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अनुपम खेर से इस्तीफ़ा देने को कहा गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष अनुपम खेर से पद छोड़ने को कहा है जबकि खेर ने इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया है. अनुपम खेर इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए गुरुवार को दिल्ली में एक पत्रकार सम्मेलन करने वाले हैं. अनुपम खेर नियुक्ति भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के शासनकाल में हुई थी. अनुपम खेर से इस्तीफ़ा मांगने की भारतीय जनता पार्टी ने निंदा की है और इसे राजनीतिक बदले की भावना से उठाया हुआ क़दम बताया है. समाचार एजेंसियों के अनुसार अनुपम खेर ने यह पुष्टि की है कि उन्हें सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने पद छोड़ने को कहा है. अनुपम खेर ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है और कहा है कि अपने विचार व्यक्त करने के लिए वे गुरुवार को पत्रकारों से मिलेंगे. हालाँकि समाचार एजेंसी पीटीआई ने अनुपम खेर के क़रीबी सूत्रों के हवाले से कहा है कि वे अपने पद से इस्तीफ़ा नहीं देंगे क्योंकि यह उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने जैसा है. सूत्रों ने कहा है कि यदि सरकार चाहे तो अनुपम खेर को बर्ख़ास्त कर दे. दिल्ली से प्रकाशित होने वाले एक अख़बार ने ख़बर दी है कि सरकार को समर्थन दे रहे वामदलों के दबाव में अनुपम खेर को हटने के लिए कहा गया है. भाजपा नाराज़ भारतीय जनता पार्टी के महासचिव अरूण जेटली ने अनुपम खेर से इस्तीफ़ा माँगे जाने की ख़बरों की निंदा की है. पत्रकारों से बात करते हुए अरुण जेटली ने कहा, "ये सरकार आरंभ से ही बदले की भावना से काम कर रही है इसका नया उदाहरण मिला है. उन्होंने राज्यपालों से शुरु किया फिर उसे शिक्षा के क्षेत्र में पदस्थ लोगों को हटाया गया और अब सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष अनुपम खेर से इस्तीफ़ा माँगा गया है." उन्होंने कहा है कि अनुपम खेर की कोई राजनीतिक प्रतिबद्धता नहीं रही है और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के पद को कभी सरकारों से जोड़ कर नहीं देखा गया है. अरुण जेटली ने कहा कि सरकार ने एक और ग़लत परंपरा बनाई है. उन्होंने कहा कि यह सरकार की मानसिक संकीर्णता का उदाहरण है. |
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