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फ़िल्मों के लिए दीवाली यानी सुपर फ्राइडे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस युद्ध से पहले दोनों सेनाओं ने अपनी सैन्य क्षमता और साज़ो-सामान की जमकर नुमाइश की. प्रतिस्पर्धा के बीच शालीनता तो बनी रही लेकिन एक-दूसरे से बेहतर होने के पर्याप्त संकेत अख़बारों, टीवी और रेडियो पर दिए जाते रहे. ये नए बाज़ार के दौर का सिनेमा है, यहाँ आप के पास कुछ दिखाने के लिए है ये छत पर चढ़कर चीखना पड़ता है...सो दोनों सेनाओं के दलपति ख़ूब चिल्लाए...शुक्र है इस जंग के विजेता का फ़ैसला रणभूमि में नहीं बॉक्स ऑफिस पर होगा. एक तरफ़ हैं 'ब्लैक' जैसी सिनेमाई ख़ूबसूरती के चितेरे संजय लीला भंसाली हैं और दूसरी तरफ हैं 'मैं हूं ना' सरीखी व्यवसायिक तौर से सफ़ल फ़िल्म की निर्देशक और अपने इशारों पर नायक-नायिकाओं को नचाने वाली फ़राह ख़ान. और इसलिए रुपहले पर्दे पर सितारों के साथ हँसने और सिसकने वालों के लिए कुछ ख़ास है. और उस पर ख़ास यह कि दीवाली है. तो है न यह पूरा सुपर फ़्राइडे. एक दिन, दो बड़ी फ़िल्में एक बड़ा सवाल यह पूछा जा रहा है कि दो बड़ी फ़िल्में एक ही दिन कैसे रिलीज़ हो रही हैं जबकि आमतौर पर ऐसा होता नहीं है.
करण जौहर तो कह रहे हैं दोनों फ़िल्मों के एक ही दिन रिलीज़ होने को मीडिया ख़ामखाह तूल दे रहा हैं. करण ने बीबीसी को बताया, "दुनिया भर में बहुत बार ऐसा होता है कि एक हफ्ते में दो बड़ी फिल्में रिलीज़ हों...सिर्फ यहाँ हम एक हाइप बना रहे हैं कि 'साँवरिया' और 'ओम शांति ओम' एक हफ्ते में आ रही हैं...ऐसा कुछ नहीं होता...क्रिसमस में बहुत बार पश्चिम दो बड़ी-बड़ी फिल्में रिलीज़ होती रही हैं..ये दोनों अच्छी फिल्में लग रही हैं..और मेरी दोनों को शुभकामनाएँ." तो चलिए शुरुआत करते हैं साँवरिया से. फ़िल्म एक प्रेम कहानी है जिसमें ऋषि और नीतू कपूर के बेटे रणबीर कपूर और अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर. फ़िल्म के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली प्रेम कहानियों को भारतीय सिनेमा के सेंटर-स्टेज पर लाने की फिराक़ में हैं. फ़िल्म में सलमान खान और रानी मुखर्जी भी नज़र आयेंगे, लेकिन विशेष भूमिकाओं में. रणबीर कपूर ख़ानदान में एक्टिंग की प्रथा को आगे बढ़ाते हुए दिखेंगे और मशहूर आरके बैनर की बजाय वो शुरुआत कर रहे हैं पारंगत फ़िल्मकार संजय लीला भंसाली के साथ.
भारतीय सिनेमा के बड़े शोमैन और रणबीर के दादा राज कपूर की 'बॉबी' हिंदी सिनेमा का बेहद सफल प्रेम कहानियों में से एक है. तो क्या भंसाली भी प्रभावित राज कपूर से? इस सवाल पर वो कहते हैं, रणबीर पर मशहूर ख़ानदान के दिग्गजों के स्वर्णिम इतिहास का बोझ है और वो ये भी नहीं कह रहे कि वो नर्वस नहीं हैं. रणबीर कपूर ने बीबीसी को बताया, "बहुत सारी चीज़ें महसूस कर रहा हूँ...खुशी है, नर्वसनेस है, एंक्ज़ाइटी और एक्साइटमेंट है..ये सब मिलाकर आदमी ब्लैंक हो जाता है...क्यूंकि इतने सारे इमोशन्स हैं..उम्मीद करता हूँ कि लोगों को फ़िल्म पसंद आएगी." अनिल कपूर की बेटी सोनम का भी कुछ यही हाल है. सोनम ने बीबीसी को बताया कि वो ख़ुश तो हैं कि शुक्रवार को फ़िल्म रिलीज़ हो रही है लेकिन नर्वस हैं. ओम शांति ओम 'ओम शांति ओम' की कहानी ओम प्रकाश मखीजा उर्फ ओम कपूर के एक एक्सट्रा से सुपरस्टार बनने की है. कोरियोग्राफर से निर्देशक बनीं फ़राह की ये दूसरी फ़िल्म दर्शकों वापिस ले जाएगी सत्तर के दशक में.
