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रामलीला की वीआईपी लीला | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
(बिंदास बाबू की डायरी) रामलीला हो रही है. मंच पर लक्ष्मण सीता को वनवास गमन करते देख, सामने की सीट पर बैठा वीआईपी दूसरे वीआईपी से कुछ कहता है. दूसरा वीआईपी रहस्यमय मुस्कान फेंकता है. वनगमन को जाते राम और लक्ष्मण जी वीआईपी जोड़ी को बैठा देख अपना जन्म धन्य समझते हैं. अब राम जी के मुरादाबाद वाले घर में पूरा राशन आ सकेगा. लक्ष्मण जी का छोटा भाई मेडिकल कॉलेज में जा सकेगा. रामलीला हो रही है. मंच पर राम, लक्ष्मण, सीता सब आते-जाते रहते हैं. गायक वादक गाते रहते हैं. मगर उनकी नज़र वीआईपी की नज़र पकड़ने में लगी रहती है. वे डॉयलॉग भूल जाते हैं. संगीत मास्टर ज़ोर का हारमोनियम लगाकर राधेश्याम कथा वाचक की रामायण में फ़िल्मी धुन घुसेड़कर गाता है. झलक दिखला जा. हनुमान आ-जा, आ-जा, आ-जा. हनुमान जी परदे के पीछे एंट्री के लिए तैयार खड़े हैं. उन्हें गरमी लग रही है. भारत लीला भूमि है. तरह-तरह के लीला पुरुष अवतरित हुए हैं. कृष्ण राम तो फेमस हैं. उनकी लीलाओं में इन दिनों वीआईपी लीला का रिमिक्स चलाया जा रहा है. रामलीलाओं के आयोजक चाहते हैं कि लीला में दो मिनट के लिए वीआईपी आएं. दिल्ली शहर वीआईपीजनों का शहर है. ईंट उठाओ तो पांच वीआईपी निकलते हैं. एक वीआईपी दूसरे वीआईपी से उसी तरह कनैक्टेड होता है जिस तरह हच या एयरटेल (मोबाइल सेवाएँ) आदमी को कनेक्ट करते हैं. वीआईपी के आजू बाजू 50 मिनी वीआईपी होते हैं. ये सब लीला पुरुष होते हैं. रामलीला होते ही वे पूछते हैं. कब एंट्री लें. आयोजक कहते हैं, सर नौ बजे का टाइम ठीक है तभी क्राउड होता है. रामजी क्राउड खींचते हैं. वीआईपी क्राउड को दर्शन देता है. रामजी को भी दर्शन देता है. रामजी के दर्शन कौन करे? अरे वे तो हमारे दिल में रहते हैं. रामजी ख़ुद ही वीआईपी का इंतजार करते हैं. पिछले साल जब तक रामलीला मैदान में महान वीआईपी जन नहीं पहुँच गए राम जी लक्ष्मण जी अपने धनुष बाण लेकर रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण के पुतलों के फालतू चक्कर मारते रहे. फिर वीआईपी आए. उनके भक्त रामजी के भक्तों से ज़्यादा थे. कोई चाँदी का धनुष देता था कोई गज गर्दन गामिनी फूलमाला. वीआईपी पुलकित होते. टीवी वाले उनका सौंदर्य वर्णन करने में रीतिकालीन कवियों को मीलों पीछे छोड़ते दिखते. तब आयोजक उनके कर कमलों में चांदी का धनुष देते. तीर देते. वीआईपी जी उसे खींचकर चलाते हैं. तीर चलता नहीं, गिर जाता है. वीआईपी जी को शर्म जैसी चीज़ नहीं आती. वह तो कभी नहीं आती. राम जी उन्हें देख रहे हैं. लक्ष्मण जी उन्हें देख रहे हैं. स्वर्ग लोक से इंद्र भगवान समेत सब देवी देवता देख रहे हैं कि ये भगवान को क्या हुआ है! हनुमान जी क्यों युद्ध नहीं कर रहे है? लीला में रुकावट क्यों है? रुकावट है तो खेद क्यों है? स्वर्गलोक में खलबली मच जाती है. सम थिंग रौंग विद रामजी. वे अपने चीफ़ विष्णु जी तक जाते हैं. कहते हैं, महाराज ये क्या हो रहा है? हम दो घंटे से हाथ में शंख और फूल मालाएं लिए खड़े हैं कि कब राम रावण का वध करें, सदा की तरह हम पुष्प वर्षा करें और अपने-अपने काम पर जाएं? समाधान करें महाराज! भगवान विष्णु जी भी परेशान ठहरे. बोले, हे देवताओं तुम्हारी चिंता उचित है. यही मेरी भी चिंता है. मैंने अपने दूत भेजे हैं. वे ख़बर भेजते होंगे. वेट करो. देखता हूँ, ई-मेल आया कि नहीं. उधर से ई-मेल था रोमन में लिखा था. सर अभी तक राम रावण, मेघनाथ, कुंभकर्ण आदि राक्षसों के पुतलों का संहार करते थे अब तो मंच पर, सामने की कुर्सियों में कई-कई रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद बैठे नज़र आते हैं. किस किस पर तीर चलाएं महाराज. आप ही लाइन दें कि क्या करें. भगवान विष्णु जी ऐसे मैं क्या व्यवस्था दें. इस पर विचार करने के लिए तुरंत ब्रह्माजी के पास चले गए. वे अब अगले साल ही लौटेंगे. (बिंदास बाबू की डायरी का यह पन्ना आपको कैसा लगा लिखिए [email protected] पर) |
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