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फ़ारसी पढ़ाने के लिए फ़िल्मों का सहारा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विदेशी भाषा सीखना एक मुश्किल काम है और उसपर भी फ़ारसी लेकिन अब इस मुश्किल को आसान करने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के एक प्रोफ़ेसर ने एक मनोरंजक तरीका निकाला है. उन्होंने क्लास में सिनेमा दिखाकर अपने विद्यार्थियों को फ़ारसी पढ़ाने का काम शुरू किया है. विश्वविद्यालय में फ़ारसी भाषा विभाग के एक प्रोफ़ेसर आरिफ़ अय्यूबी अपने विद्यार्थियों को अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या रॉय, शाहरुख़ ख़ान और अमजद ख़ान जैसे कलाकारों की फ़ारसी में डब लोकप्रिय फ़िल्में दिखाकर उनका भाषा ज्ञान बढ़ा रहे हैं. फ़ारसी का लखनऊ और अवध से बड़ा पुराना रिश्ता रहा है. अंग्रेज़ों से पहले अवध के पुराने शासक नवाब इरान से आए थे. वे अपने साथ संस्कृति, कला और स्थापत्य के साथ ही फ़ारसी भाषा भी लाए थे. अवध के आख़िरी नवाब वाजिद अली शाह के ज़माने तक फ़ारसी सरकारी ज़ुबान थी. अंग्रेजों ने वर्ष 1867 में जब लखनऊ में कैनिंग कॉलेज खोला तो उसमें फ़ारसी पढ़ाई जाती थी. फिर 1922 में कैनिंग कॉलेज लखनऊ विश्वविद्यालय बन गया तो भी शुरू से ही यहाँ फ़ारसी भाषा विभाग खुला. लेकिन धीरे-धीरे फ़ारसी पढ़नेवालों की तादाद घटती गई. एक मुहावरा चल पड़ा- 'पढ़ें फ़ारसी बेचें तेल' क्योंकि फ़ारसी पढने से कोई अच्छा रोज़गार नहीं मिलता. इसी उधेड़बुन से प्रोफ़ेसर आरिफ़ अय्यूबी को यह नायाब तरीका सूझा कि क्लास रूम में कंप्यूटर और प्रोजेक्टर लगाकर छात्रों को पहले फ़ारसी में डब लोकप्रिय बॉलीवुड फ़िल्में दिखाई जाएं और फिर ईरानी फ़िल्में. प्रोफ़ेसर अय्यूबी ईरान आते-जाते रहते हैं. तेहरान से वो फ़ारसी में डब हिन्दी फ़िल्मों की सीडी ले आते हैं. थिएटर क्लासरूम सरकारी अनुदान से उन्होंने एक कंप्यूटर और प्रोजेक्टर खरीद लिया है और इस तरह उनका विश्वविद्यालय स्थित कमरा थिएटर हॉल भी बन गया है.
प्रोफ़ेसर अय्यूबी के मुताबिक, "छात्रों को उनकी मानसिकता के मुताबिक कोई चीज ख़ास आकर्षित करती है. जैसे शोले फ़िल्म में अमजद ख़ान ही "कितने आदमी थे कालिया" की जगह बोलने लगें "चन्द नफ़र बूदे" तो ज़ाहिर है वह उसे बार-बार दोहराना चाहेगा." फ़ारसी की एक छात्रा नूर सबा कहती हैं, "पहले डिग्री कॉलेज में सिर्फ़ किताबों के ज़रिए पढ़ाया जाता था. केवल किताबी जानकारी दी जाती थी लेकिन अब यहाँ पर ऑडियो-विजुअल तरीके से पढ़ाया जा रहा है." जाहिर है, छात्रों को इस तरह पढ़ने में मज़ा आ रहा है. प्रोफ़ेसर अय्यूबी के पास इस समय 60 के क़रीब फिल्में जमा हो गई हैं. प्रोफ़ेसर अय्यूबी डिश एंटीना के ज़रिए छात्रों को ईरान से प्रसारित होने वाले टीवी समाचार सुनाते हैं. वो छात्रों को रेडियो पर भी फ़ारसी समाचार सुनने के लिए प्रेरित करते हैं. इस समय लखनऊ विश्वविद्यालय के फ़ारसी भाषा विभाग में लगभग 50 छात्र हैं . इनमें 24 तो अफ़ग़ानिस्तान से हैं और एक कज़ाकिस्तान से. जब छात्र थोड़ी फ़ारसी समझने लगते हैं तो उन्हें ईरानी फ़िल्में भी दिखाई जाती हैं. एक छात्र गयासुद्दीन का कहना है कि धीरे-धीरे ईरानी फ़िल्में भी समझ आने लगती हैं. प्रोफेसर अय्यूबी की राय मे भाषाएं सीखने का यह बेहतर तरीका है. | इससे जुड़ी ख़बरें बाज़ार के दबाव में आगे बढ़ती हिंदी14 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस न्यूयॉर्क में सरकारी अरबी स्कूल07 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना युवा कवि को भारतीय भाषा सम्मान16 सितंबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस प्लूटो की परिभाषा पर विवाद उठा25 अगस्त, 2006 | विज्ञान उर्दू पर सहयोग बढ़ाने की पहल31 मई, 2006 | भारत और पड़ोस अंग्रेज़ी में रंगों के मुहावरे31 अक्तूबर, 2004 | Learning English अंग्रेज़ी में नीले रंग का कमाल31 अक्तूबर, 2004 | Learning English | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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