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गुरुवार, 14 अक्तूबर, 2004 को 10:57 GMT तक के समाचार
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अनुपम खेर का सुरजीत को क़ानूनी नोटिस
अनुपम खेर
अनुपम खेर ने मांग की है कि सरकार को उनको हटाए जाने का कारण बताना चाहिए
भारतीय सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के सरकार के फ़ैसले से नाराज़ अनुपम खेर का कहना है कि वह इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं.

दूसरी ओर उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता हरकिशन सिंह सुरजीत को मानहानि का एक क़ानूनी नोटिस भेजा है.

खेर का कहना है कि माकपा के मुखपत्र में लिखे लेख में सुरजीत ने उन्हें आरएसएस का सदस्य बताया है और इससे उनकी मानहानि हुई है.

ग़ौरतलब है कि बुधवार को केंद्र सरकार ने भारतीय सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद पर शर्मिला टैगोर को नियुक्त कर दिया था.

अनुपम खेर ने बुधवार को टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था.

गुरुवार को उन्होंने दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में कहा, "आपने सुना होगा कि जो लोग सत्ता में होते हैं वे लोगों को अपने हित साधने के लिए उपयोग में लाते हैं और फिर उनका तिरस्कार कर देते हैं, मैंने इसे देख लिया है और भुगत भी लिया है."

उनका कहना था, "मैंने जब एक साल पहले यह पद संभाला था तब मुझे अंदाज़ा नहीं था कि मुझे इस तरह बिना कारण बताए पद छोड़ने के लिए कहा जाएगा."

सुरजीत
अनुपम खेर का आरोप है कि सुरजीत के लेख से उनकी मानहानि हुई है

अनुपम खेर ने कहा कि उन्हें यह पद अनुभव के आधार पर दिया गया था न कि किसी राजनीतिक दल से संबद्धता के कारण.

उनका कहना है कि सरकार ने अब तक उन्हें नहीं बताया है कि उन्हें क्यों हटाया गया है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से जो पत्र दिया गया है उसमें नहीं यह नहीं कहा गया है कि उन्हें पद से हटाया जा रहा है.

उन्होंने वह पत्र पढ़कर सुनाया और कहा, "इस लिहाज़ से अभी सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद पर दो लोग हैं."

मानहानि का नोटिस

उन्होंने वह नोटिस भी पढ़कर सुनाया जो उन्होंने अपने वकील के ज़रिए माकपा नेता हरकिशन सिंह सुरजीत को भेजा है.

उन्होंने माकपा नेता हरकिशन सिंह सुरजीत के लेख का ज़िक्र करते हुए कहा, "हरजीत किशन सिंह सुरजीत ने विचार व्यक्त किया है कि मैं आरएसएस का आदमी हूँ इसलिए भारत सरकार के इस ढाँचे में रहने के योग्य नहीं हूँ. मैं इस बात से बेहद आहत हुआ हूँ."

 मैंने हरकिशन सिंह सुरजीत को क़ानूनी नोटिस भेजा है और हो सकता है कि मैं इस मामले में जीत न पाऊँ लेकिन जीतना महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि उन्हें बताया जाए कि वे किसी के भी बारे में इस तरह के बयान नहीं दे सकते जब तक उनको सच मालूम नहीं है
अनुपम खेर

उन्होंने कहा कि इस तरह के विचार उन्हें बदनाम करने के लिए लगाए गए हैं और इससे उनके आचार-व्यवहार पर प्रश्नचिन्ह लगाया जा रहा है.

उन्होंने मानहानि के नोटिस के बारे में कहा, "मैंने हरकिशन सिंह सुरजीत को क़ानूनी नोटिस भेजा है और हो सकता है कि मैं इस मामले में जीत न पाऊँ लेकिन जीतना महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि उन्हें बताया जाए कि वे किसी के भी बारे में इस तरह के बयान नहीं दे सकते जब तक उनको सच मालूम नहीं है."

ध्यान रहे कि हरकिशन सिंह सुरजीत ने माकपा के मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी में लिखे लेख में नौ संस्थानों के नाम लिखकर कहा था कि इनके महत्वपूर्ण पदों पर अब भी आरएसएस के लोग पदस्थ हैं. इनमें से एक नाम अनुपम खेर का भी था.

अनुपम खेर ने सरकार पर आरोप लगाया, "वे हरकिशन सिंह सुरजीत पर इतने अधिक निर्भर हैं कि उन्हें झुकने के लिए कहा जाता है तो वे रेंगने लगते हैं. यह शर्मनाक है."

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कलाकारों को राजनीतिक आधार पर बाँटने की कोशिश कर रही है.

उन्होंने इन आरोपों से से इनकार किया कि उनके कार्यकाल में किसी फ़िल्म को प्रमाण पत्र देने में जानबूझकर देरी की गई.

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