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सौ साल की सौ बेहतरीन फ़िल्में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जीवन के दूसरे क्षेत्रों की तरह फ़िल्म में भी लंबे अरसे से दो धाराएँ चल रही हैं. एक ओर जहाँ कलात्मक इज़्ज़त, मान-सम्मान और मक़ाम बनाने वाले फ़िल्मकार हैं, वहीं उनकी भी अनदेखी नहीं की जाती जो ऐसी फ़िल्में बनाते हैं जिन्हें दर्शक देखते-देखते थकते नहीं. आमदनी और मुनाफ़े के हिसाब से अमरीकी फ़िल्में यानी हॉलीवुड सब से ऊपर है. लेकिन कला के नज़रिए से भी अमरीकी सिनेमा किसी से कम नहीं है. इस तरह फ़िल्म कला वो अकेला विभाग है जिस पर अमरीका पूरी तरह हावी है. दुनिया भर में कई संस्थाएँ फ़िल्मों के स्तर को निर्धारित करती हैं. इन में से कई संस्थाओं ने पश्चिमी देशों के अलावा दूसरे देशों की फ़िल्मों को भी अपनी सूची में शामिल करना शुरू कर दिया है. कुछ समय से लघु, प्रयोगिक और दस्तावेज़ी फ़िल्मों की भी श्रेणी बनाई गई है. संस्थाएँ
अधिकतर संस्थाएँ हालांकि अमरीकी हैं लेकिन उन की साख बहुत हद तक निर्पेक्ष है. पिछली शताब्दी के समापन पर कमोबेश इन सारी संस्थोओं ने फ़िल्मों के 100 साल का आकलन भी किया और अपने अपने हिसाब से 100 बेहतरीन फ़िल्मों का चुनाव भी किया. इन में से जिन संस्थाओं के संकलन को हमने सामने रखा है उनमें अमरीकी फ़िल्म संस्था का ‘सर्वे ऑफ़ अमरीकन मूवीज़’, ‘नेश्नल फ़िल्म रेजिस्ट्री ऑफ़ अमरीका’ या ‘यू एस लाईब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस’ शामिल हैं. इसके अलावा ‘एकेडमी अवार्ड’, ‘लॉस एंजेलेस फ़िल्म क्रीटिक एसोसिएशन’, ‘यू एस नेश्नल सोसाइटी ऑफ़ फ़िल्म क्रीटिक्स’, ‘न्यूयॉर्क फ़िल्म क्रीटिक सर्कल’ और ब्रिटिश फ़िल्म अकादमी की पत्रिका ‘साइट एंड साउंड’ के सर्वे और संकलन. फ़िल्में
ये चुनाव सब से अधिक निष्पक्ष और भरोसेमंद समझे जाते हैं. और इस में दूसरे सारे संकल्नों को भी सामने रखा जाता है. 2002 में जिन फ़िल्मों का चुनाव किया गया उनमें पिछले सारे चुनावों को सामने रखा गया है. इन चुनावों के अनुसार अमरीकी फ़िल्म ‘सिटीज़न केन’ ने अब तक बनने वाली दुनिया की सब से उत्तम फ़िल्म होने का गौरव प्राप्त किया है. ‘सिटीज़न केन’ के निर्देशक ओ. वेल्स को अकसर फ़िल्मी हल्क़ों में दुनिया का सब से बढ़ि़या निर्देशक माना जाता है और सिटीज़न केन उनकी पहली फ़िल्म थी और जब उन्होंने यह फ़िल्म बनाई उस समय उनकी आयु सिर्फ़ 25 साल थी. इसी प्रकार सितंबर 1997 में रिलीज़ होने वाली फ़िल्म टाइटेनिक दुनिया में अब तक घनत्व के हिसाब से सबसे अधिक आमदनी और मुनाफ़ा कमाने वाली फ़िल्म है. खर्च और लाभ के अनुपात के हिसाब से फ़रवरी 1993 में रिलीज़ होने वाली कोलम्बिया फ़िल्मस की ‘अलमारयाची’ सब से ऊपर है और इस फ़िल्म ने सिर्फ़ अमरीका में लागत का तीस गुना कमाकर रिकॉर्ड बनाया है. टूएंटीथ सेंचुरी फ़ॉक्स की फ़िल्म ‘टाईटेनिक’ पर साठ करोड़ डॉलर की लागत आई थी और 2006 के प्रारंभ तक उसकी आय एक अरब 83 करोड़ डॉलर से अधिक थी. पिछली शताब्दी के अंत पर दुनिया भर के जाने माने 108 निर्देशकों और 145 फ़िल्म आलोचकों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने शताब्दी की सौ बेहतरीन फ़िल्मों का चुनाव किया. पिछले 75 साल से अधिक समय से हर साल विभिन्न संस्थाएँ साल की बेहतरीन फ़िल्म का चुनाव करती आ रही हैं और 1952 से हर दस वर्ष पर बेहतरीन फ़िल्मों का चयन किया जा रहा है. आख़री बार चयन 2002 में हुआ था. फ़िल्मों की सूची