फ़राह ने बताया कि फ़िल्म ज़रा हट के है. फराह बतातीं हैं, "फ़िल्म यूनीक (अद्वितीय) है क्यूंकि फ़िल्म का लुक यूनीक है..वो हिंदी सिनेमा के सत्तर के दशक पर आधारित है और कहानी आज के ज़माने तक की है...और इसलिए इसकी प्रचार भी यूनीक रहा क्योंकि हम पुराने और नये दोनों लुक्स को लोगों तक पहुंचाना चाहते थे." ओम शांति ओम के प्रचार के लिए निर्माताओं ने ख़ूब ख़र्च किया, मीडिया से लेकर फैशन शो तक और ग्रैंड फ़िनाले के तौर लंदन में प्रेमियर...इस ज़बरदस्त प्रचार युद्ध को फ़राह जायज़ मानती हैं, वो कहती हैं कि आजकल मीडिया का ज़माना है..प्रोमोशन बहुत ज़रुरी है..और इसमें एग्रेसिव होना भी अहम है. फ़िल्म में कई नये प्रयोग किये गये हैं. स्पेशल इफेक्ट्स के ज़रिए नायिका दीपिका पादुकोण को राजेश खन्ना और सुनील दत्त के साथ दिखाया गया है. एक गाने में 31 फिल्मी सितारों को नचाया गया है. दीपिका, पूर्व बैंडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण की पुत्री हैं. उन्हें आप इससे पहले कई विज्ञापनों में देख चुके हैं. फ़िल्म में उनकी अदाओं की काफी तारीफ़ भी हो रही है. लेकिन शाहरुख के नये कसरती बदन की चर्चा के सामने दीपिका के बारे में मीडिया कम ही लिख-बोल रहा है. हांलाकि शाहरुख़ इससे इत्तेफ़ाक नहीं रखते. वो कहते हैं, " दीपिका से कोई उनके हिस्से का धमाका नहीं छीन रहा. दरअसल फ़िल्म महिलाओं के हाथ में है. फ़राह और दीपिका फ़िल्म के केंद्र में हैं. मैं तो छिछोरागिरी में फ़िल्म को प्रचारित कर रहा हूं बस." 'इक़बाल' और 'डोर' जैसी चर्चित फिल्में कर चुके श्रेयस तलपड़े भी इस फ़िल्म में हैं और उनका कहना है अगर दीपिका पादुकोण फ्रेम में हैं तो आप किसी ओर को बस देख ही नहीं सकते..वो बस ज़बरदस्त हैं.
उधर दीपिका तो तक़दीर का शुक्रिया कर रही हैं कि उन्हें फ़राह और शाहरुख के साथ काम करने को मिला. दीपिका ने कहा कि सत्तर की नायिकाओं के लटके-झटके, अदाएँ और कपड़े पहनने में उन्हें कोई ख़ास दिक्कत नहीं पेश आई क्योंकि वो मॉडलिंग से हैं और वहां अलग-अलग तरह के कपड़े और हेयर स्टाइल उनके काम का हिस्सा रहे हैं. और हाँ, इस बार कपड़े नायिकाएँ नहीं नायक उतार रहे हैं. शाहरुख़ के 'सिक्स पैक' की चर्चा तो ख़ूब हो रही है लेकिन रणबीर का तौलिया-डांस भी लोगों को कम नहीं रिझा रहा.... बस अब यह दर्शकों के हाथों में है कि वे फ़राह ख़ान और संजय लीला भंसाली दोनो में से किसे ज़्यादा फ़ुलझड़ियाँ देते हैं और किसके पक्ष में ज़्यादा धमाके करते हैं. |
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