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पेरिस में भारतीय फिल्म समारोह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस की राजधानी पेरिस को अंतरराष्ट्रीय फिल्मों का गढ़ भी माना जाता है. आज से सवा सौ साल पहले लुमिये बंधुओं ने फिल्मों को यहीं जन्म दिया था. 60 के दशक में फ्रांस की नई लहरों की फिल्मों ने विश्व सिनेमा पर काफ़ी प्रभाव डाला. पिछले 30 वर्षों में भारतीय फिल्मों में तकनीक और कथावस्तु को लेकर जो परिवर्तन आए हैं उनपर फ्रांसीसी नई लहर फिल्मों की छाप देखी जा सकती है. बहरहाल सत्यजीत रे और मृणाल सेन जैसे फ़िल्मकारों की बात छोड़ दी जाए तो भारत की फिल्में फ्रांस में इतनी लोकप्रिय नहीं हो पाईं. मगर अब तस्वीर बदल रही है. फ़िल्म समारोह
आजकल पेरिस के पौम्पिदू केंद्र में भारत की लोकप्रिय फ़िल्मों का एक समारोह चल रहा है जिसमें ख़ासतौर पर हिंदी फिल्मों का प्रदर्शन हो रहा है. समारोह के पहले भाग में गुरूदत्त, राजकपूर, महबूब खान, बिमल राय, वी शांताराम द्वारा निर्देशित फिल्में दिखाई जा रही हैं. समारोह के दूसरे भाग में धर्म, कला और इतिहास को लेकर फिल्में हैं - जैसे संत तुकाराम, सिकंदर, कल्पना और भवनी भवाई. समारोह में फिल्मों के चयनकर्ता नदीन तारबूरिश का कहना है, "भारतीय नारी के अलग-अलग रूपों का प्रतिनिधित्व करने वाली फिल्मों का मैंने ख़ास चयन किया है - `उमराव जान ', `चाँदनी बार ', शेखर कपूर की `बैंडिट क्वीन ' या चंदन अरोड़ा की `मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूँ '." उन्होंने बताया,"फ्रांस में परिवार प्रणाली भारतीय परिवार व्यवस्था जैसी ही है इसलिए मैंने इस समारोह में हिंदी पारिवारिक फिल्मों `सुजाता', `तेरे घर के सामने ', `किस्मत ' और `कभी खुशी कभी ग़म ' को भी स्थान दिया है." इस समारोह में समकालीन विषयों जैसे चरमपंथी किरदार और हिंसा पर प्रकाश डालने वाली फिल्में हैं, मिसाल के तौर पर रामगोपाल वर्मा की 'सत्या' और 'कंपनी'. इसके अलावा, मणिरत्नम की 'दिल से' का विशेष प्रदर्शन किया जा रहा है. फिल्म 'दिल से' और 'कम्पनी' के प्रदर्शन के अवसर पर मुंबई से मनीषा कोइराला और विवेक ओबेरॉय को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था. कलाकारों के अनुभव मनीषा कोइराला को पेरिस से ख़ास लगाव है. उन्होंने बताया कि वे पेरिस की कला, पुरातत्व , संग्रहालयों और खान-पान से बहुत प्रभावित हैं. विवेक ओबेरॉय ने फ्रांसीसी कलाकारों से बातचीत करते हुए कहा, "यह कैसी विवशता है कि मुझे अंग्रेज़ी भाषा में आपसे बातचीत करनी पड़ रही है, जो न आपकी मातृभाषा है और न मेरी. अगली बार जब मैं पेरिस आऊंगा तो ज़रूर फ़्रेंच का अभ्यास करूंगा." विवेक ओबेरॉय ने बताया कि उन्हें समारोह में फ्रेंच गायक पास्कल द बॉलीवुड के गाए हिंदी फ़िल्मों के गीत बेहद पसंद आए जो उन्होंने समारोह में ख़ासतौर पर पेश किए. |
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