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सुष्मिता फिर एक बोल्ड भूमिका में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आपको लग रहा होगा कि रुपहले परदे पर यौनकर्मियों को जीवंत करने के लिए चमेली और मार्केट के बाद अब शायद और किसी फ़िल्म की तैयारी नहीं है. लेकिन ऐसा नहीं है. सुष्मिता सेन ऐसा ही एक रोल निभा रही हैं- 'दी प्रॉस्टीट्यूट ऐंड दी पोस्टमैन' में. कल्पना लाजमी की इस फ़िल्म में पोस्टमैन यानी डाकिए की भूमिका निभा रहे हैं करण नाथ. पहले हीरोइन का रोल बिपाशा बसु को ऑफ़र किया गया था और उसके बाद सुना है कि प्रीति ज़िंटा से भी बात हुई. लेकिन कहा जा रहा है कि पैसे की कमी का मामला आड़े आ गया. हालाँकि कल्पना लाजमी की ही फ़िल्म 'दमन' में काम करना रवीना टंडन को इतना रास आया था कि उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार तक हासिल कर लिया. वैसे, यह और बतादें कि इस फ़िल्म की कहानी भूपेन हज़ारिका ने लिखी है. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * ज़ायेद भी हैं न! ज़ायेद ख़ान उन अभिनेताओं में से हैं जो अच्छी शक्लो सूरत और प्रतिभा के बावजूद अपनी पहली फ़िल्म में कोई छाप नहीं छोड़ पाए थे. लेकिन हाल ही में रिलीज़ हुई 'मैं हूँ न' से उन्हें बहुत उम्मीदें हैं.
शाहरुख़ ख़ान और सुनील शेट्टी की मौजूदगी से वह ज़रा भी चिंतित नहीं है. उनका मानना है कि इस फ़िल्म में दर्शक उन्हें नोटिस किए बिना रह ही नहीं सकते. नृत्य-निर्देशिका फ़राह ख़ान ने पहली बार इस फ़िल्म का निर्देशन किया है. इस रोमांटिक कॉमेडी में सुष्मिता सेन और अमृता राव को भी दर्शक ज़रूर याद रखेंगे. फ़िल्म में अन्य अहम किरदार निभा रहे हैं सतीश शाह, किरण खेर, कबीर बेदी, बिंदु और नसीरुद्दीन शाह. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आमार शोनार बांग्ला... सोहा अली ख़ान की सिर्फ़ यही पहचान नहीं है कि वह शर्मिला टैगोर और नवाब पटौदी की बेटी और सैफ़ अली ख़ान की बहन हैं. उन्होंने वह हिम्मत कर दिखाई जिसके लिए नई अभिनेत्रियों को काफ़ी अरसे तक सोचना पड़ता है.
यानी, उनकी पहली हिंदी फ़िल्म 'दिल मांगे मोर' का अभी प्रदर्शन होना बाक़ी है लेकिन उन्होंने एक ऐसी बंगला फ़िल्म पूरी कर ली जो उनकी सबसे पहली रिलीज़ होगी. शरतचंद्र के मशहूर उपन्यास श्रीकांत पर आधारित इस फ़िल्म का नाम है-'इबोंग श्रीकांत'. सोहा अली ने इसमें एक विशुद्ध बंगाली युवती की भूमिका निभाई है. और भाषा बोलने में तो उन्हें कोई समस्या आई नहीं होगी क्योंकि एक तरह से बांग्ला उनकी मातृभाषा जो है. शर्मिला टैगोर ने भी पहले बांग्ला फ़िल्मों से ही अपनी पहचान बनाई थी. |
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