अब तक की बेहतरीन दस फ़िल्मों में क्रमशः अमरीकी निर्देशक वेल्स की ‘सिटीज़न केन’ (1941), फ़्रांसीसी निर्देशक जीन रेनाएर की ‘लॉ रेगली डी ज़्यु’ या ‘रूल्ज़ ऑफ़ दी गेम’ (1939), अमरीकी निर्देशक अल्फ़्रेड हिचकॉक की ‘वर्टिगो’ (1958) अमरीकी निर्देशक फ़्रांसिस फ़ोर्ड कपोला की ‘गॉड फ़ादर भाग-2’ (1974) जापान के यासूजीरो ओज़ो की ‘टोक्यो स्टोरी’ का नाम है (1953). इसके अलावा अमरीकी निर्देशक स्टेनले कूबरिक की ‘2001- ए स्पेस ओडिसी’ (1968), रूसी निर्देशक सर्गई एज़नस्टाईन की ‘बैटिलशिप पोटैंपकिन’ (1925) जर्मन निर्देशक मुरनाव की ‘सन राइज़’ (1927), इतालवी निर्देशक फ़िदोर फ़ेलिनी की ‘8½’ (1963) और अमरीकी निर्देशक जेनी केली एवं स्टैनले डोनन की ‘सिंगिंग इन दी रेन’ (1952) शामिल हैं. इन में ‘सिटीज़न केन’ पिछले सौ वर्षों की सबसे लोकप्रिय फ़िल्म रही है और इस बात की पुष्टी निर्देशकों ही ने नहीं आलोचकों और लोगों की राय के विश्लेषण से भी होती है. यह फ़िल्म 1962, 1972, 1982, 1992 और 2002 के विश्लेषणों में भी पहले नंबर पर रही है. गत साठ वर्षों के दौरान ‘बैटिलशिप पोटैंपकिन’ लगातार सौ सालॉ की 10 बेहतरीन फ़िल्मों में गिनी जाती रही है और यह एक बार तीसरे, एक बार चौथे, तीन बार छठे और एक बार सातवें नंबर पर रही है. फ़्रांसीसी निर्देशक जीन रेनाएर की ‘लॉ रेगली डी ज़्यु’ या ‘रूल्ज़ ऑफ़ दी गेम’ (1939) भी लगातार छः दशकों तक दुनिया की दस बेहतरीन फ़िल्मों में शामिल रही है और तीन बार दूसरे, दो बार तीसरे और एक बार दसवें नंबर पर रही है. इतालवी निर्देशक माइकल एंजेलो अनतोनियोननी की 1960 की फ़िल्म ‘लॉ एवेंटोरा’ या ‘दि ऐडवेंचर’ तीन बार दस बेहतरीन फ़िल्मों में शामिल रही है, एक बार दूसरे, एक बार पाँचवें और एक बार सातवें स्थान पर रही है. फ़ेडरिको फ़ेलिनी की ‘8½’ भी तीन बार दस बेहतरीन फ़िल्मों में शामिल रही है. फ़्रांसीसी निर्देशक कार्ल थियुडोर ड्रिएर की ‘पैशन ऑफ़ जोन ऑफ़ आर्क’ (1928) तीन बार टॉप देन में शामिल रही है और अल्फ़्रेड हिचकॉक की ‘वर्टिगो’ भी तीन बार उस सूची में रही हैं. अन्य फ़िल्में
जो फ़िल्में दो बार दस बेहतरीन फ़िल्मों की सूची में रही हैं उनमें फ़्रांसीसी निर्देशक ज़ॉ विगो की ‘लॉ ऐटलानटा’ (1934), इतालवी निर्देशक विटोरियो डी सीका की ‘दी बाईसिकिल थीफ़’ (1949), अमरीकी निर्देशक बस्टर केटेन और क्लाईड ब्रुकमैन की ‘दी जेनेरल्ज़’ (1925) शामलि है. इसके अलावा अमरीकी निर्देशक एरिख़ वॉन स्ट्रोहम की ‘ग्रेड’ (1924), और सन वेलिस की ‘दी मैगनिफ़िसेंट अम्बरसंज़’ (1942), अमरीकी निर्देशक जॉन फ़ोर्ड की ‘सर्चर्ज़’ (1956), जॉन केली और स्टेनले डोनन की ‘सिंगिंग इन दी रेन’ (1952), यासूजीरो ओवर्ज़ की ‘टोक्यो स्टोरी’ (1953), स्टेनले कूबरिक की ‘2001- स्पेस ओडिसी’ (1968) और जापानी निर्देशक कैंजी मीज़ू गोशी की ‘ओगेट्सो मोनो गातारी’ (1953) शामिल हैं. भारत के निर्देशक सत्यजीत रे की फ़िल्म ‘'पाथेर पांचाली' (1955) दुनिया की दस बेहतरीन फ़िल्मों में एक बार शामिल रही है. दूसरी फ़िल्में जो एक बार दुनिया की दस सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों में रहीं हैं वे इस प्रकार हैं:‘सिल्विया ए डे ब्रेक’ (1939), ‘लुज़ियाना स्टोरी’ (1947), ‘दि मिलियन’ (1930), ‘परसोना’ (1967), ‘सेवन समुराई’ (1954) ‘सन राईज़’ (1927), ‘लॉ टेरा ट्रीमा’ (1948) और ‘वाइल्ड स्ट्रॉब्रीज़’ (1957). | इससे जुड़ी ख़बरें पाकिस्तानी फ़िल्मों में काम करुंगा13 मई, 2006 | मनोरंजन संगीतकार नौशाद को एक श्रद्धांजलि05 मई, 2006 | मनोरंजन भारत के बाहर का भारत31 अक्तूबर, 2003 | मनोरंजन मार्लन ब्रांडो का निधन02 जुलाई, 2004 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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