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शुक्रवार, 14 सितंबर, 2007 को 15:46 GMT तक के समाचार
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बाज़ार के दबाव में आगे बढ़ती हिंदी

हिंदी की वेबसाइटें तेज़ी से लोकप्रिय हो रही हैं
हिंदी को अधिक से अधिक लोकप्रिय और उपयोगी बनाने के लिए जो सरकारी विभाग बनाए गए हैं उनके लिए हर साल 14 सितंबर एक बड़ा दिन होता है.

मगर पिछले छह दशकों में उनकी उपलब्धियाँ क्या रही हैं, यह किसी से नहीं छिपा है. फिर भी हिंदी आगे बढ़ रही है सरकारी मदद के बिना.

इस समय हिंदी की सबसे बड़ी समस्या है तकनीकी विकल्पों का अभाव, लाखों लोग चाहकर भी कंप्यूटर पर हिंदी में सभी काम अच्छी तरह नहीं कर पाते हैं.

लेकिन अब यह स्थिति तेज़ी से बदल रही है मगर ये बदलाव सरकार की वजह से नहीं बल्कि बाज़ार की वजह से आ रहा है.

 भारत की जनसंख्या एक अरब है. अगर गूगल और अन्य कम्पनियां 60-70 करोड़ लोगों तक पहुंचना चाहती हैं तो उन्हें कुछ करना ही पड़ेगा कि हिंदी में ज्यादा समाचार आए. हमारी कोशिश है कि किस तरह हिंदी की ऑफलाइन सामग्री को ऑनलाइन लाया जाए
विनय गोयल, गूगल इंडिया

गूगल इंडिया के उत्पादन प्रमुख विनय गोयल कहते हैं, "भारत की सिर्फ़ सात प्रतिशत जनसंख्या अँग्रेजी बोलती है, बाक़ी आबादी हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाएँ बोलती है. भारत की जनसंख्या एक अरब है. अगर गूगल और अन्य कम्पनियां 60-70 करोड़ लोगों तक पहुंचना चाहती हैं तो उन्हें कुछ करना ही पड़ेगा कि हिंदी में ज्यादा समाचार आए. हमारी कोशिश है कि किस तरह हिंदी की ऑफलाइन सामग्री को ऑनलाइन लाया जाए."

कंपनियों को पता है कि अगर उन्हें भारत में अपने पाँव पसारने हैं तो हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के सहारे लोगों तक पहुँचना होगा. चाहे गूगल हो या माइक्रोसाफ्ट, हिंदी के महत्व को कोई नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता.

आज सैकड़ों हिंदी समाचार चैनल हिंदी को गाँव-गाँव, शहर-शहर पहुँचा रहे हैं. हालाँकि उस हिंदी की गुणवत्ता पर कई सवाल जरूर लगते रहे हैं.

समस्याएँ

पहले हिंदी को तकनीकी रूप में प्रस्तुत करने के मानक उपलब्ध नहीं थे, सभी ने अपने-अपने फॉन्ट बना रखे थे, अलग-अलग कीबोर्ड थे, लेकिन इस दिशा में भी कार्य हो रहा है.

 हिंदी की बहुत सारी वेबसाइट्स हैं जिनके माध्यम से हिंदी का प्रचार-प्रसार हो रहा है. हिंदी रोज़गार से जुड़ रहा है. पहले माना जाता था कि अगर आपकी शिक्षा हिंदी में हुई है तो आपको रोजगार में समस्या होगी. ये भ्रम ज़रूर टूटा है
जयदीप कार्णिक, वेबदुनिया

वेबसाइट वेबदुनिया के संपादक जयदीप कार्णिक कहते हैं, "हिंदी की बहुत सारी वेबसाइट्स हैं जिनके माध्यम से हिंदी का प्रचार-प्रसार हो रहा है. हिंदी रोज़गार से जुड़ रहा है. पहले माना जाता था कि अगर आपकी शिक्षा हिंदी में हुई है तो आपको रोजगार में समस्या होगी. ये भ्रम ज़रूर टूटा है."

हिंदी नए-नए माध्यमों के सहारे दुनिया के कोने-कोने में पहुँच रही है, और अब तो सामाजिक मेल-जोल से जुड़ी वेबसाइट ऑर्कुट भी हिंदी में है. विनय गोयल कहते हैं, "हमने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट को हिंदी में लॉन्च कर लिया है, अगर आप हिंदी में प्रचार करना चाहें तो वो कर सकते हैं."

मोबाइल उद्योग में भी हिंदी प्रमुखता से उभर रही है. बहुत सारी कंपनियाँ ग्राहकों को हिंदी में सुविधाएँ उपलब्ध करा रही हैं, कॉलकॉम इंडिया के प्रमुख तकनीकी सलाहकार डॉक्टर निखिल जैन कहते हैं, "आजकल हैंडसेट हिंदी में भी काम करते हैं. टाटा के मोबाइल फोन में आप समाचार पढ़ सकते हैं. धर्म से जुड़ी कई सुविधाएँ हिन्दी में उपलब्ध हैं."

जयदीप कार्णिक कहते हैं, "मोबाइल फ़ोन पर आप फ़ीचर्स पढ़ सकते हैं. फिल्मों की समीक्षाएँ, सितारों के इंटरव्यू वग़ैरह पढ़ सकते हैं."

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