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शनिवार, 08 अप्रैल, 2006 को 23:00 GMT तक के समाचार
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हिंदी में भी ख़ासे बिकते अंग्रेज़ी बेस्टसेलर

हैरी पॉटर
हैरी पॉटर जैसी किताबों का अनुवाद हाथों हाथ बिका है
अंग्रेज़ी की बेस्टसेलर यानी खासी बिकनेवाली किताबों के हिंदी अनुवाद अब भारत के छोटे शहरों में भी हाथों हाथ लिए जा रहे हैं.

अभी तक इनमें से ज़्यादातर किताबें अंग्रेज़ी के जानकारों के लिए ही उपलब्ध थीं, लेकिन अब इनके अनुवाद हिंदी सहित दूसरी भाषाओं में भी पढ़े जा सकते हैं.

अब दुकानों में हैरी पॉटर और पारस पत्थर, अति प्रभावशाली लोगों की सात आदतें, रिच डैड पुअर डैड, लोक व्यवहार, और बड़ी सोच का बड़ा जादू जैसी किताबें तो हैं हीं, साथ ही 'ए सुटेबल ब्वॉय', 'गॉड
ऑफ़ स्माल थिंग्स' और 'सिटी ऑफ़ जॉय' जैसी किताबों के भी अनुवाद आसानी से उपलब्ध हैं.

वैसे दुनियाभर में पसंद की जा रही किताबों को लेकर हिंदीभाषी लोगों में हमेशा से उत्सुकता रही है.

लेकिन हिंदी में अनुवाद की परंपरा न होने और बाज़ार के सिकुड़े होने के कारण किताबें हिंदी में नहीं आ पाती थीं.

लेकिन अब धीरे-धीरे लोगों की रुचि बदल रही है और इसके साथ ही प्रकाशकों की रुचि भी इन किताबों में बढ़ रही है.

अनुवाद के जलवे

अनुवाद प्रकाशन का प्रचलन अब ऐसा बढ़ गया है कि पेंगुइन इंडिया से लेकर राजकमल प्रकाशन और प्रभात प्रकाशन से लेकर मंजुल पब्लिकेशन तक सबकी रुचि अनुवाद में जाग गई है.

इसका कारण शायद यह भी है कि अनुवाद की किताबों को हिंदी की मूल किताबों की तुलना में ज़्यादा ग्राहक मिल रहे हैं.

बात अविश्वसनीय सी लगे लेकिन सच ये है कि हैरी पॉटर की हिंदी, मराठी, गुजराती और मलयालम में एक लाख से ज़्यादा प्रतियाँ बिक चुकी हैं.

भोपाल के मंजुल प्रकाशन ने ये अनुवाद प्रकाशित किए हैं.

मंजुल पब्लिकेशन के अनुवाद का ये सफ़र 1999 से शुरु हुआ. लेकिन इसने सन् 2003 से 'हैरी पॉटर और पारस पत्थर' के प्रकाशन के बाद गति पकड़ी.

 शुरु में हमने पैसा लगाकर एक तरह से अपने आपको एक ऐसे क्षेत्र में आजमाने की कोशिश की जहां कोई पब्लिकेशन जाना नहीं चाहता था
विकास रखेजा, मंजुल प्रकाशन

ये वो मौक़ा था, जब हैरी पॉटर हिंदी के अधिकार लेने के लिए मंजुल पब्लिकेशन ने दस लाख रुपए दिए. इससे पूर्व इतनी अधिक कीमत में भारत में शायद ही कोई अधिकार लिए गए होंगे.

इस साल के मध्य तक वो हैरी पॉटर की चौथी किताब बाज़ार में उतारने की तैयारी में है.

मंजुल पब्लिकेशन के विकास रखेजा कहते हैं,'' शुरु में हमने पैसा लगाकर एक तरह से अपने आपको एक ऐसे क्षेत्र में आजमाने की कोशिश की जहां कोई पब्लिकेशन जाना नहीं चाहता था.''

हैरी पॉटर के अलावा जो किताबें अच्छा व्यवसाय कर रही हैं वो व्यक्तित्व विकास की वो किताबें हैं, जो दुनिया भर में मशहूर हुई हैं.

उदाहरण के तौर पर 'हू मूव्ड माई चीज़' के हिंदी संस्करण की अब तक 50 हज़ार कॉपियां और रॉबर्ट कियोसाकी की बिज़नेस स्कूल की 70 हज़ार कॉपियां बेची जा चुकी हैं.

भोपाल के नूतन कॉलेज की छात्रा श्रुति उपाध्याय मानती हैं कि हिंदी में व्यक्तित्व विकास की किताब उन्हें बातों को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती हैं.

साहित्य भी

ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ हैरी पॉटर या 'हू मूव्ड माई चीज़' जैसी किताबें ही अनुदित हो रही हैं.

हिंदी के बड़े प्रकाशकों ने साहित्य की चर्चित या कहें कि ज़्यादा बिकने वाली किताबों के अनुवाद का एक नया सिलसिला शुरु कर दिया है.

विक्रम सेठ की 'ए सुटेबल ब्वाय' चर्चित हुई तो राजकमल प्रकाशन ने इसका अनुवाद पेश कर दिया 'एक अच्छा सा लड़का', इसी तरह अरुँधति रॉय की किताब 'गॉड ऑफ़ स्माल थिंग्स' को बुकर पुरस्कार मिलने के बाद इसका भी अनुवाद बाज़ार में आ गया.

अनुवाद और हिंदी के बाज़ार को देखते हुए पेंगुइन इंडिया ने पिछले साल से हिंदी में प्रकाशन का एक नया सिलसिला शुरु कर दिया है.

 बेस्टसेलर्स के हिंदी अनुवाद को पढ़ने वालों का एक बड़ा बाज़ार है
रशीद किदवई, पत्रकार-लेखक

पिछले साल प्रकाशित किताबों की श्रृंखला में कमलेश्वर, रांगेय राघव और मृदुला गर्ग की किताबों के अलावा ख़ुशवंत सिंह की किताब 'पैराडाइज़ एंड अदर स्टोरीज़', अनीता नायर की 'लेडीज़ कूपे' और नमिता गोखले की किताब 'शकुंतला' के अनुवाद भी थे.

पहले हिंदी पढ़ने समझने वाले लोगों के पास कोई विकल्प नहीं था लेकिन अब उन्हें आसानी से चर्चित किताबें मिल रही हैं.

सोनिया गांधी पर किताब लिखने वाले पत्रकार-लेखक रशीद किदवई मानते हैं कि अंग्रेज़ी बेस्टसेलर्स के हिंदी अनुवाद को पढ़ने वालों का एक बड़ा बाज़ार है.

उनका कहना है कि अब बाज़ार में अच्छे लेखन के कद्रदान मौजूद हैं और क़ीमत को कम लोग ही तवज्जो देते हैं.

वहीं विकास रखेजा मानते हैं कि कीमत आज भी महत्वपूर्ण है. यही वज़ह है कि उनकी हर किताब की कीमत अंग्रेज़ी संस्करण के मुक़ाबले काफ़ी कम रखी जाती है.

पता नहीं हिंदी लिखी और प्रकाशित हो रही किताबों को ख़रीदने वाले लोग कब मिलेंगे.

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