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'जो बोले सो निहाल' न दिखाने की मांग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सिखों की प्रमुख धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने 'जो बोले सो निहाल' फ़िल्म के निर्माता और निर्देशक से कहा है कि वे तुरंत अपनी फ़िल्म को दिखाना बंद करें. एसजीपीसी का कहना है कि यह फ़िल्म सिख धर्म की अवमानना करती है और जब तक इसमें ज़रूरी बदलाव नहीं किए जाते इसे नहीं दिखाया जाना चाहिए. एसजीपीसी के निर्देश पर प्रतिक्रिया देते हुए जो बोले सो निहाल के एक निर्माता और पंजाब में फ़िल्म के वितरक पोंटी चड्ढ़ा ने बीबीसी को बताया कि एसजीपीसी की इच्छा का सम्मान करते हुए शुक्रवार सुबह से यह फ़िल्म सिनेमाघरों से हटा ली जाएगी. लेकिन फ़िल्म के निर्देशक राहुल रवैल की राय पोंटी चड्ढा से अलग है. उनका कहना है कि फ़िल्म के प्रदर्शन को लेकर एक मामला अभी भी पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में लंबित है. एसजीपीसी के निर्देश पर राहुल रवैल ने यह कहकर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया कि मामला अभी भी अदालत के विचाराधीन है. उन्होंने कहा कि पंजाब के वितरक पोंटी चड्ढा का फ़ैसला उनका निजी फ़ैसला है. समिति सिखों के प्रमुख धर्म गुरु के निर्देश पर इसी सप्ताह एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था. इस समिति की सिफ़ारिश पर एसजीपीसी ने गुरुवार को फ़िल्म के निर्माता को यह आदेश दिया कि दुनियाभर में इस फ़िल्म का प्रदर्शन रोक देना चाहिए.
चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए एसजीपीसी की अध्यक्ष बीबी जगीर कौर ने बताया कि फ़िल्म निर्माताओं को फ़िल्म में ज़रूरी बदलाव करने को कहा गया है और इनमें फ़िल्म का नाम भी शामिल है. उन्होंने बताया कि फ़िल्म का नाम सिखों का धार्मिक नारा है. इस धार्मिक नारे का इस्तेमाल से फ़िल्म देखने जाने वाले दर्शकों को यह भ्रम हो सकता है कि यह एक धार्मिक फ़िल्म है. बीबी जगीर कौर ने बताया कि सिख बुद्धिजीवियों और विद्वानों की एक समिति ने फ़िल्म में बदलाव की सिफ़ारिश की थी. फ़िल्म के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद इस समिति का गठन किया गया था. फ़िल्म निर्माताओं को फ़िल्म के टाइटिल के साथ-साथ उस हिस्से को भी हटाने को कहा गया है जिसमें बीबी जगीर कौर के अनुसार सिखों के धार्मिक ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब के कुछ अंशों को भी तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है. एसजीपीसी ने यह भी मांग की है कि सिखों को सेंसर बोर्ड में भी शामिल किया जाना चाहिए. बीबी जगीर कौर ने कहा सभी टेलीविज़न सीरियल और फ़िल्में जिनमें सिख और उनकी जीवन शैली दिखाई जाती है, उन्हें प्रदर्शन से पहले एसजीपीसी की मंज़ूरी मिलनी चाहिए. |
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