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मार दे...मार दे...छक्का...कैच! | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दोनों अंपायर मैदान में आ गए, फ़ील्ड में भेड़ें बिखर गईं, खेल शुरू.... टीवी गर्म. जिसे देखो वही टीवी के सामने 'हिज़ मास्टर्स वॉयस' के कुत्ते की तरह मुँह उठाए बैठा है. जिनके बाप-दादों ने भी कभी रैट माने चूहा नहीं पढ़ा, अंग्रेजी कमेंट्री पर यूँ कान लगाए बैठे हैं, जैसे सारे कॉमा, फ़ुलस्टॉप समझ रहे हैं. अब सीन देखो आप. सीन नम्बर एक- पेवेलियन छोर से कुम्बले गेंद डाल रहे हैं. छोकरे बालकनी पर खड़ी गोपाल बाबू की बेबी पर डोरे डाल रहे हैं. क्रिकेट की भाषा में 'डबलस्पिन अटैक' इसे ही कहते हैं. सीन नम्बर दो- मेरे घर में बर्तन-पोछा करनेवाली नौकरानी भी कमर में एक छोटा सा ट्रांजिस्टर खोंसे रहती है. सहवाग का छक्का सुनते ही हाथ से पतीली मारे ख़ुशी के इतनी ज़ोर से उछाली कि उसे कई घर आगे मुहल्लेवालों ने गली में कैच किया. किसे? पतीली को, नौकरानी को नहीं. सीन नम्बर तीन- एक सखी अपनी सखी को छेड़ती है, "अरे ठहर न, क्यों इरफ़ान पठान की गेंद जैसी भागी जा रही है." भाभी अपनी कुँवारी ननद को ताना मारती है, "ए लाडोजी, आजकल नई गेंद जैसा बहुत स्पिन ले रही हो, कहीं बाउंड्री पर कैच न हो जाना." ननद बैक ड्राइव करती हैं, "रहने दो भाभी, तुम्हीं कौन कम हो, भइया मिड-ऑन पर न खड़े रहें तो छक्के उड़ाती घूमो."
सीन नम्बर चार- बड़ी-बूढ़ियाँ तक इस मौसम में माला के दानों पर स्कोर की गिनती गिनती हैं. हमारे दोस्त की नानी ने दोस्त के नाना से पूछा, "क्यों जी छुटकन के नाना, क्या 75 ओवर के बाद पुरानी गेंद बदल दी जावे है?" नानी चौहत्तर की थीं. नाना ने सफ़ेद मूँछ आईने में इस शान से ऐंठी जैसे अंपायर उन्हें नई गेंद दिए ही तो दे रहा है. सीन नम्बर पाँच- गोकरन लाला कचहरी से लौट रहे थे. किसी ने पास आकर कहा, "ख़ुश हो जाओ लाला, छह हो गए. लाला अपनी छतरी और थैला सड़क पर ही फेंककर चीखे, "क्या कहा, छह हो गए. सुबह कचहरी को चला था तब तक पाँच थे, न पाँव भारी था, न मितली आ रही थी, छठा कैसे हो सकता है?" लोगों ने समझाया कि बात क्रिकेट के गिरे हुए छह विकेटों की हो रही है. तब लाला ख़ुशी-ख़ुशी घर को लौटे. कुल मिलाकर यह दोमुहाँ खेल अपना जवाब नहीं रहने देता. आदमी भूखे रहने का विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है, सिर्फ़ उसे टीवी पर एक हारा जीता मैच देखने को मिल जाए. हार-जीत तो भगवान और अंपायर के हाथों में है. हम तो सिर्फ़ बतर्ज़ विज्ञापन इतना ही कहेंगे, लगे रहो इंडिया....लगे रहो, मार दे....मार दे छक्का. अरे..ये क्या? कैच हो गया. |
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