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बीसवीं सदी का बंगाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्ला फ़िल्म चोखेर बाली इतने दिनों से चर्चा में है कि लंदन में उसकी रिलीज़ का बेसब्री से इंतज़ार था. शुक्रवार को लंदन के सिनेमाघरों में जब फ़िल्म रिलीज़ हुई तो छुट्टी का दिन न होते हुए भी टिकट खिड़कियों पर दर्शकों की भारी भीड़ जमा थी. ऋतुपर्णो घोष की इस फ़िल्म में ऐश्वर्या राय की मौजूदगी ने दर्शकों की बेसब्री और बढ़ा दी थी. बीसवीं सदी के बंगाल के सामंतवादी समाज को दर्शाती इस फ़िल्म में उस समय के तौर-तरीक़ों और रीति-रिवाजों का पूरा ध्यान रखा गया है. फ़िल्म कई समारोहों में शामिल हो चुकी है और पुरस्कार जीत चुकी है. कहते हैं फ़िल्म की ख़ास बात है उसका क्लाइमेक्स जो अचानक ऐसा मोड़ लेता है कि दर्शक भौचक्के रह जाते हैं. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * बाबुल में काजोल भी काजोल ने काफ़ी समय आराम करने के बाद एक बार फिर रुपहले परदे का रुख़ किया है.
निर्माता-निर्देशक रवि चोपड़ा ने 'बाग़बान' की हिट टीम अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी और सलमान ख़ान को दोबारा साथ लाने की सोची तो उन्हें एक और अहम किरदार की तलाश थी. फ़िल्म ससुर और बहू के बीच के रिश्ते पर आधारित है और इसके लिए रवि चोपड़ा को एक सशक्त अभिनेत्री की ज़रूरत थी जो अमिताभ बच्चन का सामना कर सके. और उस समय उनके ज़हन में काजोल का नाम आया. और इस तरह काजोल उनकी आने वाली फ़िल्म 'बाबुल' का हिस्सा बन गईं. रवि चोपड़ा कहते हैं, काजोल ने स्क्रिप्ट पढ़ी जो उन्हें बहुत पसंद आई. काजोल अमिताभ और सलमान के साथ तो पहले भी परदे पर नज़र आई हैं लेकिन हेमा मालिनी के साथ यह उनकी पहली फ़िल्म है. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * दोबारा पाकिस्तान में... शशि रंजन अपनी फ़िल्म दोबारा का प्रीमियर पाकिस्तान में करने की तैयारियाँ कर रहे हैं.
फ़िल्म में जैकी श्रॉफ़, रवीना टंडन और महिमा चौधरी के अलावा पाकिस्तानी अभिनेता मुअम्मर राना ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाई हैं. फ़िल्म के निर्माता इस्लामाबाद और लाहौर में इस बारे में उच्चाधिकारियों से बात कर रहे हैं. इससे पहले पूजा भट्ट ने अपने निर्देशन में बनी पहली फ़िल्म पाप का कराची फ़िल्म समारोह में प्रीमियर किया था. यह फ़िल्म पाकिस्तान में बेहद लोकप्रिय हुई थी. कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के थियेटर मालिक सरकार पर इस बात के लिए ज़ोर डाल रहे हैं कि उन्हें अपने सिनेमाघरों में भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन की अनुमति दी जाए. अब दोनों देशों के संबंध क्योंकि सुधार की ओर बढ़ रहे हैं, इसलिए यह क़दम उठाया जाना कोई अनहोनी बात नहीं होगी. |
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