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'कल हो ना हो' का बोलबाला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय भारतीय फ़िल्म एकेडमी (आईआईएफ़ए या आइफ़ा) में करन जौहर की फ़िल्म 'कल हो ना हो' का जलवा छाया रहा. सिंगापुर में आइफ़ा फ़िल्म समारोह के 13 वर्गों में से आठ वर्गों में 'कल हो ना हो' ने पुरस्कार बटोरे. फ़िल्म को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म और सर्वेश्रेष्ठ अभिनेत्री का भी पुरस्कार मिला. प्रीति ज़िंटा ने सर्वेश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता. सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुने गए ऋतिक रोशन जिन्हें 'कोई मिल गया' फ़िल्म के लिए पुरस्कृत किया गया. ऋतिक के पिता राकेश रोशन को 'कोई मिल गया' के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला.
'कल हो ना हो' में अभिनय के लिए सैफ़ अली ख़ान को सह अभिनेता और जया बच्चन को सह अभिनेत्री का पुरस्कार मिला. 'कल हो ना हो' की कहानी लिखने के लिए करन जौहर को, गानों के बोल के लिए जावेद अख़्तर को और गायन के लिए सोनू निगम को पुरस्कार मिले. फ़िल्म के संगीत के लिए शंकर-एहसान-लॉय की टीम ने पुरस्कार जीता. श्रेया घोषाल को 'जिस्म' फ़िल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ गायिका का पुरस्कार मिला. आइफ़ा समारोह में भाग लेने के लिए हिंदी फ़िल्म जगत के मौजूदा और पुराने समय के कई सितारे सिंगापुर पहुँचे. |
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