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'अतीत में नहीं वर्तमान में रहता हूँ मैं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सदाबाहार कहे जाने वाले मशहूर बॉलीवुड अभिनेता देव आनंद स्वीडन और ब्रिटेन के बाद अपनी जींवनी के प्रचार के लिए इनदिनों अमरीका में हैं. रोमैंसिंग विद लाइफ़ नाम की उनकी जींवनी का विमोचन तो भारत में हुआ लेकिन अब वह दुनिया भर के कई शहरो में घूम घूम कर अपने जीवन की कहानी सब को बता रहे हैं. पिछले कई दिनों से देव आनंद न्यूयॉर्क में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं.वे अपनी जीवनी के बारे में बात तो कर ही रहे हैं साथ-साथ उनके चाहनेवालों को देव आनंद का दीदार करने का मौका भी मिल रहा है. उनके चाहने वालों में सिर्फ़ भारतीय मूल के लोग ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया के साथ-साथ कई अन्य इलाकों के लोग भी देखने आ रहे हैं. न्यूयॉर्क में अपनी जींवनी - रोमैंसिंग विद लाइफ़ - के विमोचन के एक समारोह में देव आनंद ने इसे खुद ही लिखने के कारणों का ज़िक्र करते हुए कहा, "मुझे किसी और लेखक पर इतना भरोसा नहीं था कि वह मेरे जीवन के बारे में सही तरीके से लिख पाता. " कई लेखकों द्वारा उनकी जीवनी लिखने की पेशकश को ठुकराने के बारे में देव आनंद कहते हैं, “जब वह लेखक लोग मुझे छिछले तौर पर ही जानते और समझते हैं तो वह मेरे जीवन की कहानी की गहराइयों के बारे में कैसे लिख पाते. यह किताब सिर्फ़ मेरे बारे में है, मेरे करियर और मेरे अनुभवों के बारे में हैं. इसलिए इसे मैंने खुद अपने हाथों से स्याही में लिखा है.” उनका कहना है कि चूंकि उन्हे टाइपिंग करनी नहीं आती है इसलिए उन्होंने खुद ही स्याही और कलम से सारी दास्तान अपने हाथों से लिखी है. प्रशंसकों की भीड़
चौरासी साल के देव आनंद अपने जोशो-खरोश के साथ अब भी चुस्त नज़र आ रहे हैं. न्यूयॉर्क में कई समारोहों में उन्होंने शिरकत की और ऐसा ही एक समारोह था जैक्सन हाइट्स इलाक़े का जहाँ सैकड़ों की संख्या में उनके चाहने वाले मौजूद थे. और वह देव आनंद को अपनी आँखों के सामने देखकर पुरानी यादों में खो गए थे. देव आनंद के एक प्रशंसक, मूल रूप से मुंबई के रहने वाले अशोक जो 25 साल से अमरीका में ही रहते हैं कहते हैं, "देव साहब जैसा ज़िंदादिल इंसान मिलना मुश्किल है. यह तो आजतक वैसे के वैसे ही हैं, इस उम्र में भी कितने चुस्त औऱ फ़ुर्तीले लग रहे हैं. और अब भी अपने ख़ास अंदाज़ में ही बोलते हैं.” देव आनंद ने अपनी किताब में अपने करियर की शुरूआत के संघर्षपूर्ण दिनों से लेकर करोड़ों दिलों की धड़कन बनने तक और उसके बाद प्रोडूयूसर के तौर पर काम करने के सारे दौर के बारे में लिखा है. उनकी फ़िल्मों के शौकीनों में भारतीय मूल की चर्चित निर्देशक मीरा नायर भी एक समारोह में मौजूद थीं और हसरत से देव आनंद को निहार रही थीं. मीरा नायर ने भारतीय फ़िल्म जगत को देव आनंद के दशकों के योगदान को सलाम किया. जब उन्होंने देव आनंद से कहा कि वह उनकी फ़िल्म हरे रामा हरे कृष्णा में हीरोइन बनते बनते रह गईं तो देव आनंद ने मीरा नायर को गले लगा लिया. जारी है कहानी देव आनंद ने कहा कि ज़िंदगी में उनका सबसे बड़ा उसूल यह रहा है कि वह वर्तमान में जीते हैं और बीते हुए लम्हों पर नहीं जीते हैं. उनका कहना था कि यही उनकी कामयाबी का राज़ भी है. उनसे जब यह पूछा गया कि आजकल की फ़िल्मों में और उनके ज़माने की फ़िल्मों में क्या अंतर है, तो देव आनंद बोले, “देखिए पहले भी फ़िल्मों में रोमांस हुआ करता था, गाना बजाना और नाच होता था. लेकिन अब एक फ़र्क है वह यह कि आजकल की फ़िल्मों में हीरो को हीरोइन का दिल जीतने के लिए ज़्यादा जतन नहीं करने पड़ते हैं. पुराने ज़माने में फ़िल्मों में हीरो हीरोइन को पाने में बहुत वक़्त लगा देता था.” देव आनंद का असली नाम धरम पिशोरीमल आनंद है. और उनकी पैदाइश पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में हुई थी. उनके पिता पेशे से वकील थे और देव आनंद ने अविभाजित भारत के समय में लाहौर कॉलेज में शिक्षा पाई थी. न्यूयॉर्क में देव आनंद ने छह दशकों के अपने फ़िल्मी जीवन की कहानी के शुरूआती दौर का थोड़ा सा ज़िक्र करते हुए कहा," मैने भी शुरू में संघर्ष भरा समय बिताया था. मैं अपना शहर छोड़कर सिर्फ़ 30 रूपए लेकर हीरो बनने के लिए बंबई के लिए निकल पड़ा था. " करीब ढाई साल तक जद्दोजहद करने और बॉम्बे की सड़कों की खाक छानने के बाद उन्हे -हम एक हैं- नामक फ़िल्म में काम मिला. फिर उसके बाद देव आनंद ने 110 फ़िल्मों में रोमांटिक हीरो के तौर पर काम किया और करोड़ो फ़िल्म प्रेमियों के दिलो दिमाग़ पर छा गए. देव आनंद बॉलीवुड के पहले ऐसे मशहूर अभिनेता हैं जिन्होंने खुद अपनी जीवनी लिखी है. उन्होंने इस किताब पर 2003 में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे अपने जीवन और अपने अनुभवों का लेखा जोखा लिख किताब तैयार की. लेकिन देव आनंद का कहना है कि उनकी कहानी उस समय तक जारी रहेगी जब तक वह इस दुनिया में मौजूद हैं. फ़िलहाल वह तीन फ़िल्मों के निर्माण के काम में भी जुटे हैं, जिनमें दो अमरीका में शूट की जाएँगी और एक क्रोएशिया में. |
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