ग़लत साबित करते हुए आप का सुरूर में बतौर अभिनेता अपनी फ़िल्म को सफलता दिलाई.

ख़ैर अब वर्षांत का समय है.साल की शुरुआत हुई थी एक बेहतरीन फ़िल्म गुरु से तो अंत भी बेहतरीन फ़िल्म से ही हुआ है- आमिर खान की फ़िल्म तारे ज़मीं पर. आमिर इसके सितारे ही नहीं निर्देशक भी हैं. डिसलेक्सिया से पीड़ित एक बच्चे पर बनी दिल छू जाने वाली इस फ़िल्म के साथ ही ये साल फिर उम्मीदें छोड़कर जा रहा है कि अगले साल फ़िल्में धमाल भी करें और कैश भी कमाएँ.

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