|
बावन वर्ष की हुईं रेखा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दस अक्तूबर, 1954 को चेन्नई यानी तब के मद्रास में जन्मी भानुरेखा के हाथों की रेखाएँ उन्हें इतनी शोहरत दिलवाने वाली हैं यह न माँ पुष्पावल्लि ने सोचा था और न ही पिता जेमिनी गणेशन ने. साँवली, भारी बदन की यह बच्ची फ़िल्मों की एक ग्लैमरस अदाकारा के तौर पर जानी जाएगी, इसका अंदाज़ा कोई नहीं लगा पाया था. वर्ष 1970 में जब उन्होंने अपनी पहली हिंदी फ़िल्म सावन भादों में काम किया तो उनकी उम्र महज़ सोलह साल थी. फ़िल्म देख कर बाहर निकल रहे दर्शकों और समीक्षकों ने एक स्वर में भविष्यवाणी की, हीरो नवीन निश्चल बहुत आगे जाएँगे जबकि हीरोइन रेखा..?
रेखा जब अमिताभ बच्चन के संपर्क में आईं तो जैसे उनका सोचने-समझने का नज़रिया ही बदल गया. आदर्श बने अमिताभ वह ख़ुद इस बात को मानती हैं और उनका कहना है कि एक सहकलाकार के रूप में अमिताभ ने उनके भीतर छिपे कलाकार को बाहर निकालने में बहुत मदद की. रेखा ने अपने फ़िल्मी जीवन में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं लेकिन ख़ूबसूरत, मिस्टर नटवरलाल, मुक़द्दर का सिकंदर, ख़ून भरी मांग, उमराव जान और सिलसिला उनकी कुछ यादगार फ़िल्में कही जा सकती हैं. ख़ूबसूरत और ख़ून भरी मांग के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला और उमराव जान के लिए वह राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित की गईं. रेखा ने सिर्फ़ अदाकारी में ही नए आयाम नहीं तय किए, उन्होंने अपनी शक्लो सूरत, चालढाल, पोशाक सभी पर ध्यान दिया और वह नई अभिनेत्रियों के लिए एक रोल मॉडेल बन गईं. उनकी मिसाल हॉलीवुड की अभिनेत्री जेन फॉंडा से दी जाती है जो उम्र के छह दशक पार करने के बाद आज भी तरोताज़ा नज़र आती हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'रेखा को छोड़ो, शाहरुख़ है या नहीं'30 मार्च, 2005 | पत्रिका अभिनेता जेमिनी गणेशन का निधन22 मार्च, 2005 | पत्रिका कैटरीना कैफ़ निकलीं तीर्थयात्रा पर!29 सितंबर, 2006 | पत्रिका सायरा बानो को भा रही है भोजपुरी30 सितंबर, 2006 | पत्रिका अंतरराष्ट्रीय गांधी शांति पुरस्कार शबाना को 09 सितंबर, 2006 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||