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फ़िल्म पुरस्कारों की घोषणा पर रोक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में दिल्ली हाई कोर्ट ने 53वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार घोषित किए जाने पर रोक लगा दी है. जज ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वो कोर्ट की अनुमति लिए बगैर पुरस्कारों की घोषणा न करें. आरोप लगाया गया है कि पुरस्कार देने में भेदभाव बरता गया है. पुरस्कारों के चयन के लिए बनी ज्यूरी की एक सदस्य ने कुछ फ़िल्मों को पुरस्कृत किए जाने पर आपत्ति दर्ज की है. निर्देशक संजय लीला भंसाली की फ़िल्म ब्लैक को दो पुरस्कारों के लिए चुना गया है. लेकिन ज्यूरी की सदस्य शयामली बैनर्जी ने आपत्ति जताई है कि ब्लैक एक यूरोपीय फ़िल्म पर आधारित है और मूल नहीं है. साथ ही परिणिता और परज़ानिया को पुरस्कृत किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है. ये पुरस्कार वर्ष 2005 के लिए दिए जाने थे. फ़िल्म पत्रकार शुभ्रा गुप्ता का कहना है कि राष्ट्रीय पुरस्कारों को लेकर अकसर कोई न कोई विवाद रहता है और इस बार मामला कोर्ट में जाने से इनकी गरिमा पर सवाल उठाने जाने लगे हैं. संजय लीला भंसाली की फ़िल्म 'ब्लैक' को टाइम पत्रिका ने वर्ष 2005 में दुनियाभर की सर्वेश्रेष्ठ 10 फ़िल्मों में शुमार किया था. | इससे जुड़ी ख़बरें स्टार स्क्रीन अवॉर्ड में ब्लैक की धूम12 जनवरी, 2006 | पत्रिका टाइम की टॉप टेन फ़िल्मों में 'ब्लैक'30 दिसंबर, 2005 | पत्रिका 'पेज-3' को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार13 जुलाई, 2005 | पत्रिका राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों की घोषणा14 अगस्त, 2004 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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