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मार्लन ब्रांडो का निधन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हॉलीवुड के महान अभिनेता मार्लन ब्रांडो का निधन हो गया है. मार्लन ब्रांडो उन गिने-चुने अभिनेताओं में शुमार किए जाते हैं जिनकी पहचान केवल उनकी अभिनय प्रतिभा तक ही सीमित नहीं रह जाती. मार्लन ब्रांडो ऐसे अभिनेता रहे जिन्होंने अभिनेताओं की एक पूरी पीढ़ी पर अपनी छाप छोड़ी. और उनकी ये छाप माटी और बोली की सरहदों को भी पीछे छोड़ गई. अक्सर ऐसा होता रहा है कि किसी ख़ास फ़िल्म में किसी ख़ास अभिनेता का अभिनय देख कोई सिनेमाप्रेमी उस अभिनेता के अभिनय से अभिभूत हो गया और बाद में जब उसने ब्रांडो की कोई फ़िल्म देखी तब उसे पता चला कि 'उस' अभिनेता ने कुछ नहीं किया बस ब्रांडो की एक्टिंग उतार डाली. हॉलीवुड में अल पचीनो, रॉबर्ट डी नीरो और जैक निकल्सन जैसे शानदार अभिनेताओं में मर्लन ब्रांडो की झलक तो मिलती ही है भारतीय फ़िल्मों के दिग्गजों में भी उनकी ये छाप नज़र आई. 'अग्निपथ' में विजय चौहान बने अमिताभ बच्चन को देखिए,'नायकन' में वेलु नायकन बने कमल हासन को देखिए और फिर देख लीजिए 'द गॉडफ़ादर' में वीटो कॉर्लियन बने मार्लन ब्रांडो को, ये बताने की ज़रूरत नहीं होगी कि अमिताभ और कमल हासन के 'गॉडफ़ादर' कौन थे. जीवन और फ़िल्में मार्लन ब्रांडो का जन्म तीन अप्रैल 1924 को अमरीका के नेबरास्का राज्य के ओमारा शहर में हुआ. अपने अभिनय के लिए उन्हें दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ऑस्कर पुरस्कार मिला.
पहली बार 1954 में फ़िल्म 'ऑन द वाटरफ़्रंट' के लिए और दूसरी बार 1972 में मारियो पूजो की किताब पर फ्रांसिस फ़ोर्ड कोपोला की फ़िल्म 'द गॉडफ़ादर' के लिए. उन्होंने अमरीका के मूल निवासियों इंडियन्स के प्रति अमरीका सरकार के रवैये के विरोध में 'गॉडफ़ादर' के लिए ऑस्कर लेने से मना कर दिया था. 50 के दशक में उन्होंने तीन यादगार फ़िल्मों में काम किया. 1951 में आई टेनेसी विलियम्स के नाटक पर आधारित फ़िल्म 'ए स्ट्रीट कार नेम्ड डिज़ायर', जिसमें उन्होंने स्टैनली कोवाल्स्की नाम के ऐसे किरदार का रोल निभाया जो बेहद निर्मम और बर्बर है और हमेशा ये सोचता है कि वही सही है. 1953 में वे नज़र आए 'द वाइल्ड वन' में जो मोटरसाइकिल चलाने वालों पर बनी अभी तक की सबसे बड़ी फ़िल्म कही जाती है. इस फ़िल्म पर ब्रिटेन में कई साल तक ये कहकर पाबंदी लगी रही कि इससे लोगों में ग़ैर-ज़िम्मेदारी और बेखौफ़ रहने की भावना घर करने लगेगी. फिर 1954 में 'ऑन द वाटरफ़्रंट' में वे एक नाकाम मुक्केबाज़ की भूमिका में नज़र आए जो माफ़िया सरगनाओं से दो-दो हाथ करता है. मार्लन ब्रांडो को आठ बार ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नामांकित किया गया जिसमें सात बार उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए नामांकित किया गया. 1990 में ए ड्राई व्हाइट सीज़न के लिए उनको सह अभिनेता के लिए नामांकित किया गया. एकाकी जीवन बाद के समय में ब्रांडो काफ़ी एकाकी जीवन बिताने लगे. अधिकतर समय वे ताहिती से 25 मील दूर टेटिआरोआ नाम के एक द्वीप पर रहे जहाँ उनकी तीसरी पत्नी तारिता तेरिपाइया का घर था. कहा जाता है कि वे कर्ज़ में बुरी तरह डूब गए थे. वैसे सुर्खियों में वे हमेशा बने रहे और उनका जीवन भी बड़ा नाटकीय रहा.कभी शादी को लेकर, तो कभी तलाक़ को लेकर, तो कभी प्रेम प्रसंग तो कभी अदालती चक्करों ने उन्हें सुर्खियों में रखा. उन्होंने तीन शादियाँ की थीं और उनके नौ बच्चे थे. 1990 में उनके बेटे क्रिश्चियन को अपनी बहन चेयेन के मंगेतर की हत्या के जुर्म में जेल की सज़ा हुई. 1995 में ब्रांडो की बेटी चेयेन ने आत्महत्या कर ली. बताते हैं कि बाद के सालों में मार्लन ब्रांडो अभिनय को लेकर क्षुब्ध रहते थे और बहुत कम ही ऐसे निर्देशक बचे थे जो उनके साथ काम करना चाहते थे. वे कहा करते थे,"मैं अभिनय से नफ़रत करता हूँ. मैं बस पैसे के लिए अभिनय करता हूँ". मार्लन ब्रांडो की निजी ज़िंदगी ने जो भी मोड़ लिया हो मगर फ़िल्मों के इतिहास में उन्हें उनके शुरूआती दिनों के उस अभिनय के लिए याद किया जाएगा जिसमें गहराई थी और वज़न था. उनके क़रीबी साथी जैक निकल्सन ने उन्हें कुछ ऐसे याद किया है,"मार्लन ब्रांडो ने हमें हमारी आज़ादी दी". |
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