|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस में भारतीय ज़ायक़े की धूम
अगर आप ताजमहल और लाल क़िला देखना चाहें, राजस्थानी लोक नृत्य का लुत्फ़ उठाना चाहें, कर्नाटक की दस्तकारी देखना चाहिए, केरल के मसाले ख़रीदना चाहें और पंजाबी, राजस्थानी और बंगाली खान चखना चाहें तो आप क्या करेंगे? इतने सारे सवालों के दो जवाब हो सकते हैं- एक तो ये कि आप एक महीने के लिए भारत की सैर पर निकल जाएँ या फिर ये सारे आनंद लेने के लिए सिर्फ़ एक रात के पेरिस पहुँच जाएँ. जी हाँ, अक्तूबर के पूरे महीने आप इन सब का आनंद पेरिस में ही उठा सकते हैं क्योंकि पेरिस के एक रेस्तराँ और भारतीय पर्यटन विभाग ने मिलकर यह अनोखा प्रयोग किया है. यह दरअसल भारतीय भोजन उत्सव है जो अक्तूबर में पूरे महीने चलेगा. आयोजकों का कहना है कि 1987 में भारत महोत्सव के बाद फ्रांस में पहली बार ऐसा प्रयोग किया गया है. यह उत्सव पेरिस के सबसे बड़े भारतीय रेस्तराँ लाल क़िला में आयोजित किया जा रहा है. यह रेस्तराँ बारह साल पहले बनाया गया और इसका बाहरी नक्शा और दस्तकारी पूरी तरह से लाल क़िले की वास्तुकला पर आधारित है. एक तरह से यह बिल्कुल लाल क़िले का ही नमूना है. इसके अंदर की ख़ूबसूरती बढ़ाने के लिए एक बड़ा सा ताजमहल बनाया गया है. लाल क़िला और ताज लाल क़िला रेस्तराँ के मालिक सग़ीर अहमद का कहना है कि इस रेस्तराँ का डिज़ाइन मशहूर फ़िल्म निर्माता-निर्देशक कमाल अमरोही ने ख़ुद बनाया था.
"मैं इस पर पिछले छह-सात महीने से काम कर रहा हूँ. हमने रेस्तराँ को अंदर से सजाया है और बाहर और पहली मंज़िल पर एक बाज़ार भी सजाया गया है जहाँ भारतीय व्यंजन, मसाले, दस्तकारी वग़ैरा ख़रीदी जा सकती है." वह बताते हैं कि हर रोज़ अलग-अलग लोक नृत्य और गीत-संगीत का कार्यक्रम होता है. सग़ीर अहमद का कहना था कि एक महीने के दौरान इस उत्सव में क़रीब 800 तरह के व्यंजन तैयार किए जाएंगे, अगर कोई यहाँ हर रोज़ भी खाए तो एक व्यंजन दोबारा नहीं मिलेगा. "हम भारत के विभिन्न हिस्सों के व्यंजन बनाएंगे, कश्मीर से केरल तक और गुजरात से मिज़ोरम तक की स्वाद चखा जा सकेगा." इसके अलावा लोक नृत्य और गीत संगीत के प्रचार के लिए एक अनोखा तरीक़ा भी अपनाया गया है. कलाकार एक ट्रक पर नाचते गाते हैं और वह ट्रक पेरिस में घूम रहा है जिस पर ताजमहल का बड़ा सा नमूना लगा है. प्रचार भारतीय पर्यटन निगम के पेरिस दफ़्तर की निदेशक रेखा खोसला का कहना था कि इस उत्सव से भारत के बारे में प्रचार बढ़ेगा.
हालाँकि इस उत्सव से भारतीय व्यंजनों का नाम फ्रांस में और फैलेगा लेकिन भारतीय भोजन फ्रांस के लिए कोई नई बात नहीं है. यहाँ भारतीय रेस्तराँ खुलने की शुरुआत 1980 में हुई थी लेकिन 1987 तक कुछ चुनिंदा स्थानों पर ही थे और ज़्यादातर कुछ महंगे भी थे इसलिए उनका ख़र्च आम फ्रांसीसियों की जेब के बाहर की बात थी. 1987 में जब भारत महोत्सव का आयोजन किया गया तो भारतीय भोजन और व्यंजन फ्रांस में बहुत लोकप्रिय हुए जिसके बाद तो भारतीय रेस्तराँ की भरमार हो गई. किरण गुप्ता ने फ्रांस में भारतीय भोजन के फैलाव को बहुत नज़दीक से देखा और उन्हें इसकी ख़ासी जानकारी भी है. सिलसिला पिछले क़रीब बीस वर्षों से फ्रांस में भारतीय रेस्तराँ चला रही किरण गुप्ता का कहना था कि पिछले चार-पाँच साल में फ्रांस पर भारतीय कुसीन का एक जादू सा छा गया है. "फ्रांस के हर कोने में भारतीय रेस्तराँ खुलने लगे हैं और पिछले दो वर्षों में ही पेरिस और आसपास के इलाक़ों में ही भारतीय रेस्तराँ की संख्या दोगुनी हो गई है." एक नई बात यह भी हुई है कि ये रेस्तराँ खुलने से भारतीय कुसीन अब आम फ्रांसीसी आदमी की पहुँच में आ गई हैं. पेरिस के गेर दी ईस्त और गेर दी नोर्द इलाक़ों में तो आप चार पाँच यूरो में भोजन कर सकते हैं जोकि एक सेंडविच की क़ीमत होती है. इस तरह का भोजन फ्रांस के नवयुवक और नवयुवतियाँ बहुत पसंद करते हैं क्योंकि ये उनके बजट में होता है. पेरिस की एक प्रचार कंपनी में काम करने वाली हश्का दी ब्रेज़ा का कहना था, "मैं तो सप्ताह में दो तीन बार भारतीय भोजन करती हूँ. यह अच्छा भी है और सस्ता भी. और बहुत से ज़ायक़े भी मिलते हैं." फ्रांस में भारतीय भोजन के लिए बढ़ती दीवानगी को देखकर किरण गुप्ता अब एक और नया रेस्तराँ दिसंबर में खोल रही हैं. यह फ्रांस का और शायद पूरे यूरोप का पहला 'कोशेर' भारतीय रेस्तराँ होगा. "यहाँ का यहूदी समुदाय भी काफ़ी बड़ा है. इसलिए यह रेस्तराँ मैं उनके लिए खोल रही हूँ." अब क़सर है तो भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का भोजन और संस्कृति फ्रांस में देखने की. शायद कारोबार के लिए यह भी एक अच्छा नुस्ख़ा साबित हो जाए. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||