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प्रकाश झा की फ़िल्म पर विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय समाज और राजनीति के ज्वलंत मुद्दों पर फ़िल्म बनाने के लिए मशहूर प्रकाश झा की एक और फ़िल्म विवादों में घिर गई है. दूरदर्शन ने समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण और आपातकाल पर बनायी प्रकाश झा की फिल्म "लोकनायक" को दिखाने से इनकार कर दिया है. हालाँकि यह फ़िल्म बनाने के लिए दूरदर्शन ने ही ही धन दिया था. अब प्रसार भारती ने प्रकाश झा को पत्र लिखकर कहा है कि वो इस फ़िल्म में आपातकाल लगाने के कारणों को भी बताएँ. इतना ही नहीं प्रसार भारती ने फ़िल्म में इंदिरा गाँधी के ख़िलाफ़ लगाए गए नारों पर भी आपत्ति की है और इन्हें फ़िल्म से हटाने को कहा है. यह फ़िल्म 11 अक्तूबर को जेपी के जन्मदिन पर दिखायी जानी थी लेकिन अब इस पर विवाद शुरु हो गया है. इस बारे में बीबीसी ने जब प्रकाश झा से संपर्क किया तो उनका कहना था, "ये काम बाबू लोगों (अफसरशाही) का है. इंदिरा गाँधी स्वयं मान चुकी थीं कि आपातकाल एक दुस्वप्न था." "सोनिया गाँधी ने भी माना है कि आपातकाल में ग़लतियाँ हुईं. राहुल ने भी अमेठी में कहा था कि इमरजेंसी में ज़्यादतियाँ हुईं लेकिन अधिकारी बेवजह की चाटुकारिता में लगें हैं." यह पूछे जाने पर कि दूरदर्शन के धन पर क्या उन्होंने नितांत आपातकाल विरोधी फ़िल्म तो नहीं बनायी थी, प्रकाश झा ने कहा, "मैं कलाकार हूँ. कलाकार के रुप में मेरा ईमान जीवित है. किसी के धन देने से क्या होता है. मैं इतिहास थोड़े ही बदल सकता हूँ."
प्रकाश झा ने यह नहीं बताया कि वो आगे क्या कार्रवाई करेंगे. दूसरी तरफ प्रसार भारती का कहना है कि हर फिल्म में संतुलन होना चाहिए. प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी निदेशक के एस सर्मा ने बीबीसी से कहा, "सेंसर बोर्ड किसी फ़िल्म को पास करे न करे. हम फ़िल्म देखते है क्योंकि इसमें सार्वजनिक धन लगा होता है. हम तय करते हैं कि पूरा परिवार फिल्म देख सके." प्रकाश झा को लिखे गए पत्र के बारे में सर्मा ने कहा, "मैंने वह पत्र तो नहीं देखा है लेकिन मेरी उनसे बात होती रही है. हम सुझाव देते रहे हैं और प्रकाश जी ने बदलाव भी किया है." सर्मा का कहना था कि दूरदर्शन पर दिखाई जाने वाली फ़िल्मों में संतुलन होना आवश्यक है क्योंकि पूरा देश इन्हें देखता है. प्रकाश झा और विवादों का पुराना साथ रहा है. इससे पहले उनकी फ़िल्म गंगाजल को लेकर भी विवाद हुआ था जो भागलपुर की एक सच्ची घटना पर आधारित थी. |
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