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चुनावी मैदान में एक और फ़िल्मी हस्ती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंदी सिनेमा के जाने-माने निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा बिहार के बेतिया संसदीय क्षेत्र से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने अपने इस फैसले को अपनी जन्मभूमि चंपारण की जन-समस्याओं से जुड़ा हुआ बताया है. `दामुल', `मृत्युदंड' और `गंगाजल' समेत कई बहुचर्चित फिल्मों के ज़रिए सामाजिक विसंगतियों और दुराचारों के ख़िलाफ़ जन-मानस तैयार करने का दावा करने वाले प्रकाश झा कहते हैं, "अब पर्दे के संघर्ष-चित्र को सरज़मीन पर सार्थक बनाने का वक़्त आ गया है." किसी दल में शामिल होकर सक्रिय राजनीति में उतरने के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार बनकर चुनाव लड़ने का कारण स्पष्ट करते हुए प्रकाश झा ने कहा, "केंद्र या राज्यों में सत्ता पक्ष या विपक्ष की भूमिका निभा रहे दलों ने लोगों को धोखे और घुटन के सिवा और दिया क्या है." वे पूछते हैं, "नेतृत्व क्या इसी को कहते हैं? मैंने अपने तीस वर्षों के फिल्मी सफ़र में जिन सरोकारों की बातें की हैं, उनको और अधिक शक्ति दिलाने वाली राजनीति होगी मेरी." बिहार के राजनीतिक हलक़ों में इस बात की चर्चा होने लगी है कि प्रकाश झा की राजनीतिक सक्रियता बेतिया तक सीमित रहेगी या एक नई धारा के रूप में आगे बढ़ेगी. बेतिया संसदीय सीट लंबे अर्से से बीजेपी के क़ब्ज़े में रही है. बेतिया से तेरहवीं लोकसभा के सांसद मदन प्रसाद जायसवाल को चुनौती देने के लिए इस बार राष्ट्रीय जनता दल की ओर से रघुनाथ झा चुनावी मैदान में उतर रहे हैं. लेकिन इसी बीच प्रकाश झा का अचानक हस्तक्षेप ख़ासा दिलचस्प हो उठा है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और राष्ट्रीय जनता दल - दोनों को चिंता में डाल देने वाली इस फिल्मी हस्ती का जनाधार देखना अभी बाक़ी है. |
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