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थियेटर को जया बच्चन का तोहफ़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जया बच्चन को हम सब 'मिली', 'शोले', 'अभिमान', और '1084 की माँ' जैसी फ़िल्मों में उनके यादगार अभिनय के लिए याद करते हैं. लेकिन अब जया ने थियेटर में भी अपना लोहा मनवा लिया है. दुबई में रमेश तलवार के निर्देशन में पेश किया गया संजय गोराडिया के नाटक 'डॉक्टर मुक्ता' से यह बात साबित हो गई कि जया जो भी रोल करती हैं उस किरदार में जान डाल देती है. 'डॉक्टर मुक्ता' का यह शो खाड़ी का प्रीमियर शो था. शो के पहले जया ने कहा कि 'डॉक्टर मुक्ता' एक गंभीर नाटक है, यह एक डॉक्टर और एक माँ के मन के अंतर्विरोध की कहानी है. यह एक डॉक्टर की बेटी के कैंसर से पीड़ित होने के बाद की घटनाओं पर आधारित है. मगर इसमें हल्के-फुल्के लमहे भी हैं और जिंदगी की कठिनाइयों से लड़ने की सीख भी. जया के लिए अभिनय़ एक लगन है और यह इस नाटक में नज़र आता है. उनके लिए थियेटर और फ़िल्म अलग नहीं मगर थियेटर कठिन ज़रुर है. वह कहती हैं, "थियेटर में सजग रहना पड़ता है. रीटेक जैसी कोई चीज़ नहीं. लोगों की पसंद-नापसंद का अंदाजा भी फौरन लग जाता है." जया अभिनय की अलग-अलग श्रेणी में भी यक़ीन नहीं रखतीं. उन्होंने कहा, "मैं शो के दौरान किसी से बात नहीं करती. ध्यान डॉक्टर मुक्ता पर होता है. ङर रहता है कहीं जया बच्चन न बन जाऊँ."
टैलेंट ब्रोकॅस ने यह शो अपने सिलवर जुबली के अवसर पर किया था. आयोजक पद्मा कोरम ने कहा, नाटक में जया के अलावा नंदू के रोल में सोनाली त्रिवेदी, डॉक्टर दुभाषी के रूप में भरत कपूर और देवदत्त के रोल में रमेश तलवार ने सहज भूमिका निभाई है. हरि भाई के रूप में ख़ुद संजय गोराडिया ने भी ख़ूब वाहवाही बटोरी. दुबईवासी दीपाली सेन के लिए यह शाम यादगार रही. जया की 'मिली' उनकी सबसे पसंदीदा फ़िल्म है. वह कहती हैं, "मिली और डॉक्टर मुक्ता में बहुत समानता है. जया ने 'मिली' में ख़ुद कैंसर पीड़ित की भूमिका निभाई है, और यहाँ उनकी बेटी के साथ ऐसा होता है. दोनों में उनका रोल बेजोड़ है" |
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