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बच्चों के लिए आया नया चैनल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नानी की कहानी तो शायद बहुत पहले ही पुरानी हो चुकी थी. क्योंकि उन कहानियों को सुनकर भारतीय बच्चों ने जब एमटीवी के साथ जवानी में कदम रखा तो उन्हें लगा कि ये तो कोई और ही दुनिया है. उनकी पुरानी दुनिया से बिल्कुल ही अलग और इसलिए धीरे धीरे नानी की दुनिया बदलने लगी. नानी और दादी की जगह ले ली टेलीविज़न ने. राजा-रानी और परियों की जगह आ गए कार्टून चरित्र. बच्चों की इस नई दुनिया की बादशाहत करने का सपना देखते हुए अब भारतीय टेलीविज़न पर आ गए हैं मिकी माउस और डोनल्ड डक. दुनिया भर में अपना डंका बजाने के बाद वाल्ट डिज़नी कंपनी ने भारत में भी दो टेलीविज़न चैनलों की शुरूआत कर दी है. कंपनी का मानना है कि भारत में दस करोड़ बच्चे हैं जो दस साल से कम उम्र के हैं और वो अपने साथ साथ अपने माता पिता की सोच को भी प्रभावित करते हैं. यानी एक साथ कई बाज़ारों पर निशाना साधने की कोशिश करेगी ये कंपनी. भारत का कोई कोना छूटने नहीं पाए इसलिए हिंदी और अंग्रेंजी के अलावा तेलुगू और तमिल में भी ये चैनल उपलब्ध होंगे.
भारत में वाल्ट डिज़नी टेलीविज़न इंटरनैशनल के प्रबंध निदेशक रजत जैन कहते हैं कि उनका ये चैनल भारतीय सोच और विचारों पर विशेष ध्यान देंगे. जैन का कहना है: ``हमारे कार्यक्रमों में मौलिकता दिखेगी.’’ साल 2001 तक भारत में बच्चों का केवल एक चैनल था टर्नर इंटरनेशनल का कार्टून नेटवर्क. लेकिन इसी साल यूटीवी, सोनी और टर्नर ने भी अपने चैनल शुरू किए. अब डिज़नी के बाज़ार में आ जाने से लगता है कि तिल धरने की जगह नहीं रह गई है. लेकिन जैन का कहना है कि ऐसा नहीं है. जैन कहते हैं,``ब्रिटेन में बच्चों के 25 चैनल हैं. लेकिन भारतीय बच्चे अपने टेलीविज़न देखने के समय का केवल दस प्रतिशत हिस्सा बच्चों के चैनल पर बिताते हैं. और वो शायद इसलिए है क्योंकि बच्चों के कार्यक्रम उतने अच्छे नहीं हैं.’’ |
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