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शनिवार, 30 सितंबर, 2006 को 05:25 GMT तक के समाचार
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सायरा बानो को भा रही है भोजपुरी

सायरा बानो
सायरा कहती हैं कि उन्हें भोजपुरी में संवाद बोलना बहुत पंसद है
बॉलीवुड को कई सफल फ़िल्में देने वाले भारतीय सिनेमा जगत के दो जाने-माने चेहरे दिलीप कुमार और सायरा बानो अब भोजपुरी सिनेमा की ओर आकर्षित हुए हैं.

दोनों अपनी भोजपुरी फ़िल्म 'अब त बनजा सजनवा हमार'" के साथ मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.

सायरा बानो निर्मित यह फ़िल्म रिलीज़ के लिए लगभग तैयार है. इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका में रवि किशन और नगमा के अलावा गुजराती फ़िल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री मोना थीबा भी नज़र आएंगी.

भोजपुरी को एक सुंदर और मीठी भाषा बताते हुए सायरा कहती हैं, "जब मुझसे लोग ये पूछते हैं कि भोजपुरी ही क्यों तो मुझे लगता है कि भोजपुरी क्यों नहीं. यह एक बहुत ही सुंदर और मीठी भाषा है जो हमारे पास है."

वो कहती हैं, "इस भाषा में बहुत ही ज़मीनी बात होती है. इसमें जो भाव होता है वो मुझे बहुत अच्छा लगता हैं. भोजपुरी में पहली बार फ़िल्म 'बैराग' में काम करने का मौका मिला. इस भाषा में 'तो क्या हुआ…' को 'त का भवा...' बोलते समय जो लटक-लटककर बोलना होता है वह मुझे बहुत पसंद है."

पर भोजपुरी से लगाव केवल सायरा को नहीं, दिलीप कुमार को भी है. वो कहते हैं, "भोजपुरी की अपनी एक अहमियत है और इसमें दिल को छू लेने वाली और ज़मीनी बात होती है. शायद इसीलिए आज भोजपुरी फ़िल्मों की अहमियत लोगों को समझ में आ गई है."

निर्माता सायरा बानो

निर्मात्री के रूप में अपने आपको सायरा कितना सहज पाती हैं और इनका यह अनुभव कैसा रहा, यह पूछने पर वो कहती हैं, "बहुत ही आसान सफ़र रहा है क्योंकि फ़िल्मों में काम करते-करते प्रोडक्शन देखने की आदत-सी हो जाती है. इसके अलावा मेरी यूनिट भी बहुत अच्छी थी."

 इस भाषा में बहुत ही ज़मीनी बात होती है. इसमें जो भाव होता है वो मुझे बहुत अच्छा लगता हैं. भोजपुरी में पहली बार फ़िल्म 'बहराग' में काम करने का मौका मिला. इस भाषा में 'तो क्या हुआ…' को 'त का भवा...' बोलते समय जो लटक-लटककर बोलना होता है वह मुझे बहुत पसंद है
अभिनेत्री सायरा बानो

सायरा बताती हैं कि प्रोडक्शन में आने का ख़याल उन्हें बहुत पहले ही आ गया था लेकिन हर चीज़ का एक समय होता है और शायद उनके साथ भी यही हुआ.

फ़िल्म निर्देशन में आने की इच्छा जताते हुए वो कहती हैं, "मैं निर्देशन ज़रूर करना चाहूँगी लेकिन इसमें समय की बहुत ज़रूरत होती है और आज मेरी प्राथमिकताएँ बदल गई हैं. सबसे पहले मैं घर-परिवार और दिलीप साहब पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हूँ फिर निर्माण में समय देने की सोच सकती हूँ."

वो कहती हैं, "1970 में जब मेरी शादी हो गई थी तब मुझे भोजपुरी फ़िल्मों में काम करने के कई अवसर आए थे लेकिन मैंने स्वीकार नहीं किए. मैंने उस वक्त ही सोचा था कि मौका मिला तो मैं भोजपुरी फ़िल्म ज़रूर बनाऊंगी."

भोजपुरी सिनेमा

 1970 में जब मेरी शादी हो गई थी तब मुझे भोजपुरी फ़िल्मों में काम करने के कई अवसर आए थे लेकिन मैंने स्वीकार नहीं किए. मैंने उस वक्त ही सोचा था कि मौका मिला तो मैं भोजपुरी फ़िल्म ज़रूर बनाऊंगी
अभिनेत्री सायरा बानो

हालांकि पिछले कुछ समय से भोजपुरी फ़िल्मों का बाज़ार बेहतर स्थिति में चल रहा है.

हाल ही में जब से बॉलीवुड के शहंशाह कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन ने अपने मेक-अप मैन दीपक सावंत की भोजपुरी फ़िल्म ‘गंगा’ में काम किया है तब से इस उद्योग का मनोबल और बढ़ा है.

मगर भोजपुरी बाज़ार के इस छूते आसमान पर शायद अभी भी कोई कमी रह गई है क्योंकि फ़िल्म ‘गंगा’ में अमिताभ बच्चन के रहने के बावजूद इसके लिए वितरक आगे आते नहीं दिखाई दे रहे हैं.

देखना यह है कि सायरा बानो का भोजपुरी फ़िल्मों के निर्माण में उतरना इस उद्योग को कितनी सफलता दिला पाता है.

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