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हृषिकेश मुखर्जी का अंतिम संस्कार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जाने-माने फ़िल्मकार हृषिकेश मुखर्जी को मंगलवार को बॉलीवुड के कई बड़ी हस्तियों और ढेर सारे प्रशंसकों ने अंतिम विदाई दी. 84 वर्षीय हृषिकेश मुखर्जी का रविवार को निधन हो गया था. मुंबई में बांद्रा हिंदू एसोसिएशन में उनका पार्थिव शरीर रखा गया था जहाँ फ़िल्म जगत की जानी मानी हस्तियों ने उनको श्रद्धांजलि दी. उनको श्रद्धांजलि देने वालों में फ़िल्म अभिनेत्री और सांसद जया बच्चन, फ़िल्मकार और गीतकार गुलज़ार, निर्देशक श्याम बेनेगल, सुभाष घई, विधु विनोद चोपड़ा, मधुर भंडारकर, राजकुमार हीरानी, अभिनता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, अभिनेत्री दीप्ति नवल और जूही चावला सहित कई लोग शामिल थे. इसके बाद उनका दादर के विद्युत शवदाहगृह में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. बड़ा फ़िल्मकार जया बच्चन ने इस अवसर पर कहा कि हृषिकेश मुखर्जी उनके लिए पिता के समान थे और उनके चले जाने से वे अकेला सा महसूस कर रही हैं.
दीप्ति नवल ने इस मौक़े पर शिकायत की कि मीडिया ने जीते-जी हृषिकेश मुखर्जी की ओर ध्यान नहीं दिया. हृषिकेश दा का भारतीय सिनेमा जगत में अपने विशिष्ट योगदान के लिए जाने जाते रहे हैं. 'आनंद' और 'मिली' जैसी फ़िल्मों से भारतीय सिनेमा जगत को एक नया मुकाम देने वाले हृषिकेश मुखर्जी ने फ़िल्म 'दो बीघा ज़मीन' में बतौर सहायक निर्देशक के रूप में 1953 में अपने कैरियर की शुरुआत की थी. हृषिकेश मुखर्जी ने सबसे बाद में बनी फ़िल्म थी, 'झूठ बोले कौवा काटे' जो 1998 में रिलीज़ हुई थी. मुखर्जी की फ़िल्मों की सबसे बड़ी ख़ासियत रही उनका सामाजिक संदर्भ, सादगी भरा हास्य और जीवन के कई पहलुओं को आसानी से कहानी में पिरोना. 'अभिमान', 'बावर्ची', 'नमक हराम', 'सत्यकाम', 'गुड्डी', 'सांझ और सवेरा', 'अनुराधा' जैसी कितनी ही सार्थक और सफल फ़िल्में का निर्देशक उन्होंने किया. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मेरे और जया के लिए फ़ादर फ़िगर थे हृषिदा'28 अगस्त, 2006 | मनोरंजन 'कम समय में अच्छी फ़िल्में बनाते थे हृषिकेश दा'27 अगस्त, 2006 | मनोरंजन संवेदनशील मनोरंजन का एक नया मुहावरा27 अगस्त, 2006 | मनोरंजन फ़िल्मकार हृषिकेश मुखर्जी का निधन27 अगस्त, 2006 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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