 | | | नौशाद का संगीत आज भी लोकप्रिय है |
'ये कौन खुली अपनी दुकाँ छोड़ गया है'...अपने एक शेर में ऐसा कहने वाले जाने-माने संगीतकार नौशाद शुक्रवार, पाँच मई 2006 को इस दुनिया को अलविदा कह गए. नौशाद उन संगीतकारों की कड़ी के शायद आख़िरी स्तंभ थे जिनकी धुनें हमेशा मौलिक रहीं. उन पर कभी किसी की नक़ल करने का ठप्पा नहीं लगा. बीबीसी हिंदी ऑनलाइन की संपादक सलमा ज़ैदी ने कुछ समय पहले संगीतकार नौशाद से बातचीत की थी. साक्षात्कार में नौशाद ने कहा था कि सबसे अच्छी धुन बनाना तो अभी बाक़ी है और ठीक होने के बाद वो उस धुन पर काम करेंगे पर दुर्भाग्य से संगीत जगत उस धुन को नहीं सुन सका और नौशाद चले गए. |